Politics Mirror
Advertisement
  • होम
  • राजनीति इन दिनों
  • मध्यप्रदेश
    • भोपाल
    • इंदौर
    • ग्वालियर
    • जबलपुर
  • देश
  • विदेश
  • परदे के पीछे
  • राजनीतिक चिंतन
  • टेक्नालाजी
  • जीवन शैली
    • धर्म / ज्योतिष
    • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
  • होम
  • राजनीति इन दिनों
  • मध्यप्रदेश
    • भोपाल
    • इंदौर
    • ग्वालियर
    • जबलपुर
  • देश
  • विदेश
  • परदे के पीछे
  • राजनीतिक चिंतन
  • टेक्नालाजी
  • जीवन शैली
    • धर्म / ज्योतिष
    • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Politics Mirror
No Result
View All Result
Home राजनीतिक चिंतन

न्याय के मंदिर में ऐसे कृत्य शर्मसार करते हैं!

Politics Mirror by Politics Mirror
October 9, 2025
in राजनीतिक चिंतन
0
न्याय के मंदिर में ऐसे कृत्य शर्मसार करते हैं!
0
SHARES
2
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

महेश दीक्षित

भारत जैसे लोकतांत्रिक राष्ट्र में, जहां न्यायपालिका को ‘न्याय का मंदिर’ कहा जाता है, वहां गरिमा, अनुशासन और मर्यादा सर्वोपरि मानी जाती हैं। किंतु हाल ही में देश के मुख्य न्यायमूर्ति बीआर गंवई पर एक वकील द्वारा जूता फेंकने की कोशिश ने इस पवित्र गरिमा को कलंकित कर दिया। यह केवल किसी व्यक्ति के आक्रोश की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि भारतीय न्याय परंपरा और उसकी प्रतिष्ठा पर सीधा प्रहार है।

यह घटना न केवल भारत की न्याय व्यवस्था को झकझोरती है, बल्कि करोड़ों देशवासियों के मन में पीड़ा और आक्रोश उत्पन्न करती है। सर्वोच्च न्यायालय जैसी संस्था में इस प्रकार का कृत्य, निस्संदेह भारतीय इतिहास की सबसे शर्मनाक घटनाओं में से एक के रूप में याद किया जाएगा। यह न केवल न्यायालय की मर्यादा पर, बल्कि भारतीय समाज के सभ्य आचरण और अनुशासन पर भी प्रश्नचिन्ह लगाता है।

आरोपी वकील का यह कहना कि मैंने यह कृत्य नशे में नहीं, बल्कि पूरे होश-हवास में किया है, इस घटना को और भी गंभीर बना देता है। यह कथन एक व्यक्ति के अहंकार का नहीं, बल्कि उस अराजक मानसिकता का द्योतक है जो संवाद और विचार के स्थान पर हिंसा और अपमान को माध्यम बना लेती है। यह प्रवृत्ति न केवल भारतीय सनातन धर्म-संस्कृति के मूल्यों के विपरीत है, बल्कि सामाजिक सौहार्द और विधि-सम्मत व्यवस्था के लिए भी अत्यंत घातक है।

यह सही है कि न्यायमूर्ति गंवई द्वारा भगवान विष्णु को लेकर की गई टिप्पणी ने हिंदू समाज के एक वर्ग को उद्वेलित किया। धार्मिक भावनाएं स्वाभाविक रूप से संवेदनशील होती हैं, उनका सम्मान किया जाना चाहिए। परंतु किसी भी असहमति या आक्रोश का समाधान हिंसक प्रतिक्रिया से नहीं, बल्कि संविधान, संवाद और संयम के मार्ग से ही संभव है। न्यायालय में जूता फेंकना या किसी न्यायाधीश का अपमान करना न तो श्रद्धा बढ़ाता है और न ही आस्था को बल देता है- उलटे यह न्याय व्यवस्था के प्रति अविश्वास और असंयम का प्रतीक बन जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना की कठोर निंदा करते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में हुआ यह आक्रमण हर भारतीय को क्रोधित और आहत करने वाला है। उन्होंने मुख्य न्यायमूर्ति गंवई के धैर्य और संयम की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनका शांत व्यवहार न्याय और संविधान के प्रति उनकी गहरी निष्ठा का प्रमाण है।

