Politics Mirror
Advertisement
  • होम
  • राजनीति इन दिनों
  • मध्यप्रदेश
    • भोपाल
    • इंदौर
    • ग्वालियर
    • जबलपुर
  • देश
  • विदेश
  • परदे के पीछे
  • राजनीतिक चिंतन
  • टेक्नालाजी
  • जीवन शैली
    • धर्म / ज्योतिष
    • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
  • होम
  • राजनीति इन दिनों
  • मध्यप्रदेश
    • भोपाल
    • इंदौर
    • ग्वालियर
    • जबलपुर
  • देश
  • विदेश
  • परदे के पीछे
  • राजनीतिक चिंतन
  • टेक्नालाजी
  • जीवन शैली
    • धर्म / ज्योतिष
    • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Politics Mirror
No Result
View All Result
Home देश

दो बुजुर्ग मतदाताओं की मौत…सीईसी ज्ञानेश और सीईओ मनोज के खिलाफ पुलिस में शिकायत

Politics Mirror by Politics Mirror
December 31, 2025
in देश
0
दो बुजुर्ग मतदाताओं की मौत…सीईसी ज्ञानेश और सीईओ मनोज के खिलाफ पुलिस में शिकायत
0
SHARES
0
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में एसआईआर अभियान की अंतिम प्रक्रिया चल रही है, जिन वोटर्स का नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है, वे एसआईआर को लेकर चल रही सुनवाई में पहुंचकर अपना पक्ष रख रहे हैं। इस दौरान दो बुजुर्गों की मौत से इस मामले ने नया मोड़ आ गया है। दोनों मृतक बुजुर्गों के परिजनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। मौत के लिए इन दोनों को जिम्मेदार ठहराया गया है। इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल की सियासत में उबाल आ सकता है।

परिजनों का आरोप है कि गलत तरीके से भेजे गए नोटिस के कारण बुजुर्गों पर मानसिक दबाव पड़ा, जिससे उनकी जान चली गई। पुरुलिया जिले के 82 साल के मतदाता दुर्जन मांझी के बेटे कनाई मांझी ने बताया कि उनके पिता का नाम 2002 एसआईआर लिस्ट में दर्ज था, लेकिन चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड 2002 की ऑनलाइन सूची में नाम नहीं दिखा। इसी वजह से उनके पिता को सुनवाई का नोटिस भेजा गया। कनाई के मुताबिक नोटिस मिलने के बाद उनके पिता काफी घबरा गए और तय सुनवाई से कुछ घंटे पहले चलती ट्रेन के आगे कूद गए, जिससे उनकी मौत हो गई।

इसी तरह हावड़ा के 64 साल के जमात अली शेख की मौत का मामला भी सामने आया है। उनके बेटे का आरोप है कि उनके पिता वैलिड वोटर थे, फिर भी उन्हें सुनवाई का नोटिस भेजा गया। परिवार का आरोप है कि नोटिस के बाद वे मानसिक तनाव में आ गए और उसी दिन उनकी मौत हो गई। परिजनों ने सीईसी और सीईओ पर अधिकारों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए उन्हें जिम्मेदार ठहराया है। इस बीच चुनाव आयोग ने 27 दिसंबर को जारी अधिसूचना में कहा था कि ऐसे करीब 1.3 लाख मतदाता हैं, जिनके नाम 2002 की फिजिकल एसआईआर लिस्ट में हैं, लेकिन तकनीकी खामी के कारण ऑनलाइन डेटाबेस में नहीं दिख रहे हैं, उन्हें सुनवाई में उपस्थित होने की जरूरत नहीं होगी। आयोग ने इसे तकनीकी गड़बड़ी बताया था। उधर, मंगलवार को एक और दुखद घटना सामने आई। पूर्व मेदिनीपुर जिले में 75 साल के बिमल शी नामक बुजुर्ग, जिन्हें सुनवाई का नोटिस मिलने के बाद काफी तनाव में बताया जा रहा था, अपने घर में फंदे से लटके मिले। इस घटना ने मतदाता सूची से जुड़े नोटिसों और बुजुर्गों पर पडऩे वाले मानसिक प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

चुनाव आयोग का क्या कहना है
इस मामले में चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा कि सीईसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती, क्योंकि कानून इस बारे में स्पष्ट है। अधिकारी ने यह भी कहा कि अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते समय किसी सीईओ को आपराधिक मामले में दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। यदि पुलिस इस तरह की एफआईआर दर्ज करती है तो उसके कानूनी परिणाम होंगे।

Previous Post

अमाल और मेरे बीच कोई रिलेशनशिप नहीं है, प्लीज अब मुझे बख्श दो

Next Post

प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा की अवीवा बेग से होगी शादी?

Politics Mirror

Politics Mirror

Next Post
प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा की अवीवा बेग से होगी शादी?

प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा की अवीवा बेग से होगी शादी?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

पॉलिटिक्स मिरर पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

Recent News

बढ़ता स्तन कैंसर, इलाज से ज्यादा जागरूकता जरूरी

बढ़ता स्तन कैंसर, इलाज से ज्यादा जागरूकता जरूरी

March 8, 2026
चिंतामणि के बाद कालूहेड़ा के बागी तेवर

चिंतामणि के बाद कालूहेड़ा के बागी तेवर

March 8, 2026
मप्र में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की तैयारी

मप्र में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की तैयारी

March 7, 2026
महंगी होती रसोई की आंच

महंगी होती रसोई की आंच

March 7, 2026

Politics Mirror का उद्देश्य राजनीति में शुचिता की पैरवी करने के साथ राजनीतिक पत्रकारिता को एक नया दृष्टिकोण प्रदान करना है। 'Politics Mirror' स्पष्ट, निष्पक्ष और अंतर दृष्टिपूर्ण मूल्य-आधारित पत्रकारिता को बढ़ावा देता है। यह राजनीति में 'नैतिक मूल्यों' और आमजन के संवैधानिक अधिकारों, मुद्दों और समस्याओं की बात करता है।

Follow Us

Category

  • राजनीति इन दिनों
  • मध्यप्रदेश
  • देश
  • परदे के पीछे
  • विदेश
  • राजनीतिक चिंतन
  • जीवन शैली
  • मनोरंजन
  • ई-पेपर
  • About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact

© 2025 Politics Mirror. All rights reserved.

No Result
View All Result
  • होम
  • राजनीति इन दिनों
  • मध्यप्रदेश
    • भोपाल
    • इंदौर
    • ग्वालियर
    • जबलपुर
  • देश
  • विदेश
  • परदे के पीछे
  • राजनीतिक चिंतन
  • टेक्नालाजी
  • जीवन शैली
    • धर्म / ज्योतिष
    • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
  • ई-पेपर

© 2025 Politics Mirror. All rights reserved.