Politics Mirror
Advertisement
  • होम
  • राजनीति इन दिनों
  • मध्यप्रदेश
    • भोपाल
    • इंदौर
    • ग्वालियर
    • जबलपुर
  • देश
  • विदेश
  • परदे के पीछे
  • राजनीतिक चिंतन
  • टेक्नालाजी
  • जीवन शैली
    • धर्म / ज्योतिष
    • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
  • होम
  • राजनीति इन दिनों
  • मध्यप्रदेश
    • भोपाल
    • इंदौर
    • ग्वालियर
    • जबलपुर
  • देश
  • विदेश
  • परदे के पीछे
  • राजनीतिक चिंतन
  • टेक्नालाजी
  • जीवन शैली
    • धर्म / ज्योतिष
    • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Politics Mirror
No Result
View All Result
Home विदेश

नेपाल में नहीं बन पा रही सहमति, सेना अपने हाथ ले सकती है सत्ता की बागडोर?

Politics Mirror by Politics Mirror
September 12, 2025
in विदेश
0
नेपाल में नहीं बन पा रही सहमति, सेना अपने हाथ ले सकती है सत्ता की बागडोर?
0
SHARES
0
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

काठमांडू। नेपाल में प्रधानमंत्री की कुर्सी खाली पड़ी है, लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं ढह चुकी हैं और इसी खालीपन में सबसे मजबूत ताकत बनकर उभरी है नेपाल आर्मी। आर्मी चीफ अशोक राज सिगडेल सत्ता संभाल सकते हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि सेना की परछाई नागरिक सत्ता से बड़ी होती जा रही है। सवाल यही है, क्या नेपाल एक बार फिर सैन्य हुकूमत की ओर फिसल रहा है? खुफिया आकलन बताता है कि यह लंबा खिंचता सत्ता संकट संवैधानिक ढांचे को खोखला कर रहा है। पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की और कुलमन घिसिंग समेत कई नाम अंतरिम सरकार के प्रमुख के लिए दिए गए हैं, लेकिन किसी पर भी आंदोलनकारी एकमत नहीं हो पाए हैं।

सबसे ज्यादा बेचैनी दिख रही है नेपाल के युवाओं, खासकर जेन जेड के बीच। ये वे आवाजें हैं, जो सडक़ों पर बदलाव की मांग कर रही हैं। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि युवा आंदोलन के भीतर ही गहरी दरार है। एक गुट चाहता है कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम सरकार का नेतृत्व सौंपा जाए ताकि न्यायपालिका जैसी निष्पक्ष संस्था से संक्रमण की राह बने। वहीं दूसरा गुट काठमांडू के चर्चित मेयर बलेंद्र शाह के पीछे खड़ा है, जो युवाओं के लिए तेज बदलाव का चेहरा हैं। सवाल उठता है– जब आंदोलन की बागडोर ही बंटी हुई है, तो आगे का रास्ता कौन तय करेगा?

दिलचस्प है कि अब तक विरोध ज्यादातर शहरों काठमांडू, पोखरा और बिराटनगर तक सीमित रहा है। गांवों में यह लहर नहीं पहुंच पाई है, जिससे देशभर में कोई साझा स्वर बनता नहीं दिख रहा। ऊपर से कर्फ्यू, बैंक बंद और खाने-पीने की किल्लत ने आम लोगों की मुश्किलें दोगुनी कर दी हैं। आज नेपाल के सामने बड़ा सवाल यही है क्या अंतरिम प्रधानमंत्री की कुर्सी पर कोई न्यायपालिका से आएगा या कोई युवा नेता? सुशीला कार्की और बलेंद्र शाह की दौड़ से ही तय होगा कि नेपाल लोकतंत्र की राह पर लौटेगा या सेना के साए में नई कहानी लिखी जाएगी।

लगातार बिगड़ रहे हैं हालात
नेपाल में तख्तापलट के बाद अभी भी शांति नहीं हो पा रही है। कई जगहों पर छइटपुट हिंसा देखने को मिल रही है। नेपाल में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और इसका सीधा असर भारतीय श्रद्धालुओं पर भी दिख रहा है। गुरुवार सुबह काठमांडू से लौट रहे आंध्र प्रदेश के यात्रियों की बस पर असामाजिक तत्वों ने हमला कर दिया। यह श्रद्धालु प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन कर वापस लौट रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक अचानक हमलावरों ने यूपी नंबर की बस को घेरकर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। बस की खिड़कियों के शीशे टूट गए और यात्रियों से बैग, नकदी व मोबाइल फोन छीन लिए गए। बस स्टाफ श्यामू निषाद ने बताया कि ‘7-8 यात्री घायल हो गए थे, लेकिन नेपाली सेना तुरंत मदद के लिए पहुंची।

Previous Post

सीपी राधाकृष्णन ने भारत के 15वें उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली, सितंबर 2030 तक होगा कार्यकाल

Next Post

दुनिया के अधिकांश देशों में लोकतंत्र कमजोर हुआ, प्रेस की साख गिरी

Politics Mirror

Politics Mirror

Next Post
दुनिया के अधिकांश देशों में लोकतंत्र कमजोर हुआ, प्रेस की साख गिरी

दुनिया के अधिकांश देशों में लोकतंत्र कमजोर हुआ, प्रेस की साख गिरी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

पॉलिटिक्स मिरर पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

Recent News

बढ़ता स्तन कैंसर, इलाज से ज्यादा जागरूकता जरूरी

बढ़ता स्तन कैंसर, इलाज से ज्यादा जागरूकता जरूरी

March 8, 2026
चिंतामणि के बाद कालूहेड़ा के बागी तेवर

चिंतामणि के बाद कालूहेड़ा के बागी तेवर

March 8, 2026
मप्र में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की तैयारी

मप्र में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की तैयारी

March 7, 2026
महंगी होती रसोई की आंच

महंगी होती रसोई की आंच

March 7, 2026

Politics Mirror का उद्देश्य राजनीति में शुचिता की पैरवी करने के साथ राजनीतिक पत्रकारिता को एक नया दृष्टिकोण प्रदान करना है। 'Politics Mirror' स्पष्ट, निष्पक्ष और अंतर दृष्टिपूर्ण मूल्य-आधारित पत्रकारिता को बढ़ावा देता है। यह राजनीति में 'नैतिक मूल्यों' और आमजन के संवैधानिक अधिकारों, मुद्दों और समस्याओं की बात करता है।

Follow Us

Category

  • राजनीति इन दिनों
  • मध्यप्रदेश
  • देश
  • परदे के पीछे
  • विदेश
  • राजनीतिक चिंतन
  • जीवन शैली
  • मनोरंजन
  • ई-पेपर
  • About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact

© 2025 Politics Mirror. All rights reserved.

No Result
View All Result
  • होम
  • राजनीति इन दिनों
  • मध्यप्रदेश
    • भोपाल
    • इंदौर
    • ग्वालियर
    • जबलपुर
  • देश
  • विदेश
  • परदे के पीछे
  • राजनीतिक चिंतन
  • टेक्नालाजी
  • जीवन शैली
    • धर्म / ज्योतिष
    • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
  • ई-पेपर

© 2025 Politics Mirror. All rights reserved.