महेश दीक्षित
भोपाल। मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में मंगलवार को एक नया इतिहास रच दिया गया। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने एक ही दिन बैतूल और धार में देश के पहले पीपीपी मोड पर बनने वाले दो मेडिकल कॉलेजों का अलग-अलग भूमिपूजन किया। इस अवसर पर बैतूल जिले में 383 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण भी किया गया। बैतूल कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री दुर्गादास उईके, उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और प्रभारी मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल उपस्थित थे।
इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इन मेडिकल कॉलेजों के निर्माण से न केवल बैतूल और धार, बल्कि आसपास के जनजातीय अंचलों को भी सुलभ, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान को सुदृढ़ करते हुए मुलताई का नाम ‘मूलतापी’ करने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीपीपी मॉडल पर बनने वाले ये मेडिकल कॉलेज देश में अपनी तरह के पहले उदाहरण हैं, जहां समाज और सरकार मिलकर स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण करेंगे। उन्होंने बताया कि इसी वर्ष अगस्त में बैतूल, धार, कटनी और पन्ना में चार मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लिए अनुबंध किए गए थे। बैतूल और धार का भूमि-पूजन हो चुका है, जबकि शीघ्र ही कटनी और पन्ना में भी शिलान्यास किया जाएगा। इसके बाद भिण्ड, मुरैना, खरगोन, अशोकनगर, गुना, बालाघाट, टीकमगढ़, सीधी और शाजापुर में भी मेडिकल कॉलेज खोलने की तैयारी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि धार और बैतूल के मेडिकल कॉलेज दो से तीन वर्षों में बनकर तैयार होंगे। इनके शुरू होने से प्रदेश में एमबीबीएस की 100-100 सीटें और बढ़ेंगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 33 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। बीते दो वर्षों में 6 नए शासकीय मेडिकल कॉलेज शुरू किए गए हैं।
धार में एक रुपये की लीज पर जमीन
मुख्यमंत्री डा. यादव ने बताया कि धार जिले में 260 करोड़ रुपये की लागत से 25 एकड़ भूमि पर मेडिकल कॉलेज का निर्माण किया जा रहा है। स्वामी विवेकानंद शिक्षा धाम फाउंडेशन के सहयोग से बनने वाले इस कॉलेज के लिए राज्य सरकार ने एक रुपये की लीज पर जमीन उपलब्ध कराई है। यहां एमबीबीएस के साथ नर्सिंग और पैरामेडिकल पाठ्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे।
स्वास्थ्य नवाचार में मप्र देश का पथप्रदर्शक-जेपी नड्डा
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि धार और बैतूल में पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेजों का भूमिपूजन देश के लिए एक ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णय है। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य क्षेत्र को सेवा के साथ-साथ संवेदनशीलता से जोड़ा गया है और मध्यप्रदेश इस सोच को जमीन पर उतारने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। नड्डा ने कहा कि आज स्वास्थ्य सेवाएं केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि जनजातीय और दूरस्थ अंचलों तक पहुंच रही हैं। उन्होंने बताया कि देशभर में 1.81 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर कार्यरत हैं, जहां जच्चा-बच्चा, युवा और बुजुर्ग, सभी के लिए समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत 62 करोड़ से अधिक नागरिकों को सालाना 5 लाख रुपये तक का नि:शुल्क इलाज मिल रहा है। 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी गंभीर बीमारियों के उपचार की विशेष व्यवस्था की गई है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि टेली-मानस जैसी पहल से मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं घर बैठे सुलभ हुई हैं, जिससे अब तक 30 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हो चुके हैं। हाइपरटेंशन, डायबिटीज और कैंसर जैसी बीमारियों की व्यापक स्क्रीनिंग की जा रही है। टीबी उन्मूलन के क्षेत्र में भारत ने 21 प्रतिशत की गिरावट दर्ज कर वैश्विक स्तर पर बेहतर प्रदर्शन किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में देश में 387 मेडिकल कॉलेज और 51 हजार एमबीबीएस सीटें थीं, जो आज बढ?र 819 से अधिक मेडिकल कॉलेज और 1 लाख 29 हजार सीटों तक पहुंच चुकी हैं। पीएम मोदी ने 2030 से पहले 75 हजार नई मेडिकल सीटें बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। नड्डा ने कहा कि मध्यप्रदेश में कटनी और पन्ना में भी अगले चरण में मेडिकल कॉलेजों का भूमि-पूजन किया जाएगा।
बैतूल के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय-खण्डेलवाल
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि मेडिकल कॉलेज की सौगात से बैतूल के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। मेडिकल कॉलेज के शुरू होने से अब गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए भोपाल या नागपुर जाने की मजबूरी खत्म होगी। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक भवन नहीं, बल्कि जिले के लाखों नागरिकों के लिए जीवनरक्षक सुविधा है। मेडिकल कॉलेज के साथ नर्सिंग, पैरामेडिकल और चिकित्सा शिक्षा के अवसर भी बढ़ेंगे, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा।







