होशंगाबाद के एक पंडितजी के पांडित्य का एक आडियो इन दिनों मध्यप्रदेश के राजनीतिक-प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। आडियो में पंडितजी अनर्गल टिप्पणियां कर एक पूर्व मुख्यमंत्री और उनके परिवार का चरित्र हनन रहे हैं। मजेदार बात यह है कि, पूर्व मुख्यमंत्री के शुभचिंतकों ने पंडितजी के इस पांडित्य कर्म की प्रशासन के जिम्मेदारों को लिखित-अलिखित तमाम शिकायतें की। बावजूद इसके पंडितजी पर कार्रवाई करने की कोई हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि, आखिर सरकार में ऐसा कौन महापुरुष है जो पंडितजी को प्रश्रय दे रहा है?
पार्टी के लिए गरिष्ठ हो रहे मंत्रीजी
मध्यप्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ मंत्रीजी पार्टी के लिए बेहद गरिष्ठ (भारी) होते जा रहे हैं। दरअसल, मंत्रीजी की कार्यशैली से क्षेत्र की जनता से लेकर पार्टी कार्यकर्ता तक परेशान हैं। एक तो मंत्रीजी किसी से मिलते नहीं हैं। मिल भी जायें, और जनता या कार्यकर्ता कोई समस्या बता दे, तो मंत्रीजी नियमों के सांप-छंछूदर दिखा देते हैं। कार्यकर्ता मंत्रीजी के खुद गुड़ खाएं-दूसरों को नियम बताए वाले इस रवैये की खुले तौर पर आलोचना करने लगे हैं। कार्यकर्ताओं ने मंत्रीजी के इस रवैये की पार्टी हाईकमान को भी शिकायत की है। बता दें कि ये मंत्रीजी सडक़ से जुड़े हैं, पर सडक़ पर कभी दिखते नहीं हैं।
नेताजी का भक्तिभाव चर्चाओं में!
बुंदेलखंड के एक कद्दावर भाजपा नेता (पूर्व मंत्री) का नाचते हुए वीडियो इन दिनों चर्चाओं में है। बताते हैं कि आमतौर पर चेहरे से अहंकारी दिखने वाले नेताजी एक धार्मिक कार्यक्रम में अचानक भक्तिभाव में आ गए और भजनों पर झूम-झूमकर नाचने लगे। नेताजी का ये अंदाज देखकर हर कोई हैरान हो गया। लोग पूछ रहे हैं कि, क्या नेताजी अपने राजनीतिक दुश्मन मंत्री की एक मामले दोबारा जांच शुरू होने की खुशी में नाच रहे हैं… या फिर सत्ता-संगठन में राजनीतिक तवज्जो न मिलने से नेताजी में विरक्ति जाग रही है…! नारदजी कहते हैं कि, भगवान में आसक्ति, राजनीति से विरक्ति अच्छी बात है। नेताजी पर पार्टी कृपा करे न करे, भगवान की कृपा तो हो रही है।
भाजपा मुख्यालय में गाड़ी पुराण
मप्र भाजपा के नये मुखिया ने पार्टी की गाड़ी लेने से इंकार क्या किया, भाजपा मुख्यालय में गाड़ी पुराण शुरू हो गया है। मुखिया के फरमान पर पार्टी की पंद्रह साल पुरानी जितनी भी डीलक्स गाडय़िां हैं, उन्हें बेचने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। जिन पदाधिकारियों के पास पार्टी की गाडय़िां हैं, उन्हें गाड़ी लौटाने को कहा गया है। नारदजी को एक पदाधिकारी ने बताया कि, गाड़ी पुराण से वे पदाधिकारी जरूर एक्सपोज हो गये हैं, जो वर्षों से पार्टी की चार-चार गाडय़िों को अपने निजी हित साधने के लिए दौड़ा रहे थे।
साहब की तो पांचों अंगुलियां घी में हैं!
भोपाल के एक स्टाम्प कलेक्टर की इन दिनों पांचों अंगुलियां घी में और सिर कड़ाई में हो रही हैं। वो कैसे? साहब को स्टाम्प कलेक्टर के साथ प्रदेश के एक वरिष्ठ मंत्री का ओएसडी भी बना दिया गया है। हालांकि, साहब को अधिकृत रुप से काम कुछ भी नहीं दिया गया है। पर, दिनभर प्रदेश भर के कलेक्टरों-स्टाम्प कलेक्टरों को इस बहाने, उस बहाने, मंत्रीजी ये चाहते हैं, वो चाहते हैं फोन खडख़ड़ाते रहते हैं। नारदजी को मंत्री बंगले के एक सेवक ने बताया कि, इस बहाने प्रदेशभर में स्टाम्प कलेक्टर क्या काला-पीला कर रहे हैं, यह तो पता चल ही रहा है, साहब के पास भी ‘मलाई’ आना शुरू हो गई है।