हालांकि, यह कोई पहली घटना नहीं है जब न्याय के इस मंदिर की मर्यादा भंग हुई हो। वर्ष 1968 में एक व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट की बेंच पर छलांग लगाकर चाकू जैसा हथियार लहराया था, जिससे न्यायाधीश ग्रोवर घायल हो गए थे। वर्ष 2009 में एक महिला ने न्यायमूर्ति अरजीत पसायत पर सुनवाई के दौरान चप्पल फेंकी थी। ऐसी घटनाएं भले ही विरल हों, लेकिन जब-जब घटित होती हैं, न्यायपालिका की गरिमा को गहरा आघात पहुंचाती हैं।

आज आवश्यकता इस बात की है कि न्यायालय के मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाए, और आमजन में न्यायपालिका के प्रति सम्मान का भाव और प्रगाढ़ हो। वकील समुदाय को भी आत्ममंथन करना होगा कि जो पेशा संविधान की रक्षा और सत्य के समर्थन का प्रतीक है, वही यदि अनुशासन तोड़ेगा तो समाज को क्या संदेश देगा?

भारत की न्याय परंपरा सदैव इस सिद्धांत पर आधारित रही है कि, न्याय देरी से मिले, पर अन्याय कभी न हो। इस परंपरा को चोट पहुंचाने वाला हर कृत्य राष्ट्र की आत्मा पर प्रहार है। इसलिए यह आवश्यक है कि ऐसी घटनाओं की न केवल सख्त निंदा की जाए, बल्कि उनका कानूनी प्रतिकार भी सुनिश्चित किया जाए, ताकि न्याय के मंदिर की पवित्रता सदा अक्षुण्ण रहे। क्योंकि अब भी आम नागरिक की अंतिम आस, न्याय के मंदिरों से ही बची है।

Previous Post

उत्तम ‘धमकी’ पर क्षमा याचना करते रहे मुख्यमंत्री

Next Post

7 to 13 October 2025

Politics Mirror

Politics Mirror

Next Post

7 to 13 October 2025

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

पॉलिटिक्स मिरर पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

Recent News

बढ़ता स्तन कैंसर, इलाज से ज्यादा जागरूकता जरूरी

बढ़ता स्तन कैंसर, इलाज से ज्यादा जागरूकता जरूरी

March 8, 2026
चिंतामणि के बाद कालूहेड़ा के बागी तेवर

चिंतामणि के बाद कालूहेड़ा के बागी तेवर

March 8, 2026
मप्र में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की तैयारी

मप्र में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की तैयारी

March 7, 2026
महंगी होती रसोई की आंच

महंगी होती रसोई की आंच

March 7, 2026

Politics Mirror का उद्देश्य राजनीति में शुचिता की पैरवी करने के साथ राजनीतिक पत्रकारिता को एक नया दृष्टिकोण प्रदान करना है। 'Politics Mirror' स्पष्ट, निष्पक्ष और अंतर दृष्टिपूर्ण मूल्य-आधारित पत्रकारिता को बढ़ावा देता है। यह राजनीति में 'नैतिक मूल्यों' और आमजन के संवैधानिक अधिकारों, मुद्दों और समस्याओं की बात करता है।

Follow Us

Category

  • राजनीति इन दिनों
  • मध्यप्रदेश
  • देश
  • परदे के पीछे
  • विदेश
  • राजनीतिक चिंतन
  • जीवन शैली
  • मनोरंजन
  • ई-पेपर
  • About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact

© 2025 Politics Mirror. All rights reserved.

No Result
View All Result
  • होम
  • राजनीति इन दिनों
  • मध्यप्रदेश
    • भोपाल
    • इंदौर
    • ग्वालियर
    • जबलपुर
  • देश
  • विदेश
  • परदे के पीछे
  • राजनीतिक चिंतन
  • टेक्नालाजी
  • जीवन शैली
    • धर्म / ज्योतिष
    • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
  • ई-पेपर

© 2025 Politics Mirror. All rights reserved.