नई दिल्ली। कई बार व्यक्ति चाहकर भी अपने गुस्से पर नियंत्रण नहीं रख पाता, जिसका असर उसके रिश्तों, कार्यक्षेत्र और शारीरिक-मानसिक सेहत पर साफ दिखाई देता है। ऐसे समय में योग, ध्यान और प्राणायाम के साथ-साथ हाथों की कुछ विशेष मुद्राएं भी मानसिक संतुलन बनाने में मददगार साबित होती हैं।
इन्हीं में से एक प्रभावी मुद्रा है ज्ञान मुद्रा, जिसे गुस्से को शांत करने और मन को स्थिर करने का प्राकृतिक उपाय माना जाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, गुस्सा तब अधिक बढ़ता है जब दिमाग और तंत्रिका तंत्र पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ता है। नकारात्मक विचार हावी होने लगते हैं और व्यक्ति हर परिस्थिति पर तुरंत प्रतिक्रिया देने लगता है। ज्ञान मुद्रा का नियमित अभ्यास मस्तिष्क को शांत करने और सोचने-समझने की क्षमता को बेहतर बनाने में सहायक होता है। इस मुद्रा में बैठकर जब व्यक्ति अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करता है, तो मन धीरे-धीरे स्थिर होने लगता है और भावनात्मक उतार-चढ़ाव कम होने लगते हैं। ज्ञान मुद्रा में अंगूठे और तर्जनी उंगली को आपस में मिलाया जाता है, जबकि बाकी उंगलियां सीधी रहती हैं। इस सरल-सी मुद्रा का असर गहरा होता है। माना जाता है कि अंगूठा और तर्जनी के मिलन से मस्तिष्क से जुड़ी नसों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे मानसिक बेचैनी, आक्रामकता और तनाव में कमी आती है। जो लोग जल्दी गुस्सा हो जाते हैं या छोटी बातों पर उत्तेजित हो जाते हैं, उनके लिए ज्ञान मुद्रा एक सुरक्षित और प्राकृतिक उपाय के रूप में देखी जाती है।
नियमित अभ्यास से मन में ठहराव आता है और व्यक्ति भावनाओं पर बेहतर नियंत्रण महसूस करता है। ज्ञान मुद्रा के फायदे सिर्फ गुस्से तक सीमित नहीं हैं। यह मुद्रा याददाश्त को तेज करने और दिमाग को सक्रिय रखने में भी मदद करती है। पढ़ाई करने वाले बच्चों, ऑफिस में लंबे समय तक काम करने वाले लोगों और बुजुर्गों के लिए यह मुद्रा विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है। इससे एकाग्रता बढ़ती है और व्यक्ति किसी भी काम पर लंबे समय तक ध्यान केंद्रित कर पाता है। साथ ही, यह मानसिक थकान को कम कर दिमाग को आराम पहुंचाने में सहायक होती है। नियमित रूप से ज्ञान मुद्रा का अभ्यास करने से तनाव और चिंता में भी कमी देखी जाती है।







