मध्यप्रदेश के जनसंपर्क संचालनालय में नवागत आयुक्त के आगमन के बाद से मीडिया जगत, खासकर छोटे और मझोले अखबारों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। इन्हें भरोसा है कि नए आयुक्त बड़े नामचीन अखबारों का विज्ञापन कोटा कम कर वास्तविक छोटे-मझोले अखबारों (पत्र/पत्रिकाओं) की सुध लेंगे और उन्हें आवश्यक संरक्षण प्रदान करेंगे। बताते हैं कि फिलहाल जनसंपर्क विभाग के कुल बजट का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा प्रदेश के चार-पांच बड़े अखबारों तक ही सीमित रहता है, जबकि छोटे-मझोले अखबारों को केवल बची-खुची खुरचन (विज्ञापन) से ही संतोष करना पड़ता है। जबकि, सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने में इन छोटे-मझोले अख़बारों की भूमिका नामचीन अखबारों से कहीं अधिक प्रभावी रही है। खैर, उम्मीद यही है कि नवागत आयुक्त समतामूलक दृष्टिकोण अपनाते हुए संचालनालय में नवाचार करेंगे और मोहन सरकार की उपलब्धियों को नई उड़ान देंगे।
भाजपा मुख्यालय में गाडिय़ों का चमत्कार!
भाजपा मुख्यालय में कुछ पदाधिकारियों द्वारा किया गया ‘गाड़ी चमत्कार’ चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल, मितव्ययिता और शुचिता पूर्ण राजनीति के पक्षधर प्रदेश अध्यक्ष ने पुराने पदाधिकारियों के पास वर्षों से खड़ी पार्टी की डीलक्स गाडिय़ों को टेंडर के माध्यम से बेचकर इलेक्ट्रिक गाडिय़ां खरीदने का फरमान जारी किया था। ताकि डीज़ल-पेट्रोल के नाम पर हो रहे खर्च और कथित चमत्कारों पर रोक लग सके। लेकिन मज़ेदार बात यह है कि बिक्री के लिए टेंडर बुलाने के बजाय पार्टी के ही कुछ पदाधिकारी इन डीलक्स गाडिय़ों को औने-पौने दाम में खरीदकर अपने घर ले गए। बताते हैं कि इस ‘चमत्कार’ के चलते पार्टी को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। जिन डीलक्स गाडिय़ों की कीमत बाज़ार में दस-दस लाख रुपये तक मिल सकती थी, उन्हें महज़ दो-दो, तीन-तीन लाख रुपये में बेच दिया गया। अब भला इसे गाडिय़ों का चमत्कार न कहा जाए तो और क्या कहा जाए?
क्यों इतने परेशान हैं नेताजी?
बुंदेलखंड के एक रसूखदार नेताजी (पूर्व मंत्री एवं विधायक) आजकल बेहद परेशान चल रहे हैं। पिछले दो साल से सत्ता और संगठन में कद- पद की हिस्सेदारी न मिलने से उनका मन पहले ही खिन्न था, लेकिन अब पारिवारिक गृहक्लेश ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है। ऊपर से क्षेत्र के राजनीतिक विरोधी भी पीछे पड़े हैं, जिससे उनकी मुश्किलें और गहरी हो गई हैं। इसी बीच, किसी जानकार ने उन्हें समझाया कि उनके ग्रह-नक्षत्र वक्री चाल चल रहे हैं। लिहाज़ा, नेताजी ने ग्रहों को शांत करने के लिए एक सिद्ध पीठ में विशेष अनुष्ठान भी कराया है। नारद जी बता दें कि इन नेताजी का तत्कालीन सरकार के दौर में सरकार और बुंदेलखंड क्षेत्र में एकतरफा सिक्का चलता था, लेकिन आज हालात पूरी तरह से बदल चुके हैं।
कौन करा रहा कांग्रेस की किरकिरी?
मध्यप्रदेश कांग्रेस इन दिनों प्रदेश नेतृत्व की वजह से चौतरफा आलोचना और जनता के बीच किरकिरी झेल रही है। आरोप है कि प्रदेश नेतृत्व और प्रदेश प्रभारी ने वास्तविक कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर दरबारियों को चीन्ह-चीन्ह कर और लेन-देन कर जिला अध्यक्षों की नियुक्तियाँ की हैं। सबसे पहले एआईसीसी के एक सदस्य ने मीडिया के सामने प्रदेश नेतृत्व और प्रदेश प्रभारी पर गंभीर आरोप लगाए। इसके बाद मप्र सेवादल के उपाध्यक्ष ने भी प्रदेश प्रभारी पर अहंकारी होने का आरोप लगाया। अब कांग्रेस के एक विद्रोही पूर्व जिलाध्यक्ष सीधे राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिलने दिल्ली पहुँच गए। बताया जा रहा है कि उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष को शिकायत की है कि, किस तरह डिफेंडर और मोटे तोहफ़े लेकर जिला अध्यक्षों की नियुक्तियाँ की गईं। कुल मिलाकर, यह सब कांग्रेस के लिए शुभ संकेत नहीं है। सवाल यह भी कि कहीं यह सब राहुल गांधी के ‘संगठन सृजन अभियान’ को फ़्लॉप करने की कोई सोची-समझी साजिश तो नहीं?
ओएसडी बनवा रहे आलीशान कोठी नुमा शोरूम
प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री के ओएसडी इन दिनों मंत्री बंगले पर बैठकर राजनीतिक और कारोबारी दोनों मोर्चों पर जबरदस्त तैयारी में जुटे हुए हैं। दरअसल, साहब का रिटायरमेंट अभी करीब तीन महीने बाद होना है, लेकिन रिटायरमेंट के बाद भी ऐशो-आराम और रुतबा बनाए रखने की योजनाएं उन्होंने अभी से अमल में लाना शुरू कर दी हैं। चर्चा है कि ओएसडी नेहरू नगर इलाके में करोड़ों रुपये की लागत से एक सपनों जैसी कोठी के साथ शोरूम (मॉलनुमा कॉम्प्लेक्स) बनवा रहे हैं। राज्य मंत्रालय के गलियारों से लेकर मंत्री बंगले तक, हर जगह यह चर्चा है कि साहब की रिटायरमेंट पार्टी भले तीन महीने बाद हो, लेकिन रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी का जश्न अभी से शुरू हो चुका है। जानकारी के लिए बता दें कि, साहब राजधानी में पदस्थ हैं और स्टाम्प कलेक्टर महकमे से ताल्लुक रखते हैं।







