पॉलिटिक्स मिरर
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में अगर किसी मंत्री का नाम विवाद का पर्याय बन चुका है, तो वह हैं विजय शाह। बयान दर बयान, मंच दर मंच, उनकी राजनीतिक पहचान अब कामकाज से कम और विवादों से ज़्यादा जुड़ती जा रही है। ताज़ा मामला रतलाम में जिला सलाहकार समिति की बैठक का है, जहां उन्होंने सरकार की महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना की महिला हितग्राहियों को खुले मंच से धमकी जैसी भाषा में संबोधित कर दिया।
प्रभारी मंत्री के तौर पर बैठक में पहुंचे विजय शाह ने कहा कि सरकार करोड़ों रुपये महिलाओं को दे रही है, इसलिए मुख्यमंत्री के सम्मान में महिलाओं का आना जरूरी है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि जो महिलाएं सम्मान कार्यक्रम में नहीं आएंगी, उनकी किस्त जांच में पेंडिंग कर दी जाएगी। वहीं, जो महिलाएं आएंगी, उनके 250 रुपये बढ़ाने की बात भी कही गई। इस बयान ने न केवल प्रशासनिक मर्यादा पर सवाल खड़े किए, बल्कि कल्याणकारी योजनाओं के राजनीतिक इस्तेमाल की बहस को भी फिर से हवा दे दी।
धन्यवाद या दबाव?
मंत्री शाह का तर्क था कि जब सरकार 1,500 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से करोड़ों रुपये दे रही है, तो दो साल में एक बार धन्यवाद बनता है। उन्होंने अधिकारियों से रतलाम जिले में लाड़ली बहनों की संख्या पूछी और कहा कि ढाई लाख में से कम से कम 50 हजार महिलाओं को तो मुख्यमंत्री के सम्मान में आना ही चाहिए। इस पूरे संवाद के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग सहित अन्य अधिकारी असहज दिखे। क्योंकि यह बयान योजना की स्वैच्छिक प्रकृति के बजाय दबाव की राजनीति जैसा प्रतीत हुआ।
बैठक में आक्रामक अंदाज़
,विवाद यहीं नहीं थमा। बैठक में नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के अधिकारी की जगह एक मैकेनिक के पहुंचने पर मंत्री का आक्रामक रुख सामने आया। पहले फटकार, फिर व्यंग्यात्मक ढंग से प्रणाम और अंतत: चुटकी बजाकर बाहर का रास्ता दिखाना। इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक गरिमा पर भी सवाल खड़े कर दिए।
कांग्रेस का हमला
इस बयान पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने विजय शाह की तत्काल बर्खास्तगी की मांग करते हुए कहा कि यह करोड़ों लाड़ली बहनों का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी योजना का लाभ रोकने की धमकी देना महिलाओं को डराने जैसा है और यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
शाह का विवादों से पुराना रिश्ता
विजय शाह के लिए यह पहला मौका नहीं है। इससे पहले मई 2025 में उन्होंने भारतीय सेना की अधिकारी सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिस पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया और एफआईआर के निर्देश दिए। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां उनके बयान को घटिया, शर्मनाक और निंदनीय बताया गया। हालांकि उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम राहत मिली, लेकिन राजनीतिक नुकसान बना रहा।
-इसी तरह से 2013 में झाबुआ के एक कार्यक्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी पर कथित टिप्पणी के बाद उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।







