मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का इस बार का ‘दीपावली गिफ्ट’ राजधानी के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। वजह भी उतनी ही दिलचस्प है-मिठाई, सूखे मेवे या पटाखों की जगह उन्होंने लोगों को भेजे हैं, गोबर के कंडे (उपले)। दीपावली पर नेताओं द्वारा अपने समर्थकों, शुभचिंतकों, पत्रकारों और मित्रों को मिठाई या आकर्षक उपहार भेजने की पुरानी परंपरा है। इसी परंपरा का निर्वाह करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने भी इस बार सुंदर पैकिंग में उपहार भिजवाए। लेकिन जब डिब्बे खुले तो सब दंग रह गए। अंदर से निकले पांच सलीके से सजे ऑर्गेनिक गोबर के उपले। आखिर नेता प्रतिपक्ष ने इस बार का यह ‘गोबर कनेक्शन’ क्यों चुना?, यह तो वही जानें। लेकिन उनके इस ‘अनूठे तोहफ़े’ ने उनकी और कांग्रेस की जग-हँसाई जरूर खूब करवा दी है।
इंदौरी भिया और 50 किलो गेहूं की बोरी!
प्रदेश कांग्रेस के मुखिया इंदौरी भिया ने जब 50 किलो गेहूं की बोरी कंधे पर उठाई, तो भोपाल से दिल्ली तक चर्चा का नया सिलसिला चल पड़ा। इस घटना ने एक बात तो साफ कर दी कि, इंदौरी भिया भले ही पार्टी का भारी-भरकम बोझ उठा पाने में अभी तक सफल न हुए हों, मगर 50 किलो वजऩ उठाने की उनकी फिजिकल फिटनेस’ पर कोई सवाल नहीं है। दरअसल, इंदौरी भिया ने चर्चा में आने बाकायदा एक उपक्रम रचा। कंधे पर गेहूं की बोरी रखी, मीडिया बुलाया और पहुंच गए सोयाबीन के दाम मांगने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के भोपाल स्थित ‘मामा के घर’। वहां उन्होंने सोयाबीन, धान समेत कई फसलों की गिरती कीमतों और खाद संकट को लेकर भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया। सबकुछ ठीक था, सिवाय इस सवाल कि आखिर इंदौरी भिया का यह शारीरिक शक्ति प्रदर्शन किसके लिए था? किसानों के लिए, कैमरे के लिए या फिर आलाकमान (राहुल गांधी) की नजरों में चढऩे के लिए?
भाजपा मुख्यालय के कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड
मध्यप्रदेश भाजपा मुख्यालय में नए प्रदेश अध्यक्ष के कार्यभार संभालने के बाद से मितव्ययिता, शुचिता और अनुशासन को लेकर लगातार नए प्रयोग किए जा रहे हैं। अब चर्चा है कि मुख्यालय के कर्मचारियों के लिए जल्द ही ड्रेस कोड लागू किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, कर्मचारियों की ड्रेस का रंग और कपड़ा दोनों पहले ही तय कर लिए गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि प्रदेश अध्यक्ष स्वयं बैरागढ़ मार्केट (भोपाल) जाकर कपड़ा चुनकर लाए हैं। शुरुआत में भगवा शर्ट और काली पैंट का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में तय किया गया कि जब पार्टी के नेता-कार्यकर्ता खादी वस्त्र पहनते हैं, तो मुख्यालय के कर्मचारी भी खादी की ड्रेस पहनेंगे। नारदजी कहते हैं कि, ड्रेस कोड लागू होने से कुछ हो न हो, लेकिन कम से कम भाजपा मुख्यालय में अनुशासन तो नजर आएगा।






