मप्र भाजपा मुख्यालय के एक पदाधिकारी भाईसाब इन दिनों अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर खासे परेशान हैं। वजह, भाजपा मुख्यालय की अहम कुर्सी से इनका हटना तय हो चुका है। हालांकि, अब ये भाईसाब निगम-मंडल में नियुक्ति की नई जुगाड़ में लग गये हैं। इसके लिए नये निजाम को संघ निष्ठाओं का हवाला देने के साथ दिल्ली स्तर से दबाव बना रहे हैं। नारदजी बता दें कि ये वही भाईसाब हैं जिन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में टिकट जुगाडऩे के लिए एक बिचौलिए जरिए दिल्ली में मोटा पैसा खर्च किया था। लेकिन बदकिस्मती, भाईसाब को टिकट तो मिला नहीं, बिचौलिया पैसा भी हजम कर गया।
मंत्रीजी पर भारी ‘धाकड़’ आबकारी अधिकारी
भोपाल में एक धाकड़ आबकारी अधिकारी ऐसा है, जिसके खिलाफ सैकड़ों शिकायतें हैं, तमाम जांचें चल रही हैं, बावजूद इसके विभागीय मंत्रीजी इस अधिकारी को टस से मस नहीं कर पा रहे हैं। दरअसल, इस धाकड़ अधिकारी ने आबकारी महकमे से लेकर राज्य मंत्रालय तक ऐसा प्रचारित कर रखा है कि, उसकी पदस्थापना ऊपर से हुई है। इसलिए मंत्रीजी भी इस अधिकारी पर हाथ डालने से बच रहे हैं। बताते हैं जब भी कोई इस अधिकारी की शिकायत लेकर पहुंचता है, तो मंत्रीजी का एक ही जवाब होता है, सबकी शिकायत करो, धाकड़ की नहीं। धाकड़ को हटाना अपने बस की बात नहीं..! नारदजी कहते हैं कि, जो इतना धाकड़ हो, उसे भला कौन हटा सकता है?
जनता कह रही…वाह कहें या शर्म करें!
मप्र विधानसभा का मानसून सत्र…मुद्दा विहीन विपक्ष… माननीयों का सदन के भीतर-बाहर सिर्फ हो हल्ला… कभी भैंस, कभी गिरगिट, तो कभी मछली वेश में प्रहसन (नाटक)… छह दिन विधानसभा चली… जनता के ज्वलंत मुद्दे नक्कारखाने में चले गये….और विपक्ष के प्रहसन (नाटक) में हर घंटे 40 लाख रुपए स्वाहा हो गये…नारदजी कहते हैं कि, इन्हें विदूषक बनने नहीं, जनता की आवाज उठाने के लिए विधानसभा में भेजा गया था…अब जनता वाह कहे या शर्म करे…? जय हो विपक्षी प्रहसन की…!
साहब की कोठी चर्चाओं में
राज्य सरकार के एक अहम महकमे के मुखिया (एसीएस) की आलीशान कोठी राज्य मंत्रालय के गलियारों में चर्चाओं में है। खास बात यह है कि, प्रदेश के सबसे बड़े लिकर किंग के पड़ोस में निर्मित इस कोठी की भव्यता को किसी की नजर न लग जाए, इसके लिए एक ज्योतिषी के परामर्श पर पूरी कोठी को गगनचुंबी वृक्ष लगाकर छिपाने की कोशिश की गई है। हालांकि साहब तर्क यही दे रहे हैं कि, वास्तुदोष और पर्यावरण की दृष्टि से कोठी के चौतरफा? वृक्षारोपण किया गया है। खैर जो भी हो, नारदजी यही कामना करते हैं कि कोठी साहब को फलीभूत हो..!
इन्हें कौन बर्खास्त करे?
अपने जमाने में ईमानदारी की मिसाल रहे एक्स डीजीपी विक्रम सिंह ने हाल ही में एक चैनल को दिये इंटरव्यू में कहा कि टीआई स्तर का पुलिस अधिकारी यदि पजेरो, फार्च्यूनर और आडी जैसी महंगी गाडिय़ों में घूमता दिखाई देने लगे, तो उसे तत्काल बर्खास्त कर देना चाहिए। पूरे मध्यप्रदेश की तो बात छोडय़िे जनाब, राजधानी में ही ऐसे कई टीआई स्तर के पुलिस अधिकारियों को नारदजी जानते हैं, जो पजेरो-आडी में फर्राटा भर रहे हैं। बेहिसाब चल-अचल संपत्ति के मालिक बन बैठे हैं। सवाल यह है कि कौन ऐसे अधिकारियों की जांच करे और कौन इन्हें बर्खास्त करे?







