Politics Mirror
Advertisement
  • होम
  • राजनीति इन दिनों
  • मध्यप्रदेश
    • भोपाल
    • इंदौर
    • ग्वालियर
    • जबलपुर
  • देश
  • विदेश
  • परदे के पीछे
  • राजनीतिक चिंतन
  • टेक्नालाजी
  • जीवन शैली
    • धर्म / ज्योतिष
    • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
  • होम
  • राजनीति इन दिनों
  • मध्यप्रदेश
    • भोपाल
    • इंदौर
    • ग्वालियर
    • जबलपुर
  • देश
  • विदेश
  • परदे के पीछे
  • राजनीतिक चिंतन
  • टेक्नालाजी
  • जीवन शैली
    • धर्म / ज्योतिष
    • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Politics Mirror
No Result
View All Result
Home परदे के पीछे

परदे के पीछे…‘गोमाता’ कटती रहीं, ‘हिंदू हृदय सम्राट’ सम्मेलन करते रहे..!

Politics Mirror by Politics Mirror
January 24, 2026
in परदे के पीछे
0
परदे के पीछे…‘गोमाता’ कटती रहीं, ‘हिंदू हृदय सम्राट’ सम्मेलन करते रहे..!
0
SHARES
0
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

इन दिनों ‘गोमाता’ भोपाल से लेकर दिल्ली तक सियासत के केंद्र में है। भोपाल के सरकारी स्लॉटर हाउस में सैकड़ों गायों के वध और 26 टन गोमांस की बरामदगी के सनसनीखेज खुलासे ने राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। लेकिन इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा तथाकथित ‘हिंदू हृदय सम्राट’ नेताओं की रहस्यमयी चुप्पी को लेकर है। राजधानी में चार नेता ऐसे हैं ( मंत्री, सांसद, विधायक और पूर्व विधायक), जो वर्षों से खुद को ‘हिंदू हृदय सम्राट’ के रूप में पेश करते आए हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस दौर में सरकारी स्लॉटर हाउस में खुलेआम गोवंश वध चल रहा था, उस दौरान ये नेता हिंदू सम्मेलनों में व्यस्त दिखाई दिए। मंचों से धर्म, संस्कृति और ‘गोमाता’ संरक्षण के बड़े-बड़े नारे गूंजते रहे, लेकिन सरकारी स्लॉटर हाउस में हो रही गतिविधियों पर इन नेताओं ने आंखें मूंदे रखीं। न कोई विरोध दर्ज कराया गया, न कोई सवाल उठाया गया और न ही किसी तरह का हस्तक्षेप किया गया। ऐसे में नारदजी का सवाल लाजिमी है क्या ये हिंदू सम्मेलन केवल शक्ति-प्रदर्शन और जनसमर्थन जुटाने का जरिया भर थे? और क्या ‘गोमाता’ की पीड़ा, इन तथाकथित ‘हिंदू हृदय सम्राट’ नेताओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के आगे गौण हो गई?

‘शारीक मछली’ प्रकरण की तपिश मीडिया के गलियारों तक

शारीक मछली प्रकरण की आंच अभी पूरी तरह ठंडी भी नहीं पड़ी है कि उसकी तपिश अब मीडिया के गलियारों में भी महसूस की जाने लगी है। अब तक यह मामला सत्ता और सिस्टम तक सीमित माना जा रहा था, लेकिन अब इसमें कलम और कैमरे से जुड़े कुछ नाम भी सामने आने लगे हैं। इस प्रकरण में पहले प्रदेश के एक दिग्गज नेताजी का नाम खूब चर्चा में रहा, और अब एक अखबार तथा तीन टीवी चैनलों से जुड़े कुछ खबरनवीसों के नाम भी जोड़े जा रहे हैं। चर्चाएं हैं कि शारीक मछली के साथ इन खबरनवीसों की नजदीकियां महज पेशेवर दायरे तक सीमित नहीं थीं, बल्कि उसकी कुछ ‘खास’ और कथित तौर पर रंगीन महफिलों में भी इनकी मौजूदगी रहती थी। दिलचस्प यह है कि जिन नामों पर आज उंगलियां उठ रही हैं, वे हनीट्रैप कांड के दौरान भी सुर्खियों में रहे थे। नारदजी कहते हैं कि यदि शारीक मछली प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच होती है, तो मीडिया जगत के कई बड़े और चौंकाने वाले चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।

‘पूर्ववर्ती सरकार’ के करीबी नेता ही क्यों निशाने पर?

मध्यप्रदेश में इन दिनों गजब सियासत चल रही है। जिस प्रदेश में बीते ढाई दशकों से भाजपा की सरकार काबिज है, अब उसी पार्टी के नेता जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। खास बात यह है कि कार्रवाई की जद में सिर्फ वे नेता हैं, जिन्हें लंबे समय तक ‘पूर्ववर्ती सरकार’ का बेहद करीबी और भरोसेमंद माना जाता रहा है। ताजा मामला बालाघाट का है, जहां जीएसटी की टीम ने पूर्व मंत्री एवं भाजपा के जिला अध्यक्ष से जुड़े प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की। यह मामला अभी चर्चा में ही था कि अगले ही दिन आईटी की टीम ने विदिशा में भाजपा जिला अध्यक्ष के ठेकेदार भाई के घर और दफ्तर पर कार्रवाई कर दी। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही मामलों में जिन पर शिकंजा कसा गया, वे ‘पूर्ववर्ती सरकार’ के मजबूत स्तंभ माने जाते रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि, क्या जांच एजेंसियां कानून के दायरे में पूरी तरह स्वतंत्र होकर कार्रवाई कर रही हैं, या फिर इसके पीछे ‘पूर्ववर्ती सरकार’ को राजनीतिक रूप से कमजोर करने की कोई सुनियोजित रणनीति भी काम कर रही है? नारदजी कहते हैं कि, मोदी है, तो सब मुमकिन है।

दतिया के ‘दादा’ को राज्यसभा भेजने की पैरवी!

