नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा को लेकर फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पीएम मोदी 27-28 फरवरी 2026 को इजराइल यात्रा पर जा सकते हैं। 2017 के बाद पीएम मोदी की यह दूसरी इजरायल यात्रा होगी। माना जा रहा है कि यात्रा का मकसद भारत और इजरायल के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना है। यह यात्रा इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के निमंत्रण पर हो रही है। दोनों नेताओं के बीच रक्षा, सुरक्षा और तकनीक जैसे अहम मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है। मध्य पूर्व में मौजूदा हालात को देखकर यह दौरा भारत की विदेश नीति के लिए भी अहम माना जा रहा है।
पीएम मोदी की यह संभावित यात्रा तब हो रही है, जब क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। हालिया रिपोर्ट्स में पाकिस्तान पर हमास को सहयोग देने के आरोप लगे हैं। पाकिस्तानी जमीन पर हमास के प्रतिनिधि कुछ स्थानीय आतंकी संगठनों के संपर्क में दिखाई दिए हैं, जो भारत के लिए बड़ा खतरा है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों के साथ हमास के बढ़ते संपर्क ने कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। इजरायली राजदूत रूवेन अजार ने भी पाकिस्तान और बांग्लादेश में हमास की गतिविधियों पर चिंता जताकर कहा कि इससे सभी देशों को सतर्क रहना चाहिए। इन हालात में भारत के लिए इजरायल के साथ सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग और ज्यादा अहम हो गया है। यह पाकिस्तान की हर चाल को नाकाम करने के लिए जरूरी है। इसलिए पीएम मोदी की तेलअवीव की यात्रा पाकिस्तान की टेंशन बढ़ाएगी।
इस यात्रा के दौरान दोनों नेता क्षेत्रीय स्थिरता, गाजा से जुड़े हालात और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने पर चर्चा कर सकते हैं। बात दें कि भारत ने हमेशा शांति और बातचीत का समर्थन किया है और यह दौरा दोनों देशों के रिश्तों को व्यक्तिगत स्तर पर भी मजबूत करने का मौका माना जा रहा है। मिडिल ईस्ट में बड़ी संख्या में भारत के हित हैं, यह देखकर यह यात्रा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। रक्षा सहयोग इस यात्रा का सबसे बड़ा एजेंडा हो सकता है। इजरायल की उन्नत रक्षा तकनीक भारत की सुरक्षा जरूरतों के लिए अहम मानी जाती है। मिसाइल डिफेंस, ड्रोन और निगरानी से जुड़ी प्रणालियों पर बातचीत संभव है। इससे भारत की सीमा सुरक्षा को और मजबूती मिल सकती है।







