वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए रक्षा खर्च में अभूतपूर्व बढ़ोतरी का फैसला लिया है। ट्रंप ने घोषणा की है कि वर्ष 2027 के लिए अमेरिका का सैन्य बजट 1 ट्रिलियन डॉलर के शुरुआती अनुमान को पीछे छोड़ते हुए अब 1.5 ट्रिलियन डॉलर होगा। ट्रंप का यह कदम ऐसे समय में आया है जब वेनेजुएला सहित कई अन्य देशों के खिलाफ अमेरिकी तेवर सख्त बने हुए हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इस निर्णय की जानकारी साझा करते हुए इसे ड्रीम मिलिट्री का नाम दिया है। उन्होंने लिखा कि सीनेटरों, कांग्रेस सदस्यों और सचिवों के साथ गहन विचार-विमर्श के बाद यह तय किया गया है कि देश की भलाई और सुरक्षा के लिए सैन्य बजट में यह भारी इजाफा आवश्यक है। ट्रंप के अनुसार, वर्तमान समय बेहद कठिन और खतरनाक है, ऐसे में अमेरिका को एक ऐसी अजेय सेना तैयार करने की आवश्यकता है जो किसी भी दुश्मन से देश की रक्षा कर सके और वैश्विक शक्ति संतुलन को बनाए रख सके।
इस भारी-भरकम बजट के लिए धन की उपलब्धता पर स्पष्टीकरण देते हुए टं्रंप ने टैरिफ (सीमा शुल्क) से होने वाली कमाई को मुख्य आधार बताया है। उन्होंने तर्क दिया कि अन्य देशों पर लगाए गए टैरिफ के माध्यम से अमेरिका को बड़ी मात्रा में राजस्व प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि अतीत में कई देशों ने अमेरिका को उस स्तर पर लूटा है जो पहले कभी नहीं देखा गया था, लेकिन अब उन्हीं देशों से वसूले जा रहे शुल्क की बदौलत रक्षा बजट को 1 ट्रिलियन से बढ़ाकर 1.5 ट्रिलियन डॉलर किया जाना संभव हो पाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि टैरिफ से यह आय न होती, तो वे बजट की पुरानी संख्या पर ही टिके रहते।
अमेरिका की तुलना में भारत का रक्षा बजट
अमेरिकी रक्षा बजट की तुलना में अगर भारतीय परिप्रेक्ष्य को देखें, तो भारत ने भी अपनी रक्षा क्षमताओं को लगातार मजबूत किया है। वर्ष 2025-26 के लिए भारत का रक्षा बजट 6.81 लाख करोड़ रुपये आवंटित किया गया था, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.53 प्रतिशत अधिक था। इसमें घरेलू रक्षा उद्योगों और अनुसंधान (डीआरडीओ) पर विशेष जोर दिया गया था। हालांकि, अमेरिका द्वारा प्रस्तावित नया बजट वैश्विक सैन्य खर्च के इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित करने की ओर है, जो आने वाले समय में वैश्विक राजनीति की दिशा बदल सकता है।







