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Home जीवन शैली

भृंगराज: लिवर की कार्यक्षमता बढ़ाने में अत्यंत असरकारी है

Politics Mirror by Politics Mirror
July 24, 2025
in जीवन शैली, स्वास्थ्य
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भृंगराज: लिवर की कार्यक्षमता बढ़ाने में अत्यंत असरकारी है
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नई दिल्ली। भारत समेत कई देशों में भृंगराज फाल्स डेज़ी, घमरा या भांगड़ा जैसे नामों से जाना जाता है। आयुर्वेद में भृंगराज को ‘केशराज’ यानी बालों का राजा कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम इकलिपा अल्बा है और यह अक्सर दलदली क्षेत्रों या घरों के आसपास आसानी से उग जाता है। भृंगराज का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से बालों को काला, घना और चमकदार बनाने में किया जाता है, लेकिन इसके लाभ केवल यहीं तक सीमित नहीं हैं। चरक संहिता में भृंगराज को पित्तशामक और रक्तशोधक बताया गया है।

यह लिवर की कार्यक्षमता बढ़ाने और खून को साफ करने में सहायक है। पित्त दोष असंतुलन के कारण समय से पहले बाल सफेद हो जाते हैं, और भृंगराज इस दोष को संतुलित कर सफेदी की प्रक्रिया को धीमा करने में मदद करता है। वहीं, सुश्रुत संहिता में इसके तेल को बालों की जड़ों को मज़बूती देने और सफेदी रोकने वाली अग्रणी औषधि बताया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी इसके पत्तों से लेप बनाकर बालों पर लगाया जाता है, जबकि शहरी इलाकों में लोग इसका तेल दुकानों से खरीदते हैं।

यह न केवल बालों के लिए उपयोगी है बल्कि मस्तिष्क को भी ताकत देता है। इसलिए भृंगराज को आयुर्वेद में केवल जड़ी-बूटी नहीं, बल्कि एक चमत्कारी औषधि माना जाता है। भृंगराज का तेल घर पर भी बनाया जा सकता है। इसके लिए भृंगराज के पत्ते, मीठा नीम, प्याज, मेथी और नीम को सरसों के तेल में पका कर छान लें। यदि सरसों का तेल ज्यादा गर्म लगे, तो नारियल या तिल के तेल का उपयोग करें और संतुलन के लिए कपूर मिलाया जा सकता है।

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