Politics Mirror
Advertisement
  • होम
  • राजनीति इन दिनों
  • मध्यप्रदेश
    • भोपाल
    • इंदौर
    • ग्वालियर
    • जबलपुर
  • देश
  • विदेश
  • परदे के पीछे
  • राजनीतिक चिंतन
  • टेक्नालाजी
  • जीवन शैली
    • धर्म / ज्योतिष
    • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
  • होम
  • राजनीति इन दिनों
  • मध्यप्रदेश
    • भोपाल
    • इंदौर
    • ग्वालियर
    • जबलपुर
  • देश
  • विदेश
  • परदे के पीछे
  • राजनीतिक चिंतन
  • टेक्नालाजी
  • जीवन शैली
    • धर्म / ज्योतिष
    • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Politics Mirror
No Result
View All Result
Home परदे के पीछे

परदे के पीछे-मप्र भाजपा में बड़े ‘संगठनात्मक’ बदलाव की ‘आहट’

Politics Mirror by Politics Mirror
January 31, 2026
in परदे के पीछे
0
परदे के पीछे-मप्र भाजपा में बड़े ‘संगठनात्मक’ बदलाव की ‘आहट’
0
SHARES
0
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर नितिन नवीन की ताजपोशी के साथ ही पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में बड़े फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन के साथ मप्र समेत कई राज्यों में संगठन महामंत्री स्तर पर अहम बदलाव देखने को मिल सकते हैं। मप्र भाजपा में मौजूदा प्रदेश संगठन महामंत्री का कार्यकाल पूरा हो चुका है, ऐसे में राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या नितिन नवीन मप्र में किसी नए चेहरे को संगठन की कमान सौंपेंगे या फिर 2028 के विधानसभा चुनाव तक मौजूदा व्यवस्था को ही बरकरार रखा जाएगा? केंद्रीय नेतृत्व संगठन को नई ऊर्जा और रणनीतिक धार देने के मूड में है। ऐसे में मप्र में बदलाव की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, चुनावी गणित और संगठनात्मक संतुलन को देखते हुए यथास्थिति बनाए रखने का विकल्प भी खुला हुआ है। फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व के अगले कदम पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हैं।

राजमाता को भूल गई भाजपा?

वर्ष 1967… मध्यप्रदेश की राजनीति में भूचाल लाने वाला साल। उस दौर के सबसे ताकतवर मुख्यमंत्री द्वारका प्रसाद मिश्र को सत्ता से बाहर कर जनसंघ को मजबूत आधार देने वाली शख्सियत थीं-राजमाता विजया राजे सिंधिया। भाजपा की वैचारिक और सांगठनिक नींव रखने वाली राजमाता की 25 जनवरी को पुण्यतिथि थी। पर, इस बार भाजपा के सियासी गलियारों में एक अजीब सन्नाटा दिखा। अब तक परंपरा रही है कि भाजपा 25 जनवरी को राजमाता को पूरे सम्मान और जोर-शोर से याद करती रही है। इस दिन को पार्टी ‘नारी शक्ति दिवस’ के रूप में भी मनाती आई है। लेकिन इस बार तस्वीर बदली हुई थी। न भाजपा मुख्यालय में श्रद्धांजलि सभा, न कोई औपचारिक कार्यक्रम और न ही कोई विशेष आयोजन। नारदजी को भाजपा के एक पुराने पदाधिकारी दबी जुबान से कहते हैं कि ‘नई भाजपा का फोकस अब भविष्य और युवाओं पर है। इतिहास में झांकने की फुर्सत नहीं रही।’ शायद यही वजह है कि पार्टी के कई पुराने नेता और विचारधारा के स्तंभ अब धीरे-धीरे हाशिए पर खिसकते नजर आ रहे हैं, या फिर स्मृतियों के पन्नों में सिमटते जा रहे हैं। क्या गजब है, जिस राजमाता ने एक समय भाजपा की सियासी राह आसान की, आज वही भाजपा उन्हें भूलती जा रही है?

घर वालों से परेशान मंत्रीजी..!

श्रीमंत के करीबी प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री इन दिनों सियासी नहीं, बल्कि पारिवारिक मोर्चे पर उलझे हुए हैं। मंत्रीजी की परेशानी की वजह कोई राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि उनके अपने घरवाले, खासतौर पर पत्नी और बेटा बताए जा रहे हैं। कहानी कुछ यूं है कि मंत्रीजी के सरकारी बंगले से ही एक ‘बेनाम’ कंसल्टेंसी चुपचाप संचालित हो रही है। दावा है कि यह कंसल्टेंसी मंत्रीजी के विभाग से लेकर सरकार से जुड़े हर छोटे-बड़े काम को ‘करवाने’ का भरोसा देती है। शर्त है-जैसा काम, वैसा दाम। बताते हैं कि जब मंत्रीजी को इस ‘कंसल्टेंसी’ की भनक लगी, तो उन्होंने तत्काल इस पर ब्रेक लगाने की कोशिश की। लेकिन पत्नी और बेटे की जिद के सामने मंत्रीजी बेबस नजर आए। अब हालात यह हैं कि मंत्रीजी भीतर ही भीतर उधेड़बुन में हैं। डर इस बात का सता रहा है कि यदि यह मामला ‘ऊपर’ तक पहुंच गया, तो बदनामी तय है और राजनीतिक भविष्य पर भी खतरा। नारदजी कहते हैं कि, जब संकट घर के भीतर से खड़ा हो जाए, तो बड़े-बड़े मंत्री भी लाचार हो जाते हैं।

कमलनाथ का राज्यसभा जाना लगभग तय!

