भले ही मामा का मध्यप्रदेश से राजनीतिक मोह खत्म नहीं हो रहा, लेकिन मध्यप्रदेश में अब उनका ‘राजनीतिक औरा’ खत्म हो चला है…वो निष्ठावान नेता भी उनसे दूरियां बनाने में लग गये हैं, जो उनके मुख्यमंत्री रहते रात-दिन ‘मामा नाम’ की माला जपते-पहनते थे… जिन्हें मामा ने राजनीति करना सिखाया…विधानसभा और संसद तक पहुंचाया…नारदजी कहते हैं कि जब से मामा केंद्रीय मंत्री की भूमिका में दिल्ली शिफ्ट हुये हैं, उनके आसपास ‘लिली’ सरीखे नेता भर दिखाई देते हैं…बाकी, उनके अपने विधायक-सांसद ‘मिस्टर इंडिया’ हो गये हैं।
नेता पुत्र का ऐसा रसूख!
मध्यप्रदेश भाजपा सरकार के एक ‘संकटमोचक’ नेता अब पूर्व मंत्री हो चुके हैं। विधायकी भी जा चुकी है, लेकिन उनके पुत्र का राजनीतिक रसूख शासन-प्रशासन में अब तक बखूब कायम है। रसूख ऐसा कि, वो ‘रात को दिन, दिन को रात कहें’, तो कहना पड़ता है। नेता पुत्र के रसूख को ऐसे समझिये कि, एक गरीब आदिवासी पट्टे में मिली जमीन का नामांतरण कराने जब भोपाल के एक तहसील कार्यालय पहुंचा, तो उसे पता चला कि, उसके पट्टे की जमीन तो तहसीलदार साहब नेता पुत्र के नाम कर चुके हैं। .नारदजी कहते हैं कि अब गरीब आदिवासी हक के लिये भटक रहा है, नेता पुत्र पर कार्रवाई कौन करे?
कुर्सी जाने के डर से मंत्री परेशान!
मोहन सरकार के चार मंत्री इन दिनों कुर्सी जाने के डर से परेशान हैं। दरअसल, मोहन मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चा चल पड़ी है। अभी मोहन मंत्रिमंडल में 30 मंत्री हैं। कहा जा रहा है कि फेरबदल में इनमें से व्ही, एस और आर नामधारी मंत्रियों को बदला जा सकता है। इसलिए कि, इन मंत्रियों के चाल-चरित्र और कार्यशैली की शिकायतें दिल्ली तक पहुंची हैं। शिकायत में कहा गया है कि, इन मंत्रियों के आचरण और कार्यशैली से सरकार और पार्टी की इमेज खराब हो रही है। नारदजी कहते हैं कि कुर्सी खतरे में हो और मंत्री परेशान न हों ऐसा कैसे हो सकता है।
कौन बचा रहा संस्कारी नेता-अधिकारियों को?
ड्रग्स और लव जिहाद कांड को लेकर भोपाल से दिल्ली तक हडक़ंप है। इसके प्रमुख कर्ताधर्ता मछली बंधु तो पकड़ लिए गए। लेकिन उनके हथाईखेड़ा डेम स्थित फार्म हाउस पर आए दिन आयोजित ‘सांस्कृतिक पार्टियों’ में आनंद करने वाले संस्कारी नेता-अधिकारी अब तक बचे हुए हैं। ये नेता-अधिकारी कौन हैं? इन्हें किसके इशारे पर, क्यों बचाया जा रहा है? यह तो जांचकर्ता अधिकारी ही बता सकते हैं। फिलहाल तो राजधानी के राजनीतिक-प्रशासनिक गलियारों में बदनामी के खौफ से हडक़ंप मचा हुआ है।
प्रमोटी आईएएस ससुराल पर मेहरबान!
एक प्रमोटी आईएएस अधिकारी के खिलाफ ससुराली-जनों पर खास मेहरबान होने और आय से अधिक संपत्ति कमाने की शिकायत लोकायुक्त में हुई है। बताते हैं कि साहब की ज्यादातर समय पदस्थापना प्रदेश के सबसे मालदार जिलों-देवास, उज्जैन और इंदौर में रही है। सो, इस दौरान साहब ने जमकर कमाई की और सास, साले-सालियों (स्वयं के नहीं) के नाम पर ग्वालियर संभाग में अरबों की बेनामी संपत्ति खरीदी। नारदजी बता दें कि ये साहब तीन साल विंध्य के एक जिले में कलेक्टरी करने के बाद वर्तमान में मंत्रालय स्थित तकनीकी शिक्षा विभाग की शोभा बढ़ा रहे हैं।







