उज्जैन। अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी महासंघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर देश के प्रमुख मंदिरों में वीआईपी कल्चर पर रोक लगाने की मांग की है। महासंघ का कहना है कि संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्ति जब मंदिरों में आते हैं, तो पूजा-अर्चना में व्यवधान उत्पन्न होता है और पुजारियों के सम्मान को ठेस पहुंचता है। उन्होंने इसे रोकने के लिए वीआईपी प्रवेश प्रतिबंधित कानून बनाने का सुझाव दिया है।
पुजारी महासंघ ने बताया कि उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर से लेकर वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर तक, सुरक्षा और वीआईपी व्यवस्था के नाम पर पुजारियों को उनके ही गर्भगृह और पूजा स्थलों से खदेड़ दिया जाता है। इससे पुजारियों और उनके परिवारों को अपमान का सामना करना पड़ता है। वृंदावन में हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के दौरे के दौरान सुरक्षा कारणों से पुजारियों और उनके परिवारों के साथ अव्यवहार हुआ। उज्जैन के महाकाल मंदिर में भी कई बार वीआईपी आगमन पर पुजारियों को हटाना पड़ा।
पुजारी महासंघ ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद मंदिरों में पूजा-अर्चना और पुजारियों का सम्मान बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोग जब मंदिरों में आते हैं, तो अव्यवस्था उत्पन्न होती है और पूजा में व्यवधान आता है। इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि देश के सभी प्रमुख मंदिरों में वीआईपी कल्चर पर रोक लगाने के लिए कानून बनाया जाए।







