भोपाल । गौभक्त और गौसेवा के नाम पर आए दिन बवाल करने वाले गौ भक्तों को गौ माता की जरा भी चिंता नहीं है। प्रदेश में विभाग जरूर 500 करोड़ रुपए हर साल खर्च कर रहा है। हर गौवंश के भोजन के लिए 40 रुपए खर्च का प्रावधान मध्य प्रदेश की सरकार ने किया है लेकिन लोगों की तरफ से मिलने वाले चंदे में जमकर कंजूसी हुई है। ऐसा लग रहा है कि कंजूसी की इंतहा हो गई है।
मध्य प्रदेश गौ संवर्धन बोर्ड के मुताबिक प्रदेश में 3038 रजिस्टर्ड गौशाला हैं। जिनमें 576000 से अधिक गौवंश है। एक साल के भीतर गोसंवर्धन बोर्ड में गायों की सेवा के लिए 6 लाख 47 हजार रुपए का दान मिला है। गोसेवकों का कहना है कि दान के भरोसे चल तो गोवंश भूखे से ही मर जाएंगे। क्योंकि अगर चंदे के भरोसे गो सेवा हुई तो गोवंश को चारा भी नसीब नहीं होगा। साल 2019 की रिपोर्ट बताती है कि मध्य प्रदेश में एक करोड़ से अधिक गोवंश हैं। जिसमें करीब 10 लाख बेसहारा गाय सडक़ों पर लावारसी धूमती है। दावा यह किया जाता है कि गौसेवा के लिए अलग-अलग संगठन कम कर रहे हैं लेकिन सरकारी सिस्टम तो कुछ और बता रहा है कि गो सेवा के नाम पर सिर्फ रसम अदायगी की हो रही है। गायों को मिलने वाला चंदा ना के बराबर मिल रहा है। गौसेवा के नाम पर भले ही उपद्र मचाने वाले प्रदर्शनकारी जमकर सुर्खियां बटोरते हैं लेकिन सेवा के नाम पर मात्र कुछ 100 रुपए ही दान करते हैं।
मोहन सरकार ने बढ़ायी गायों की भोजन राशि
मध्य प्रदेश में गायों की स्थिति को देखते हुए सरकार ने 20 रुपए से बढढऱ 40 रुपए हर गोवंश का बजट भी तय किया है। इससे पूर्व में 15 महीने की कमलनाथ सरकार में करीब 1000 से अधिक गौशाला बनाने का काम हुआ था। इस दौरान यह भी फैसला किया गया था कि पीपीपी मोड पर गौशाला चलाने वालों को काम दिया जाएगा। फिर योजना आगे नहीं बढ़ी और यह प्रस्ताव भी ठंडा बस्ते में चला गया। पशुपालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लोग निजी तौर पर भी गौ सेवा के लिए गौशाला में अनुदान देते हैं। सरकार भी गायों की देखरेख और उनके इलाज के साथ-साथ भोजन की व्यवस्था के लिए अतिरिक्त फंड की व्यवस्था करती है। फिलहाल जरूरत है कि लोग जागरूकता पैदा करें और गौ सेवा के साथ-साथ गोपालन बढ़ाया जाए जिससे गो सेवा हो सके और उनके के लिए पर्याप्त भोजन की व्यवस्था भी हो जाए।






