प्रदेश भाजपा के एक नेताजी का आचरण इन दिनों राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। कहा जा रहा है कि नेताजी अक्सर राजधानी के एक नामचीन होटल में देखे जाते हैं, जहां एक उभरती हुई सुदर्शना नेत्री भी प्राय: मौजूद रहती हैं। दिलचस्प बात यह है कि दोनों कई बार एक ही समय पर होटल में देखे गए हैं, जिससे तरह-तरह की अटकलों को हवा मिल रही है। सवाल यह भी कि आखिर नेताजी और सुदर्शना नेत्री बार-बार एक ही जगह क्यों दिखाई देते हैं? क्या यह सिर्फ राजनीतिक मुलाकातें हैं या इसके पीछे कोई और वजह छुपी है? खैर, असल कहानी क्या है, यह तो नेताजी ही बेहतर बता सकते हैं।
माननीय का कांग्रेस से हो रहा मोहभंग!
ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के कांग्रेस के एक माननीय (विधायक) का अपनी पार्टी से मोहभंग होता दिख रहा है और इन दिनों वे भाजपा के संग पींगे (नज़दीकियाँ) बढ़ा रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये माननीय भाजपा में प्रवेश के लिए कोई मजबूत और भरोसेमंद मध्यस्थ तलाश रहे हैं। कुछ समय पहले उन्होंने अपने पुराने सरपरस्त श्रीमंत के जरिये भाजपा में प्रवेश की कोशिश भी की थी, लेकिन कुछ शर्तों पर सहमति न बनने के कारण तब मामला टल गया था। अब चर्चा है कि कांग्रेस के ये माननीय अपने रिश्तेदार संघ के एक बड़े पदाधिकारी के माध्यम से भाजपा में शामिल होने का शुभ अवसर खोज रहे हैं। नारदजी कहते हैं-अगर ऐसा होता है, तो यह कांग्रेस के लिये बड़ा झटका होगा।
कुर्सी जाने के डर ने उड़ाई नींद!
मोहन मंत्रिमंडल में फेरबदल की सुगबुगाहट ने प्रदेश के कुछ माननीयों (मंत्री) की रातों की नींद हराम कर दी है। कुर्सी छिन जाने का डर उन्हें बुरी तरह सताने लगा है। भाजपा हाईकमान ने साफ़ संकेत दे दिया है कि अब वही मंत्री अपनी गद्दी बचा पाएंगे, जिनकी छवि जनता की नजर में चमकदार है, दागदार नहीं। बताया जा रहा है कि इन माननीयों के चाल-चलन और कारगुजारियों से पार्टी और सरकार की छवि बिगडऩे की शिकायतें लगातार दिल्ली दरबार तक पहुंच रही हैं। नारदजी का तो कहना है कि इनमें से दो माननीय, जो प्रदेश में सर्वजनीन चर्चा का विषय बने हुए हैं, अपने हालिया कारनामों से ऐसी मिट्टी पलीद करा चुके हैं कि चाय-पान की दुकानों तक पर चर्चा गर्म है। आमजन तंज कसते सुने जा सकते हैं, अगर सत्ता का स्वाद ऐसे ही हल्के चाल-चलन वाले लोगों को चखाना था, तो भाईसाब ! हममें आखिर कौन सी कमी थी?
भाजपा मुख्यालय में अब कर्मचारी पुराण
मध्यप्रदेश भाजपा मुख्यालय में वाहन पुराण का अभी समापन ही हुआ था कि अब कर्मचारी पुराण शुरू हो गया है। दरअसल, नए प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यालय की व्यवस्थाओं में मितव्ययिता और शुचिता बनाए रखने के लिए यह कवायद शुरू कराई है। चर्चा है कि प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यालय में कार्यरत सभी कर्मचारियों की विस्तृत सूची तैयार करने को कहा है। इसमें यह जानकारी भी मांगी गई है कि पिछले तीन अध्यक्षों के कार्यकाल में किन-किन कर्मचारियों की नियुक्तियां हुईं और उनका वेतन कितना है। अब इस गणना और सूची तैयार होने के बाद आगे क्या होगा, यह तो फिलहाल साफ नहीं है। लेकिन मुख्यालय के कर्मचारियों में इस आदेश को लेकर हडक़ंप मचा हुआ है।
‘सौ-सौ चूहे खा, बिल्ली हज को चली’
मध्यप्रदेश के एक रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं। वजह, रिटायरमेंट के साथ ही साहब ने अचानक ज्योतिषाचार्य का चोला ओढ़ लिया है और लोगों का भूत-भविष्य देखना शुरू कर दिया है। ये साहब जब तक पुलिस सेवा में रहे, ऐन-केन-प्रकारेण हमेशा मलाईदार पदों पर सुशोभित होते रहे। और अब भाग्य विधाता बनने में लग गये हैं। पर, साहब को शायद यह ज्ञान नहीं कि कर्म के लेख को, कुंडली के ग्रह-नक्षत्र तो क्या, स्वयं भगवान भी नहीं बदल सकते। ऐसे में साहब चाहे जितना ज्योतिष का ज्ञान बघार लें, उनके चाल-चरित्र से परिचित लोग तो यही कह रहे हैं-सौ-सौ चूहे खा, बिल्ली हज को चली।







