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Home परदे के पीछे

परदे के पीछे-क्षत्रपों में उलझी भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी

Politics Mirror by Politics Mirror
October 19, 2025
in परदे के पीछे
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परदे के पीछे-क्षत्रपों में उलझी भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी
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मध्यप्रदेश भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी इन दिनों राजनीतिक गलियारों में पहेली बनी हुई है। चर्चा है कि प्रदेश कार्यकारिणी पांच महामंत्रियों को लेकर चल रही खींचतान में फंसी हुई है। पार्टी के क्षत्रप अपने-अपने समर्थकों को महामंत्री पद दिलाने की कोशिश में जुटे हैं। दरअसल, प्रदेश अध्यक्ष के बाद संगठन में सबसे प्रभावशाली पद महामंत्री का ही माना जाता है। यही कारण है कि इस पद को लेकर खींचतान हो रही है। विशेषकर उस महामंत्री को लेकर दावेदारी अधिक है, जिसे प्रदेश मुख्यालय का प्रभारी भी बनाया जाना है। इधर यह भी चर्चा है कि जब तक नये संगठन महामंत्री का चयन नहीं हो जाता, तब तक प्रदेश अध्यक्ष कार्यकारिणी की घोषणा से परहेज कर रहे हैं। खैर, अब ‘टीम हेमंत’ का ऐलान बिहार चुनावों के बाद होगा या उससे पहले? यह तो स्वयं प्रदेश अध्यक्ष ही बता सकते हैं।

कुर्सी जाने के डर से तीन मंत्री बेचैन!

मुख्यमंत्री के लगातार दिल्ली दौरों और मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की चर्चाओं के बीच सरकार के तीन मंत्री इन दिनों खासे परेशान हैं। बताया जा रहा है कि दीपावली के बाद कभी भी मंत्रिमंडल में फेरबदल हो सकता है। वर्तमान में मंत्रिमंडल में 30 मंत्री हैं, जिनमें से एन, व्ही और आर नामधारी तीन मंत्रियों की कुर्सी खतरे में बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, इन मंत्रियों के आचरण और कार्यशैली को लेकर गंभीर शिकायतें दिल्ली तक पहुंच चुकी हैं। आरोप है कि इनके रवैये से सरकार और पार्टी, दोनों की छवि पर नकारात्मक असर पड़ा है। नारदजी कहते हैं कि, जब कुर्सी हिलने लगे तो नींद उडऩा तो तय है, फिर चाहे वह मंत्री हों या संत्री!

क्यों हुई नेताजी की सीएम हाउस से विदाई ?

प्रदेश भाजपा के एक अति-महत्वाकांक्षी नेताजी, जो बीते दो वर्षों से लगभग नियमित रूप से सीएम हाउस में दिखाई देते थे, इन दिनों अचानक नदारद हैं। चर्चा है कि सत्ता और संगठन दोनों जगह अपनी स्थिति मजबूत करने की उनकी महत्वाकांक्षा को भांपते हुए, उन्हें बड़े सलीके से चलता कर दिया गया है। इन नेताजी की खासियत यह है कि पार्टी का जो भी नेता पावर में आता है, वे किसी न किसी जुगाड़ या रणनीति से उसके करीबी बनने में देर नहीं लगाते। इसके बाद संगठन में किसी न किसी तरह पद या प्रभाव हासिल कर लेते हैं। पिछले पंद्रह वर्षों से यही फॉर्मूला अपनाकर नेताजी ने प्रदेश संगठन में अपनी मौजूदगी बनाये रखी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि सत्ता और संगठन में फिर जगह बनाने के लिए नेताजी कौनसी नई जुगत आजमाते हैं। नारदजी बता दें कि वर्तमान में नेताजी भाजपा संगठन में बतौर प्रदेश मंत्री शोभायमान हैं।

महिला कांग्रेस में ‘महासचिवी ’रेबड़ी’ !

मध्यप्रदेश महिला कांग्रेस की नई प्रदेश कार्यकारिणी इन दिनों राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। वजह है, कार्यकारिणी में कुल पदाधिकारियों में से 44 महिलाएं महासचिव बनाई गई हैं…! सवाल यह उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी ‘महासचिव सेना’ की जरूरत क्यों पड़ी? अंदरखाने की खबर है कि संगठन की कई महिला नेत्रियों से असंतोष और अंदरूनी खींचतान की आशंका थी। लिहाज़ा सबको एक-एक ‘महासचिवी रेबड़ी’ परोस दी गई, ताकि सब मीठा-मीठा मुस्कराती रहें और संगठन की गाड़ी बिना झटकों के चलती रहे। अब सबकी निगाहें प्रदेश अध्यक्ष पर हैं । देखना है कि वे इस महासचिवों की फौज से कितना और कैसा काम ले पाती हैं। फिलहाल, कांग्रेस मुख्यालय में लंबे समय बाद रौनक और चहल-पहल जरूर लौट आई है।

नये बड़े साहब के लिए नई चुनौती

मध्यप्रदेश की औद्योगिक राजधानी इंदौर में हाल ही में पदस्थ हुए नये बड़े साहब के सामने शुरुआत से ही चुनौतीपूर्ण राजनीतिक परिस्थितियां उभरने लगी हैं। उन्हें सत्ता के दो अलग-अलग ध्रुवों को साधने की कठिन परीक्षा से गुजरना पड़ रहा है। किसी एक पक्ष को साधने पर, दूसरे के नाराज़ होने का खतरा बना रहता है। ये साहब दो साल पहले ग्वालियर में भी बड़े साहब रह चुके हैं। तब भी उन्हें दो प्रमुख राजनीतिक ध्रुवों के बीच संतुलन बनाए रखने की ऐसी ही चुनौती का सामना करना पड़ा था। हालांकि, उस समय साहब ने चार महीने के भीतर ही ग्वालियर से अपना ‘पिंड’ छुड़ा लिया था। अब देखना दिलचस्प होगा कि साहब इंदौर की इन नई राजनीतिक चुनौतियों का सामना कितने समय तक करते हैं या फिर यहां से भी जल्द ‘पिंड छुड़ाने’ की राह पकड़ते हैं।

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