मप्र कांग्रेस ने टेंडर के दस्तावेज दिखाकर सरकार पर लगाया आरोप
भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस ने सरकारी जिला अस्पतालों में मेडिकल जांच के नाम पर 300 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाया है। 85 अस्पतालों में निजी कंपनियां सामान्य दाम की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक राशि वसूल रही हैं। कंपनियों को सरकार भुगतान करती है। इन लैब में हर दिन औसत 40 हजार जांचें हो रही हैं। मप्र कांग्रेस ने टेंडर के दस्तावेज जारी कर आरोप लगाया है। कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ खेल हो रहा है। दो कंपनियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। एक एनजीओ को भी इसमें लाभ पहुंचाया जा रहा है।
कांग्रेस का आरोप है कि 5 साल से सरकारी अस्पतालों में जांच का जिम्मा निजी कंपनी साइंस हाउस व पीओसीटी सर्विसेज के पास है। इन कंपनियों को एनएबीएल की दर से 25 फीसदी अधिक कीमत पर भुगतान किया जा रहा है। कंपनियां नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज (एनएबीएल) की दरों के हिसाब से कीमत वसूल रही हैं। जबकि सरकारी अस्पतालों की लैब के पास एनएबीएल का सर्टिफिकेट है ही नहीं।
कंपनियों ने लगाया 800 करोड रुपए का बिल
साल 2020 से कंपनियों ने काम शुरू किया। करीब 85 जिला अस्पतालों में कंपनियों की ओर से जांच की जा रही है। एक हिसाब से कंपनियों ने 800 करोड रुपए का बिल लगाया। 25 प्रतिशत ज्यादा राशि के हिसाब से करीब 300 करोड़ रुपए घोटाले का आरोप लगाया गया है। हाल ही में इस ठेके को फिर से बढ़ा दिया गया है, जबकि राज्य व देशभर में ऐसे कॉन्ट्रैक्ट बेहद कम दरों पर उपलब्ध हैं।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, स्वास्थ्य विभाग ने साल 2019 में टेंडर के माध्यम से जिला अस्पतालों में 70 से अधिक मेडिकल जांच की जिम्मेदारी निजी कंपनियों को सौंपी थी। एमएस साइंस हाउस मेडिकल्स प्रालि और एमएस पीओसीटी सर्विसेज प्रालि को ठेका मिला था। कंपनियों ने टेंडर दस्तावेज में सीजीएचएस की एनएबीएल दरें डालीं, जो कि गैर एनएबीएल सर्टिफिकेट वाले लैब की अपेक्षा 25 फीसदी अधिक होती हैं।