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के यह कहते ही कि अब उनका राज्यसभा जाने का कोई इरादा नहीं है, मप्र कांग्रेस की सियासत में अचानक हलचल तेज हो गई है। खाली होती दिख रही संभावित राज्यसभा सीट ने पार्टी के भीतर दावेदारी की दौड़ शुरू करा दी है। कोई खुलकर मैदान में है, तो कोई परदे के पीछे अपनी जमीन मजबूत करने में जुटा हुआ है। इस दौड़ में कमलनाथ, अरुण यादव, जीतू पटवारी, मीनाक्षी नटराजन और कमलेश पटेल जैसे नाम चर्चा में हैं। लेकिन इन तमाम दावेदारों के बीच कमलनाथ का नाम सबसे ज्यादा भारी और प्रभावी माना जा रहा है। दरअसल, मौजूदा राजनीतिक हालात में कांग्रेस को जितनी जरूरत कमलनाथ के अनुभव, नेटवर्क और सियासी पकड़ की है, उतनी ही जरूरत कमलनाथ को भी मप्र में अपना राजनीतिक दबदबा बनाए रखने के लिए राज्यसभा के मंच की है। यही वजह है कि पार्टी के भीतर- बाहर यह धारणा बनती जा रही है कि राज्यसभा की यह बाजी अंतत: कमलनाथ के खाते में ही जाएगी। अब निगाहें कांग्रेस हाईकमान के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। अगर ऐन मौके पर कोई बड़ा राजनीतिक उलटफेर या आसमानी-सुल्तानी नहीं हुई, तो कमलनाथ का राज्यसभा पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है..!

सबका ‘सेवादार’ विधर्मी परिवहन अधिकारी..!

मध्यप्रदेश के राजनीतिक-प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों परिवहन विभाग के एक रिटायर्ड ‘विधर्मी’ अधिकारी की चर्चा जोर-शोर से हो रही है। वजह कोई बड़ी उपलब्धि नहीं, बल्कि उसकी अद्भुत ‘सेवादारी’ है। यह अधिकारी अपने कार्यकाल के दौरान परिवहन विभाग की विजिलेंस शाखा में एक अहम पद पर पदस्थ रहा और उसका मूलमंत्र था नेताओं और बड़े अधिकारियों की हर हाल में, हर तरह से ‘सेवा’ करना। बताया जाता है कि इसी ‘सेवादारी’ के दम पर वह देखते-देखते सबका चहेता और रसूखदार बन गया। भोपाल के गांधी नगर रोड स्थित उसकी आलीशान कोठी को देखकर अच्छे-अच्छों की आंखें चौंधिया जाती हैं। इतना ही नहीं, इंदौर, बुरहानपुर और रीवा में भी उसकी करोड़ों रुपये की कथित बेनाम संपत्तियों की चर्चाएं आम हैं।नारदजी बताते हैं कि यह सब ‘सेवादारी’ से हासिल किया गया ‘मेवा’ है। भले ही अधिकारी अब सेवानिवृत्त हो चुका हो, लेकिन राजनीतिक-प्रशासनिक गलियारों में उसकी ‘सेवादारी’ बदस्तूर जारी रही है।

Previous Post

महाराष्ट्र की राजनीति में उथल-पुथल, सुनेत्रा के उपमुख्यमंत्री बनने से अनभिज्ञ शरद पवार

Next Post

भाजपा ने शुरू की मोर्चा-प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की तैयारी, विधायकों से मांगे नाम

Politics Mirror

Politics Mirror

Next Post
भाजपा ने शुरू की मोर्चा-प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की तैयारी, विधायकों से मांगे नाम

भाजपा ने शुरू की मोर्चा-प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की तैयारी, विधायकों से मांगे नाम

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

पॉलिटिक्स मिरर पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

Recent News

बढ़ता स्तन कैंसर, इलाज से ज्यादा जागरूकता जरूरी

बढ़ता स्तन कैंसर, इलाज से ज्यादा जागरूकता जरूरी

March 8, 2026
चिंतामणि के बाद कालूहेड़ा के बागी तेवर

चिंतामणि के बाद कालूहेड़ा के बागी तेवर

March 8, 2026
मप्र में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की तैयारी

मप्र में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की तैयारी

March 7, 2026
महंगी होती रसोई की आंच

महंगी होती रसोई की आंच

March 7, 2026

Politics Mirror का उद्देश्य राजनीति में शुचिता की पैरवी करने के साथ राजनीतिक पत्रकारिता को एक नया दृष्टिकोण प्रदान करना है। 'Politics Mirror' स्पष्ट, निष्पक्ष और अंतर दृष्टिपूर्ण मूल्य-आधारित पत्रकारिता को बढ़ावा देता है। यह राजनीति में 'नैतिक मूल्यों' और आमजन के संवैधानिक अधिकारों, मुद्दों और समस्याओं की बात करता है।

Follow Us

Category

  • राजनीति इन दिनों
  • मध्यप्रदेश
  • देश
  • परदे के पीछे
  • विदेश
  • राजनीतिक चिंतन
  • जीवन शैली
  • मनोरंजन
  • ई-पेपर
  • About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact

© 2025 Politics Mirror. All rights reserved.

No Result
View All Result
  • होम
  • राजनीति इन दिनों
  • मध्यप्रदेश
    • भोपाल
    • इंदौर
    • ग्वालियर
    • जबलपुर
  • देश
  • विदेश
  • परदे के पीछे
  • राजनीतिक चिंतन
  • टेक्नालाजी
  • जीवन शैली
    • धर्म / ज्योतिष
    • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
  • ई-पेपर

© 2025 Politics Mirror. All rights reserved.