मप्र के नंबर-टू मंत्री अपने एक पूर्व ओएसडी का मोह त्याग नहीं पा रहे हैं। उन्होंने भरपूर प्रयास किया कि, ओएसडी को संविदा नियुक्ति मिल जाए। लेकिन मोहन सरकार में यह संभव नहीं हो पाया। उसके बाद भी ओएसडी विधानसभा और वल्लभ भवन के मंत्री कक्ष के साथ मंत्रीजी के बंगले के प्रथम तल पर शोभा बढ़ाते हुये देखे जा सकते हैं। नारदजी बता दें कि यह वही ओएसडी हैं, जिन्हें पिछले दिनों एक प्रमुख सचिव ने गेट आउट कहकर भगा दिया था और जिनका नाम व्यापमं कांड के कारण काफी चर्चाओं में रहा था।
जयवर्धन…और जीतू दांव
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के पुत्र एवं मौजूदा विधायक जयवर्धन सिंह को जीतू पटवारी ने अपनी टीम में गुना जिला अध्यक्ष बनाया है। जयवर्धन इस जीतू दांव से खुश हैं या नहीं, यह तो वो जानें। लेकिन उनके समर्थक और दिग्विजय खेमा जरूर इससे खासा नाराज है। वह इसे पदोन्नति नहीं, राजनीतिक पदवानति मान रहा है। वजह यह कि जयवर्धन का सियासी कद जिला अध्यक्ष से कहीं ऊपर माना जाता है। यहीं नहीं सीधे तौर पर वे जीतू के प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं। अब जीतू दांव से कांग्रेस को कितना नफा, जयवर्धन को कितना नुकसान होगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन जीतू-जयवर्धन के आपसी रिश्तों में खटास ज़रूर बढ़ेगी, इतना तो तय है।
बेगानी शादी में अब्दुला दीवाना
मप्र भाजपा के एक आयातित वरिष्ठ नेताजी (पूर्व केंद्रीय मंत्री) पिछले दो साल से ठौर-ठिकाना (दायित्व) न मिलने से राजनीतिक वनवास भोग रहे हैं। भाजपा हाईकमान की रीति-नीति एवं इशारों से लगता नहीं कि, सत्ता- संगठन में आगे उनको कुछ मिलने वाला है। बावजूद इसके ये नेताजी बिन बुलाए मेहमान की तरह भाजपा की हर कार्यक्रम और आयोजन में पहुंच जाते हैं। फिर खुद ही उन कार्यक्रमों-आयोजनों के फोटो सोशल मीडिया पोस्ट करते हैं। संभवत: यह बताने के लिए कि, मैं अभी जिंदा हूं। नारदजी कहते हैं कि, ऐसे किरदारों के लिए ही जुमला बना है- बेगानी शादी में अब्दुला दीवाना..!
कांग्रेस के प्रकोष्ठ में कलह
मध्यप्रदेश कांग्रेस के एक प्रमुख प्रकोष्ठ में इन दिनों कलह मचा हुई है। दरअसल, एक सदस्य की हाल ही में प्रकोष्ठ के मुखिया से कहा-सुनी हो गई। इसके बाद स्थिति यहां तक पहुंच गई की सदस्य को प्रकोष्ठ के व्हाट्सएप ग्रुप से बेदखल कर दिया गया। और रोजाना होने वाली ऑनलाइन बैठक भी तकनीकी कारणों का हवाला देकर बंद कर दी गई। अब नाराज सदस्य ने पूरे मामले की शिकायत जीतू भिया से की है। देखना यह है कि, जीतू भिया घर की कलह को कैसे रोकते हैं?
छोटे साहब से बड़े साहब परेशान
राज्य मंत्रालय में एक बड़े विभाग के मुखिया (एसीएस) अपने ही अधीनस्थ छोटे साहब (सेकेट्री) से परेशान हैं। छोटे साहब फाइलें आगे बढ़ाने के बजाय रोककर बैठ जाते हैं। बड़े साहब ने मौखिक के अलावा लिखित निर्देश भी दिए, पर छोटे साहब ने सब हवा में उड़ा दिए। बताते हैं कि छोटे साहब कुछ समय पहले विभाग से निकलकर जिले की कमान संभाल चुके हैं। पर जल्द ही उन्हें वापस बुलाकर इसी विभाग में बैठा दिया गया। इसके बाद से छोटे साहब अवसाद में है। खैर, देखना यह है कि बड़े साहब आगे कैसे छोटे साहब से काम करवाते हैं।







