-डा जयप्रकाश पालीवाल
मैं अनेकों दशक से हिंदू उत्सव समिति भोपाल का आजीवन सदस्य हूं। इसका मुझे बहुत फक्र भी है। मैं दशकों से हिंदू उत्सव समिति भोपाल के चुनावों का प्रत्यक्षदर्शी भी रहा हूं। कई दशकों से, आज तक समिति के जितने भी चुनाव हुए वे पुराने भोपाल के दायरे में ही सीमित रहे और उनके जितने भी अध्यक्ष हुए, कमोबेश वे सभी , पुराने शहर के ही बाशिंदे होकर आपस में ही चुनाव लड़ते थे और विजय वरण के बाद पुन: एकजुट होकर होली-दिवाली और दशहरा पर उत्सवी आयोजन किया करते थे। हालांकि ये भी सही है कि अक्सर, ये आयोजन बड़े हिन्दू वार्षिक त्योहारों तक ही सीमित रहते थे।
शायद इसीलिए भी, अभी तक हिंदू उत्सव समिति भोपाल के द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में पुराने शहर को ही प्राथमिकता भी ज्यादा मिलती रही है। ये बात और है कि तेज़ी से भोपाल का आकार बढ़ा और यही भोपाल, चौक, जुमेरती, और हमीदिया रोड से बाहर निकल निकलकर… कोलार, भेल, अरेरा कॉलोनी, बावडय़िा, रायसेन रोड, करोंद, बैरागढ़, इत्यादि बड़े प्रखंडों में विकसित होता गया और आज वृहद भोपाल के रूप में हम सभी की बाशिंदगी का आंगन बन गया है। ऐसे में स्वाभाविक रूप से हिंदू उत्सव समिति भोपाल को भी इस चुनाव के माध्यम से पुराने शहर के दायरे से बाहर आने की जद्दोजहद भी उठानी ही पड़ी, जो आज के समय की मांग भी है।
हिन्दू उत्सव समिति अपना अध्यक्ष, प्रजातांत्रिक तरीके से चुनती है और फऱि विजय श्री वरण किए हुए अध्यक्ष , अपनी समिति बनाकर पूरी समिति का विधिवत् संचालन करते हैं जो अपने द्विवर्षीय कार्यकाल में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन भी करते हैं। दशकों बाद ये चुनाव पूरी तरह से भिन्नता लिए हुए था। पांच प्रत्याशियों में चार पुराने शहर के पुराने चेहरे और वहीं के बाशिंदे तथा एक नए शहर का नया चेहरा और वहीं का बाशिंदा था।
पुराने चेहरों ने परंपरागत पुराने चुनावी तरीके अपनाए, जबकि नए चेहरे ने चुनाव को चुनाव की तरह ही लड़ा और विजय श्री भी वरण की। नया चेहरा चंद्र शेखर तिवारी थे, जिन्होंने योजनाबद्ध चुनाव लड़ा। हर सदस्य तक पहुंचने के सार्थक प्रयास भी किए। साथ ही अपना घोषणापत्र भी जारी किया, जो शायद पहली बार जारी हुआ था। इससे भी आगे जाकर, नवनिर्वाचित अध्यक्ष चन्द्रशेखर तिवारी ने, 365 दिन हिंदू और हिंदू संस्कृति के लिए क्रियाशील रहने का वादा भी किया, जो समिति के सदस्यों के दिलों को छू गया।
ये चुनाव अभी तक के चुनावों से सर्वथा भिन्न था। अभी तक के चुनावों को, अक्सर फोन कॉल और सदस्यों से उनके दरवाज़े जाकर मिलने तक ही सीमित रखा जाता था। लेकिन, अबकी बार हिंदू उत्सव समिति के चुनाव में चंद्रशेखर तिवारी ने शहर के बाशिंदों का ध्यान अपनी ओर खींचा और सभी चुनावी तरीके भी अपनाए। हालांकि वोटिंग भी मात्र 51 प्रतिशत ही हुई थी और पंचकोणीय मुकाबले में दो कुशवाहों की गलाकाट प्रतिद्वंदिता भी इस जीत का एक बड़ा कारण रहा है। परन्तु लोकतंत्र में जीत तो जीत ही है और वो भी कुछेक दिन पहले एक नए नाम का उदय और फऱि धूम्रकेतु की तरह, आकाश में चन्द्रशेखर तिवारी का स्थापित होना भी कम महत्वपूर्ण नहीं है।
अब नए अध्यक्ष पर हिंदू उत्सव समिति भोपाल की नई इबारत लिखने का एक बड़ा दायित्व है और साथ ही पुराने शहर के मिज़ाज को भी समझना होगा और समिति के अनेकों पुराने आधार स्तंभों से भी आशीर्वाद लेकर उन्हें विश्वास में लेना भी तो होगा । इसमें नए अध्यक्ष के जिम्मेदार थिंक टैंक ही ये भूमिका, बखूबी निभा पाएंगे, मैं ये उम्मीद करता हूं। साथ ही ,अब हिन्दू उत्सव समिति के आयोजनों को भी पुराने भोपाल के दायरे से बाहर निकालकर या तो विभिन्न आयोजनों के लिए भिन्न भिन्न स्थानों का चयन करना होगा या फऱि बड़े आयोजनों को एकाधिक स्थानों पर ठोस स्वरूप देना ही होगा। इसके सदस्यता का दायरा बढ़ाना होगा। ज्यादा से ज्यादा हिंदूजन समिति से जुड़ें, इसके व्यापक प्रयास करने होंगे। निश्चित तौर पर किसी भी नए चेहरे के लिए अल्प समय में,ये जीत बहुत बड़ी जीत है, परन्तु साथ ही इस जीत ने, अध्यक्ष के दायित्व को भी बहुत बड़ा आकार भी तो दे दिया है। पुरानों से सामंजस्य और नई टीम का विनम्र भाव ही बृहद परिणाम की भविष्य में द्योतक होगी। साथ ही शहर भी घोषणापत्र पर समयबद्ध अमल की उम्मीद लिए, नए अध्यक्ष को सम्मोहित नजरों से देखेगा।







