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दुनिया के अधिकांश देशों में लोकतंत्र कमजोर हुआ, प्रेस की साख गिरी

आईडीईए ने 2024 में 173 देशों के लोकतांत्रिक प्रदर्शन का किया आंकलन

Politics Mirror by Politics Mirror
September 12, 2025
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दुनिया के अधिकांश देशों में लोकतंत्र कमजोर हुआ, प्रेस की साख गिरी
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स्टॉकहोम। द ग्लोबल स्टेट ऑफ डेमोक्रेसी (आईडीईए) 2025 की एक रिपोर्ट में वैश्विक लोकतंत्र की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रेस की स्वतंत्रता में भी पिछले पचास वर्षों में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट में 2024 में 173 देशों के लोकतांत्रिक प्रदर्शन का आकलन किया गया है, जिसमें 2019 और 2024 के बीच 94 देशों में लोकतंत्र के बुनियादी स्तंभ कमजोर हुए हैं। दुनियाभर में चुनावों की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर भरोसा कम हो रहा है।

आईडीईए की रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान समय में दुनिया में लोकतंत्र की स्थिति बेहद चिंताजनक है। अकेले अफ्रीका ने वैश्विक गिरावट में 33 फीसदी योगदान दिया, जबकि यूरोप 25 फीसदी के साथ दूसरे स्थान पर रहा। पश्चिम एशिया को लोकतांत्रिक प्रदर्शन में सबसे निचले स्तर पर है।

रिपोर्ट में कुछ सकारात्मक उदाहरण दिए गए हैं। बोत्सवाना और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों ने पारदर्शी और विश्वसनीय चुनावों के जरिए लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में ऐतिहासिक बदलाव किए। डेनमार्क एकमात्र ऐसा देश रहा जो प्रतिनिधित्व, कानून का शासन, भागीदारी और अधिकार जैसी सभी श्रेणियों में शीर्ष स्थान पर रहा। इसके साथ ही जर्मनी, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे और लक्जमबर्ग जैसे यूरोपीय देशों ने भी बेहतर प्रदर्शन किया। यूरोप के बाहर कोस्टारिका, चिली और ऑस्ट्रेलिया ने भी लोकतंत्र के कई मानकों में अच्छा स्कोर किया है।

रिपोर्ट का सबसे गंभीर निष्कर्ष प्रेस की आज़ादी को लेकर है। इसमें बताया गया कि 2019 से 2024 के बीच प्रेस की आजादी में दुनिया ने पिछले 50 सालों की सबसे बड़ी गिरावट देखी। 43 देशों में प्रेस की स्वतंत्रता कमजोर हुई, जिनमें अफ्रीका और यूरोप के 15-15 देश शामिल थे। अफगानिस्तान, बुर्किना फासो और म्यांमार जैसे देश, जहां पहले से ही प्रेस स्वतंत्रता की स्थिति बेहद खराब थी, सबसे जयादा प्रभावित हुए। दक्षिण कोरिया में भी हालात बिगड़े, जहां सरकार और उसके राजनीतिक सहयोगियों ने पत्रकारों के खिलाफ मानहानि के मामले बढ़ाए और उनके घरों पर छापे मारे। अमेरिका को लेकर भी रिपोर्ट ने गंभीर टिप्पणियां की गई है। इसमें कहा गया कि ट्रंप प्रशासन के दौरान उन नियमों, संस्थानों और परंपराओं को क्षति पहुंची, जिन्होंने अमेरिकी लोकतंत्र को दशकों तक मजबूत बनाए रखा था।

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका प्रतिनिधित्व की श्रेणी में 35वें और अधिकारों के मामले में 32वें स्थान पर रहा। हालांकि साझेदारी की श्रेणी में उसका प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा और वह छठवें स्थान पर रहा। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई कि दुनियाभर में चुनावों की निष्पक्षता और उस पर भरोसा तेजी से कम हो रहा है। पिछले साल और 2025 की शुरुआत में आयोजित चुनावों में कई चिंताजनक उदाहरण सामने आए, जो लोकतंत्र के भविष्य के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। अमेरिका की घटनाओं का असर दुनिया भर पर पड़ता है, इसलिए वहां लोकतंत्र की कमजोरी वैश्विक स्तर पर लोकतंत्र की सेहत के लिए गंभीर खतरे का संकेत है। यह रिपोर्ट न केवल लोकतंत्र की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठा रहा है, बल्कि यह भी बताती है कि प्रेस की आज़ादी और चुनावों की निष्पक्षता जैसे अहम संकेतक दुनिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुके हैं।

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