नई दिल्ली। पाचन तंत्र की गड़बडिय़ां सिर्फ खान-पान से जुड़ी दिक्कतें नहीं बतातीं, बल्कि ये आंतों में संक्रमण की शुरुआत भी हो सकती हैं। आयुर्वेद में आंतों के संक्रमण को अतिसार, ग्रहणी दोष और कृमि रोग से जोड़ा गया है। ये समस्याएं आमतौर पर आंतों में वायरस, फंगस के पनपने से उत्पन्न होती हैं। इसके अलावा बार-बार एंटीबायोटिक्स लेने से भी आंतों के अच्छे बैक्टीरिया प्रभावित होते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। आयुर्वेद में ऐसे कई उपाय बताए गए हैं जो आंतों को डिटॉक्स कर संक्रमण को कम करने में मदद करते हैं। आंतों को स्वस्थ रखने के लिए पहला और बेहद प्रभावी उपाय है छाछ (मही) का सेवन। दोपहर में छाछ में भुना जीरा और काला नमक मिलाकर पीने से पाचन मजबूत होता है और आंतों में अच्छे बैक्टीरिया बढ़ते हैं, जो संक्रमण से लडऩे में सहायक होते हैं।
दूसरा उपाय है त्रिफला चूर्ण। इसे पेट और आंतों की सफाई के लिए रामबाण माना जाता है। रात में गुनगुने पानी के साथ इसका सेवन करने से शरीर की गंदगी बाहर निकलती है और आंतें स्वस्थ बनती हैं। आंतों में सूजन की समस्या होने पर हल्दी और दूध का सेवन बेहद लाभदायक माना गया है। हल्दी के एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण सूजन कम करते हैं और पेट दर्द से राहत दिलाते हैं। इसके अलावा अजवाइन और सौंठ का मिश्रण गैस, ऐंठन और अपच को कम करता है, जिससे आंतों पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता। आंतों को संक्रमण से बचाने में अनार के छिलके या उसके रस का सेवन भी काफी उपयोगी है।
अनार में मौजूद टैनिन और एलाजिक एसिड आंतों की सूजन कम करने में मदद करते हैं। इसी तरह बेल का रस भी पेट और आंत दोनों के लिए पौष्टिक और लाभकारी माना जाता है।
आयुर्वेद विशेषज्ञों का कहना है कि आंतों की खराब सेहत समय पर ध्यान न देने पर गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। इसलिए पेट दर्द या असहजता को मामूली मानकर नजरअंदाज न करें और आयुर्वेदिक उपायों के साथ स्वस्थ खान-पान और जीवनशैली अपनाएं, ताकि आंतें मजबूत रहें और पाचन तंत्र स्वस्थ बना रहे।






