वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बुधवार को हुई टेलीफोनिक वार्ता ने वैश्विक राजनीति के गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। इस महत्वपूर्ण बातचीत का केंद्र बिंदु ईरान का मुद्दा रहा, जिस पर अमेरिकी प्रशासन लगातार चीन और अन्य वैश्विक शक्तियों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि ईरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग किया जा सके। ट्रंप ने इस चर्चा की जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने शी जिनपिंग के साथ न केवल ईरान के मुद्दे पर बात की, बल्कि व्यापार, ताइवान संकट और अमेरिका-चीन संबंधों के भविष्य से जुड़े पेचीदा पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की। इसके साथ ही ट्रंप ने अप्रैल माह में अपनी प्रस्तावित चीन यात्रा की योजना का भी जिक्र किया, जो दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया के माध्यम से चीनी राष्ट्रपति शी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों की सराहना की और जोर देकर कहा कि दोनों नेता इस बात से भली-भांति परिचित हैं कि वैश्विक स्थिरता के लिए इन संबंधों को संतुलित रखना कितना अनिवार्य है। दूसरी ओर, चीन सरकार द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में भी बातचीत की पुष्टि की गई, जिसमें बताया गया कि दोनों नेताओं ने आगामी वर्ष में होने वाले प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और अपनी भावी मुलाकातों के अवसरों पर चर्चा की है। हालांकि, चीन की ओर से ट्रंप की संभावित यात्रा पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की गई। साथ ही, चीन ने ताइवान के मुद्दे पर अपना कड़ा रुख बरकरार रखते हुए स्पष्ट कर दिया कि वह ताइवान को खुद से अलग नहीं होने देगा।
इस बातचीत का एक बड़ा संदर्भ ईरान के साथ चीन के आर्थिक संबंध भी हैं। ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि ईरान से कारोबार जारी रखने वाले देशों पर अमेरिका में होने वाले आयात पर 25 प्रतिशत तक का दंडात्मक कर लगाया जा सकता है। परमाणु कार्यक्रम के कारण ईरान वर्षों से कड़े प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, लेकिन आंकड़ों के अनुसार 2024 में ईरान ने 125 अरब डॉलर का अंतरराष्ट्रीय व्यापार किया, जिसमें चीन की हिस्सेदारी अकेले 32 अरब डॉलर रही। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात और तुर्किये भी ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदार बने हुए हैं, जो अमेरिकी दबाव की रणनीति के सामने एक बड़ी चुनौती है। कूटनीतिक स्तर पर यह हलचल और भी गंभीर तब हो गई जब शी जिनपिंग ने उसी दिन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी फोन पर बात की। यह त्रिपक्षीय संवाद ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका और रूस के बीच की अंतिम परमाणु संधि न्यू स्टार्ट समाप्त होने के कगार पर है। इस संधि के खत्म होने का अर्थ है कि पिछले 50 वर्षों में पहली बार दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों के शस्त्रागारों पर कोई कानूनी सीमा नहीं रह जाएगी। ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे परमाणु हथियारों पर नियंत्रण तो चाहते हैं, लेकिन किसी भी नई संधि में चीन की भागीदारी को अनिवार्य मानते हैं।







