बुंदेलखंड क्षेत्र से सांसद एवं प्रदेश भाजपा संगठन में अहम पद पर रह चुके एक नामचीन नेताजी इन दिनों गृह कलह से परेशान हैं। दरअसल, नामचीन नेताजी राजनीतिक व्यस्तताओं के कारण परिवार को तनिक भी समय नहीं दे पाते हैं। यही नहीं देश-प्रदेश में राजनीतिक दौरे बताकर कई-कई दिन घर से गायब भी रहते हैं। यही वजह है कि, धर्मपत्नी ने घर के भीतर और बाहर (सोशल मीडिया पर) नेताजी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। नारदजी तो यही प्रार्थना करेंगे कि, हे भगवान! नेताजी के घर को बर्वाद होने से बचा लीजिए।
आखिर डिफेंडर गाड़ी किसे मिली!
भोपाल जिला कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर उठा बवंडर अब केवल संगठनात्मक विवाद नहीं रहा, बल्कि ‘डिफेंडर’ गाड़ी से सियासी गलियारों में तडक़ा लगा गया है। आरोप लग रहे हैं कि यह पद ढाई करोड़ की लग्जऱी डिफेंडर के बदले दिया गया है। अब जिला अध्यक्ष बनने से ज़्यादा चर्चा उस रहस्यमयी नेता की हो रही है, जिसे यह महंगी डिफेंडर भेंट की गई। पार्टी के एक पुराने नेता का कहना है कि सिर्फ भोपाल ही नहीं, बल्कि जिन जिलों में भी नियुक्तियों की गाड़ी दिल्ली की डीलिंग से गुजरक़र आई है, उन सब पर हाईकमान को ब्रेक लगाना चाहिए। वरना जनता में तो यही संदेश जा रहा है कांग्रेस में अब पद नहीं, बल्कि गाडय़िां चल रही हैं।
आज्ञाकारी कप्तान साहब
राजधानी से सटे एवं पूर्व मुख्यमंत्री के गृह जिला के कप्तान साहब को भगवा दुपट्टाधारियों के आज्ञाकारी का तमगा मिलना चाहिए। कप्तान साहब के पास कोई भगवा दुपट्टा गले में डालकर पहुंच भर जाए, साहब हां जी-हां जी करने लग जाते हैं। फिर यह भी नहीं देखते कि, भगवा दुपट्टाधारी सही कह रहा है या ग़लत। हाल ही में कप्तान साहब ने एक कथित भगवा दुपट्टाधारी के कहने पर एक निर्दोष परिवार पर एक के बाद एक चार केस दर्ज करवा दिये। इतने पर सुकून नहीं मिला, तो भगवा दुपट्टाधारी के कहने पर निर्दोष को जेल भी भिजवा दिया। पीडि़त का दोष सिर्फ इतना है कि, उसने भगवा दुपट्टाधारी भाईयों की रागात्मक करतूतों की किताब बना रखी है।
साहिबा कार्यशैली से फिर चर्चाओं में
प्रदेश के एक आदिवासी जिले की डीएम साहिबा अपनी अजीबो-गरीब कार्यशैली को लेकर फिर चर्चाओं में हैं। दरअसल, इन साहिबा के बारे में कहा जाता है कि, ये जहां भी रहती हैं, कार्यशैली के कारण चर्चित हो ही जाती हैं। जब तक मंत्रालय में रहीं, अपने व्यवहार की वजह से कनिष्ठों-वरिष्ठों की आंखों की किरकिरी बनी रहीं। किसी तरह से जिला मिला, तो जिले में जो देखो वो साहिबा के खिलाफ शिकायत लिए घूम रहा है। नारदजी को पता चला है कि, पिछले दो महीने में सत्ता-संगठन और संघ के कार्यकर्ता दर्जनभर से ज्यादा शिकायतें साहिबा के खिलाफ सीएमओ को भेज चुके हैं। देखना यह है कि, सीएमओ साहिबा पर क्या एक्शन लेता है।
लूप लाइन से डर से साहब लोग टेंशन में
मध्यप्रदेश के प्रशासनिक मुखिया की एक साल के लिये पुन: ताजपोशी ने प्रदेश के ब्यूरोक्रेटस (साहबों) की चिंता बढ़ा दी है। इसलिये कि, ट्रांसफर-पोस्टिंग की जो सूचियां कई दिनों से अटकी हुई हैं, वो अब गणेशत्सव के बाद कभी भी जारी हो सकती हैं। बताते हैं कि ट्रांसफर सूची में भोपाल कमिश्नर सहित दर्जनभर जिलों के एसपी-कलेक्टर के नाम हैं। ट्रांसफर सूची में खासतौर से उन जिलों के कलेक्टर-एसपी को लूप लाइन में भेजने की तैयारी है, जिनके खिलाफ गंभीर शिकायतें हैं और जिनका स्थानीय सांसद-विधायकों से किसी न किसी बात को लेकर पंगा चल रहा है।







