-महेश दीक्षित
भोपाल। मप्र की राजनीति में राज्यसभा चुनाव की आहट के साथ ही सियासी हलचल तेज हो गई है। जून 2026 में प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं। भले ही चुनावी प्रक्रिया अभी दूर हो, लेकिन इन सीटों को लेकर सत्ता और विपक्ष, दोनों खेमों में समय से पहले रणनीतिक कवायद शुरू हो गई है।
विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के आधार पर तस्वीर लगभग स्पष्ट है। तीन में से दो सीटों पर भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, जबकि कांग्रेस के हिस्से में केवल एक सीट आती दिख रही है। यही एक सीट कांग्रेस के लिए सबसे अहम बन गई है। सवाल यह नहीं है कि कांग्रेस को सीट मिलेगी या नहीं, बल्कि यह है कि पार्टी किस चेहरे को आगे बढ़ाएगी। जिन राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, भाजपा के युवा आदिवासी नेता सुमेर सिंह सोलंकी और केंद्र सरकार में राज्यमंत्री जार्ज कुरियन शामिल हैं। इन तीनों के कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही प्रदेश की राजनीति में नए सियासी समीकरण उभरते नजर आ रहे हैं।
दिग्विजय सिंह की राह कितनी आसान?
दिग्विजय सिंह का राज्यसभा का दूसरा कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो रहा है। विधानसभा संख्या बल को देखते हुए कांग्रेस केवल एक ही सीट जीतने की स्थिति में है। ऐसे में पार्टी के सामने बड़ा सवाल यह है कि क्या वह दिग्विजय सिंह को तीसरी बार उच्च सदन भेजेगी या किसी नए चेहरे को अवसर देगी। हालिया घटनाक्रमों ने दिग्विजय सिंह की दावेदारी को जटिल बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर साझा करते हुए भाजपा को लेकर दिए गए उनके बयान पर कांग्रेस के भीतर ही असहजता देखी जा रही है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता उनके इस रुख से नाराज बताए जा रहे हैं, जिससे उनकी स्थिति और कमजोर होती नजर आ रही है। राजनीतिक विज्ञानियों का मानना है कि दिग्विजय के तीसरे कार्यकाल को लेकर पहले से ही अनिश्चितता बनी हुई थी और इसी दबाव के बीच यह बयान सामने आया। कांग्रेस में राज्यसभा के लिए कमलनाथ, मीनाक्षी नटराजन जैसे बड़े नाम भी चर्चा में हैं। इसके अलावा पार्टी का नया प्रदेश नेतृत्व लंबे समय से ‘दिग्विजय विरोधी’ माना जाता रहा है, जिससे उनकी दावेदारी को लेकर संशय और गहरा गया है।
भाजपा की रणनीति भी अहम
भाजपा की ओर से सुमेर सिंह सोलंकी का कार्यकाल भी जून 2026 में समाप्त हो रहा है। बड़वानी जिले से आने वाले सोलंकी को पार्टी का युवा आदिवासी चेहरा माना जाता है। वे वर्ष 2020 में राज्यसभा पहुंचे थे। पार्टी उन्हें दोबारा मौका देती है या किसी नए चेहरे को आगे बढ़ाती है, यह आने वाले समय में साफ होगा। तीसरी सीट से जार्ज कुरियन का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। वे 2024 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद राज्यसभा पहुंचे थे। चूंकि कुरियन केरल से आते हैं और वहां 2026 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, ऐसे में भाजपा उनके भविष्य को लेकर संगठनात्मक और राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए फैसला कर सकती है।
विधानसभा का गणित
230 सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। वर्तमान में भाजपा के पास 165 और कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। जबकि एक विधायक बाप पार्टी से है। इस गणित के अनुसार भाजपा को दो सीटें लगभग सुनिश्चित मानी जा रही हैं, जबकि कांग्रेस एक सीट पर अपनी दावेदारी बनाए हुए है।







