अब तक तो भाजपा के भाईसाबों की दबंगई के किस्से सुने थे। लेकिन इस बार भाजपा की एक सुदर्शना नेत्री के दंबगई का किस्सा चर्चाओं में हैं। राजनीति से लेकर प्रापर्टी के धंधे तक सुदर्शना नेत्री हर जगह अपने रंग दिखा रही हैं। सुदर्शना नेत्री ने भोपाल के हमीदिया रोड की करोड़ों की एक प्रापर्टी पर जबरन ऐसा कब्ज़ा जमाया है मानो उनकी दादी-नानी की विरासत हो। प्रापर्टी मालिक बेचारा! अपनी प्रापर्टी के लिए दफ़्तर-दफ्तर भटक रहा है। लेकिन सुदर्शना नेत्री का पैर हिलने का नाम नहीं ले रहा है। बताते हैं कि सुदर्शना नेत्री मप्र और दिल्ली के कुछ बड़े भाजपा नेताओं की सर्वप्रिय हैं। शायद इसी सर्वप्रियता की वजह से प्रशासन उन्हें बेदखल करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।
पुत्र के भाषण ने पिता महापौर का पसीना छुटाया
इंदौर की राजनीति में उस वक्त भूचाल आ गया, जब महापौर पुत्र ने स्कूल की वाद-विवाद प्रतियोगिता में मोदी सरकार पर ही तीर छोड़ दिए। भाषण चूंकि ओजस्वी था, इसलिए मंच पर मौजूद तमाम अतिथि नेताओं ने तो जमकर तालियां बजाई, लेकिन महापौर का पसीना छूट गया। महापौर पुत्र ने अपने भाषण में केंद्र सरकार की नीतियों और पीएम मोदी के ‘ड्रीम प्रोजेक्ट- बुलेट ट्रेन’ पर ऐसे कटाक्ष किये कि, अतिथि-श्रोता सब हतप्रभ रह गए। इसमें दोराय नहीं कि महापौर पुत्र का भाषण ओजस्वी था। लेकिन देखना यह होगा कि आगे पुत्र का ‘ओजस्वी भाषण’ महापौर को वाहवाही दिलाता है या फिर उनकी राजनीति नैया में तूफान लाता है।
भाजपा में आकर पछता रहे नेताजी
राजधानी से सटे जिले के श्रीमंत के खासमखास एक नेताजी (विधायक/पूर्व मंत्री) कांग्रेस छोडक़र भाजपा की शरण में चले गए थे। अब अपने ही फैसले पर हाथ मलते फिर रहे हैं। अपनी ही विधानसभा में मतदाताओं से हाथ जोडक़र माफी मांगते और यह कहते घूम रहे हैं कि भूल हो गई । भाजपा में जाना मेरी जिंदगी का सबसे ग़लत फैसला था। भाजपा में मेरा राजनीतिक भविष्य चौपट हो गया। बता दें भाजपा में शामिल होने के बाद ये नेताजी तत्कालीन शिवराज सरकार में कैबिनेट मंत्री तो बने थे, लेकिन थोड़े दिनों के लिए। उसके बाद से नेताजी संगठन में पद और सरकार में कुर्सी के लिए तरस रहे हैं। और बता दें कि राजनीतिक तनाव से मुक्ति के लिए कांग्रेस में पुन: वापसी की जुगत भी तलाश रहे हैं।
साहब हो रहे बगुला भगत
प्रदेश के एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी इन दिनों बगुला भक्ति कर रहे हैं। साहब ने कई धार्मिक पुस्तकें तो लिखी ही डाली हैं। इसके साथ धार्मिक आयोजनों में श्रीमदभागवद् गीता और रामायण पर बौद्धिक विलास कर लोगों को खूब धार्मिक ज्ञान बांट रहे हैं। ये वो साहब हैं जिनका तत्कालीन सरकार में खासा रूतबा रहा है। जिन पर करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं। साहब की इस भक्ति पर नारदजी कहते हैं कि-मन मैला तन उजला बगुला कपटी अंग । तासों तो कौआ भला तन मन एक ही रंग ।
ईमानदारी से तो इतनी आलीशान कोठी नहीं बन सकती!
प्रदेश के तेज तर्रार वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी, जिनकी आईएएस धर्म पत्नी राज्य मंत्रालत्र में प्रमुख सचिव स्तर की अधिकारी हैं, की कोठी इन दिनों राज्य मंत्रालय के गलियारों में चर्चाओं में है। चर्चा में इसलिए कि, ये साहब-साहिबा प्रदेश के ईमानदार अफसरों में शुमार हैं और इतनी आलीशान कोठी ईमानदारी की कमाई से बन नहीं सकती है। अब जब कोठी की चर्चा चल पड़ी है, तो ईमानदार साहब-साहिबा सफाई देते फिर रहे हैं कि, हमने ये कोठी तो पुस्तैनी जमा कमाई बनाई है। सच है, ईमानदारी की कमाई से कोई इतनी आलीशान कोठी बना सकता है क्या?







