वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बड़ी मुसीबत में बताते हुए अत्यंत आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि ईरान की सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाना बंद नहीं किया, तो अमेरिका भी जवाबी कार्रवाई करेगा। ट्रंप ने संकेत दिया कि हालांकि यह सीधे तौर पर जमीनी सैन्य हमला नहीं होगा, लेकिन अमेरिका ईरान की उन दुखती रगों पर चोट करेगा जहां उसे सबसे ज्यादा दर्द महसूस होगा। एक साक्षात्कार में ट्रंप ने यहां तक दावा कर दिया कि 86 वर्षीय खामेनेई संभवत: अपनी सत्ता डगमगाते देख देश छोडक़र भागने की तैयारी कर रहे हैं।
बता दें कि ईरान इस समय आंतरिक संकट और अंतरराष्ट्रीयदबाव के दौर से गुजर रहा है। देश में बढ़ती महंगाई, मुद्रा के गिरते मूल्य और चरमराती अर्थव्यवस्था के खिलाफ आम जनता का गुस्सा सडक़ों पर फूट पड़ा है। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच जारी इस हिंसक टकराव ने अब एक बड़े अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। एक तरफ जहां ईरानी सरकार इन प्रदर्शनों को सख्ती से कुचलने के संकेत दे रही है, दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीखी चेतावनियों ने खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात पैदा कर दिए हैं।
मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों के अनुसार, ईरान में स्थिति अत्यंत भयावह हो चुकी है। अब तक कम से कम 62 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,300 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। हालांकि, कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि मरने वालों का आंकड़ा इससे कहीं अधिक है। एक डॉक्टर के हवाले से बताया गया है कि केवल छह प्रमुख अस्पतालों में ही 217 से अधिक शव पहुंचे हैं। प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोलियां चलाने की खबरें आ रही हैं, जबकि ईरानी सरकारी मीडिया इन नागरिकों को आतंकी और उपद्रवी करार देकर उनके खिलाफ कठोर सैन्य कार्रवाई की भूमिका तैयार कर रहा है।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उनके हाथ निर्दोष ईरानियों के खून से सने हैं। सरकारी टेलीविजन पर अपने संबोधन में खामेनेई ने दोटूक कहा कि इस्लामिक गणराज्य शहीदों के खून से बना है और वह किसी भी विदेशी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ट्रंप का हश्र भी 1979 की क्रांति में बेदखल किए गए ईरान के शाह जैसा ही होगा। इस दौरान उनके समर्थकों ने अमेरिका की मौत के नारे लगाकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
ईरान ने दुनिया से इन खबरों को छिपाने के लिए देशव्यापी इंटरनेट शटडाउन लागू कर दिया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल और अन्य मॉनिटरिंग संस्थाओं ने इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताते हुए कहा है कि सरकार हिंसा और मौतों की असली तस्वीर दुनिया की नजरों से ओझल करना चाहती है। इस बीच, भारत सरकार ने भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ईरान में रह रहे करीब 10,000 भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एडवाइजरी जारी की है।







