भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री के गृहनगर उज्जैन से ही सरकार के खिलाफ आवाज उठने के मामले बढ़ते नजर आ रहे हैं। पहले किसानों के मुद्दे पर भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय ने अपनी ही सरकार को घेरा था और अब उज्जैन उत्तर से विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने सड़क चौड़ीकरण के मुद्दे पर खुलकर विरोध जताया है। खास बात यह है कि संगठन की समझाइश के बाद भी कालूहेड़ा अपने रुख पर कायम हैं। ऐसे में पार्टी के भीतर अनुशासन और असंतोष को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
समझाइश के बाद भी शांत नहीं हुआ विवाद
उज्जैन उत्तर से विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा को भोपाल बुलाकर मुख्यमंत्री निवास में बातचीत की गई। बताया जा रहा है कि उनसे कहा गया कि यदि कोई जनहित का मुद्दा था तो उसे पहले पार्टी के मंच पर उठाना चाहिए था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने उनसे चर्चा कर संयम बरतने की सलाह दी। हालांकि कालूहेड़ा का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण जैसे मुद्दे पर निर्णय लेने से पहले स्थानीय जनता से संवाद होना जरूरी है। उनका कहना है कि वे विकास कार्यों के विरोध में नहीं हैं, लेकिन ऐसा समाधान होना चाहिए जिससे लोगों के घर भी बच सकें।
किस सड़क को लेकर खड़ा हुआ विवाद
दरअसल विवाद उज्जैन के पिपलीनाका इलाके में प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण को लेकर है। यहां सड़क को 24 मीटर तक चौड़ा करने की योजना है। विधायक कालूहेड़ा का कहना है कि इस परियोजना की जद में लगभग 400 से अधिक मकान आ रहे हैं और रहवासियों को सात दिन के भीतर मकान खाली करने के नोटिस भी दिए जा चुके हैं। कालूहेड़ा ने स्थानीय लोगों से वादा किया है कि सड़क का निर्माण ऐसा हो जिससे ज्यादा से ज्यादा घर बच सकें। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वे जनता के साथ खड़े होकर आंदोलन भी करेंगे।
भाजपा में अनुशासन पर फिर सवाल
भाजपा लंबे समय तक अपने कड़े संगठनात्मक अनुशासन के लिए जानी जाती रही है, लेकिन लगातार सत्ता में रहने के बाद पार्टी के भीतर खुलकर बयानबाजी के मामले बढ़े हैं। पिछले साल विधायकों और सांसदों के संवाद और व्यवहार को बेहतर बनाने के लिए पचमढ़ी में प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित किया गया था। इसमें जनप्रतिनिधियों को सार्वजनिक बयान देते समय सावधानी बरतने की हिदायत दी गई थी। इसके बावजूद समय-समय पर पार्टी के भीतर असहमति के स्वर सामने आते रहे हैं।
पहले भी उज्जैन से उठा था विरोध
पिछले दो वर्षों में अपनी ही सरकार के खिलाफ सबसे चर्चित विरोध उज्जैन से ही सामने आए हैं। अनिल जैन कालूहेड़ा से पहले उज्जैन के ही विधायक चिंतामणि मालवीय ने सिंहस्थ के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहण के प्रस्ताव का जोरदार विरोध किया था। उन्होंने सड़क से लेकर विधानसभा तक इस मुद्दे को उठाया था। किसानों के व्यापक विरोध के बाद सरकार को अंततः भूमि अधिग्रहण का फैसला वापस लेना पड़ा था।