तत्कालीन भाजपा सरकार में संकटमोचक की भूमिका निभाने वाले और दतिया में ‘दादा’ के नाम से पहचाने जाने वाले नेताजी इन दिनों अपनी ही पार्टी में हाशिये पर खड़े दिखाई दे रहे हैं। न उनके हाथ में सत्ता है और न ही संगठन में कोई प्रभावशाली जिम्मेदारी। हालात यहां तक पहुंच चुके हैं कि राजनीतिक गलियारों में उन्हें अब ‘बेरोजगार नेता’ तक कहा जाने लगा है। इसी सियासी खालीपन को लेकर कांग्रेस के एक वरिष्ठ इंदौरी नेता ने हाल ही में ‘दादा’ को राज्यसभा भेजे जाने की खुलकर पैरवी कर दी। कांग्रेस नेता का कहना है कि भाजपा ने मध्य प्रदेश को मानो चरागाह बना दिया है-कभी कोई कुरियन तो कभी कोई मुरुगन। दोनों ही दक्षिण भारत से आते हैं, जबकि वर्षों से प्रदेश की राजनीति में पसीना बहाने वाले स्थानीय नेताओं को हाशिये पर धकेला जा रहा है। कांग्रेस नेता का यह बयान ‘दादा’ के प्रति एक तरह की राजनीतिक हमदर्दी के रूप में देखा जा रहा है। नारदजी कहते हैं कि इस बयान से भले ही ‘दादा’ के राजनीतिक अरमानों को कुछ हवा मिल गई हो, लेकिन सियासी हकीकत यही है कि भाजपा में बड़े फैसले भोपाल में नहीं, बल्कि दिल्ली के दरबार में तय होते हैं।

ईमानदारी से इतनी आलीशान कोठी नहीं बन सकती ?

प्रदेश के तेजतर्रार वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी, जिनकी आईएएस धर्मपत्नी राज्य मंत्रालय में प्रमुख सचिव स्तर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं, इन दिनों अपनी आलीशान कोठी को लेकर मंत्रालय के गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। वजह साफ है। साहब-साहिबा प्रदेश के ईमानदार अफसरों में गिने जाते हैं, लेकिन जिस ठाठ-बाट की कोठी सामने आई है, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चा यह है कि क्या केवल ईमानदारी की कमाई से इतनी भव्य कोठी खड़ी की जा सकती है? सवाल उठे तो साहब-साहिबा सफाई दे रहे हैं कि कोठी पुश्तैनी जमा-पूंजी से बनाई गई है। नारदजी पूछते हैं कि, क्या वाकई ईमानदारी की कमाई से कोई इतनी आलीशान कोठी बना सकता है?

Previous Post

जावेद ने क्यों ठुकराया था ‘बॉर्डर 2’ के लिए गीत लिखने का प्रस्ताव

Next Post

20 to 26 january 2026

Politics Mirror

Politics Mirror

Next Post

20 to 26 january 2026

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

पॉलिटिक्स मिरर पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

Recent News

बढ़ता स्तन कैंसर, इलाज से ज्यादा जागरूकता जरूरी

बढ़ता स्तन कैंसर, इलाज से ज्यादा जागरूकता जरूरी

March 8, 2026
चिंतामणि के बाद कालूहेड़ा के बागी तेवर

चिंतामणि के बाद कालूहेड़ा के बागी तेवर

March 8, 2026
मप्र में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की तैयारी

मप्र में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की तैयारी

March 7, 2026
महंगी होती रसोई की आंच

महंगी होती रसोई की आंच

March 7, 2026

Politics Mirror का उद्देश्य राजनीति में शुचिता की पैरवी करने के साथ राजनीतिक पत्रकारिता को एक नया दृष्टिकोण प्रदान करना है। 'Politics Mirror' स्पष्ट, निष्पक्ष और अंतर दृष्टिपूर्ण मूल्य-आधारित पत्रकारिता को बढ़ावा देता है। यह राजनीति में 'नैतिक मूल्यों' और आमजन के संवैधानिक अधिकारों, मुद्दों और समस्याओं की बात करता है।

Follow Us

Category

  • राजनीति इन दिनों
  • मध्यप्रदेश
  • देश
  • परदे के पीछे
  • विदेश
  • राजनीतिक चिंतन
  • जीवन शैली
  • मनोरंजन
  • ई-पेपर
  • About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact

© 2025 Politics Mirror. All rights reserved.

No Result
View All Result
  • होम
  • राजनीति इन दिनों
  • मध्यप्रदेश
    • भोपाल
    • इंदौर
    • ग्वालियर
    • जबलपुर
  • देश
  • विदेश
  • परदे के पीछे
  • राजनीतिक चिंतन
  • टेक्नालाजी
  • जीवन शैली
    • धर्म / ज्योतिष
    • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
  • ई-पेपर

© 2025 Politics Mirror. All rights reserved.