लाहौर। अब वो दिन दूर नहीं जब पड़ोसी दुश्मन देश पाकिस्तान के विश्वविद्यालयों में भी भारत के पवित्र और प्राचीन ग्रंथ भगवत गीता के 18 अध्यायों में मौजूद कुल 700 श्लोक गूंजेंगे और महाभारत पढ़ाई जाएगी। वर्ष 1947 में मिली आजादी के बाद यह पहला मौका है जब लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट साइंस (एलयूएमएस) ने अपने छात्रों को संस्कृत भाषा में पढ़ाने का एक बड़ा महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। जिसके पीछे का आधार पारंपरिक या शास्त्रीय भाषाओं से जुड़े हुए चार कोर्स हैं, जिनमें संस्कृत भाषा की पढ़ाई को भी शामिल किया गया है।
एलयूएमएस के गुरमानी केंद्र के निदेशक डॉ.अली उस्मान कासिम ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस कोर्स के जरिए हमारा मकसद विश्वविद्यालय में संस्कृत भाषा की पढ़ाई को बढ़ावा देना है। जिसकी मदद से आगामी एक से डेढ़ दशक के अंदर हम संस्कृत भाषा के साथ भगवत गीता और महाभारत के पाकिस्तानी विद्वानों को देख सकेंगे। ज्ञात हो कि विश्वविद्यालय में करीब 90 दिन पहले एक कार्यशाला का आयोजन किया गया था। जिसमें छात्रों, शोधकर्ताओं और भाषा के जानकारों ने भाग लिया था। एलयूएमएस प्रशासन ने इस दौरान पाया कि सभी में संस्कृत भाषा को लेकर विशेष रुचि है। जिसके बाद इससे जुड़ा कोर्स शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
डॉ.कासिम बताते हैं कि संस्कृत पाकिस्तान के लिए नई नहीं है। बल्कि इसका हमारे देश से सदियों पुराना रिश्ता रहा है। जेसीआर वूलनर नामक एक विद्वान ने वर्ष 1930 में ताड़पत्रों पर लिखी गई संस्कृत की पांडुलिपियों को सूचीबद्ध किया था। लेकिन 1947 में आजादी के बाद इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। किसी पाकिस्तानी विद्वान ने भी संस्कृत को लेकर कोई रुचि नहीं दिखाई। जबकि इसके साथ-साथ पाकिस्तान के पंजाब विश्वविद्यालय का पुस्तकालय भी इस बात का प्रमाण प्रस्तुत करता है कि हमारे देश में संस्कृत भाषा की प्राचीन पांडुलिपियां मौजूद हैं, जिन पर समय-समय पर आकर विदेशी शोधकर्ता शोध करते रहे हैंं।







