-महेश दीक्षित
भोपाल। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृहनगर विदिशा में भाजपा की अंदरूनी कलह थमने का नाम नहीं ले रही है। पिछले सवा महीने से नगर पालिका के दो दर्जन से अधिक भाजपा पार्षद शिवराज के सबसे करीबी पार्टी के ही विधायक के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। अब पार्षदों ने विधायक पर भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ ‘राइट टू कॉल’ लाने का ऐलान किया है।
दरअसल, 39 पार्षदों वाली विदिशा नगर पालिका परिषद में दो दर्जन भाजपा पार्षद शहर के विकास को मुद्दा बनाकर टेंट लगाकर सवा महीने से धरने पर बैठे हैं। पार्षदों का आरोप है कि विधायक टंडन नगर पालिका के कामकाज में लगातार हस्तक्षेप कर रहे हैं, जिससे स्वीकृत विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सडक़ों, नालियों, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और सफाई जैसे बुनियादी काम ठप पड़े हैं। परिषद की बैठकों में लिए गए निर्णय जमीन पर नहीं उतर पा रहे। पार्षदों का कहना है कि विधायक के दबाव में अधिकारी स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पा रहे हैं। ठेकेदारों के चयन से लेकर भुगतान तक में मनमानी हो रही है। कई बार सरकार-संगठन और प्रशासनिक स्तर पर शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकला, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। यह मामला राजनीतिक तौर पर भी अभूतपूर्व माना जा रहा है। मध्यप्रदेश के इतिहास में संभवत: यह पहला अवसर है, जब किसी विधायक के खिलाफ उसी पार्टी के पार्षद खुले तौर पर आंदोलन कर रहे हैं। सत्ता में रहते हुए भाजपा के भीतर इस तरह का सार्वजनिक विरोध संगठनात्मक अनुशासन और आंतरिक समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
उधर, विधायक मुकेश टंडन ने कई बार आंदोलनकारी पार्षदों से बातचीत कर मामले को सुलझाने की कोशिश की है। लेकिन पार्षदों का साफ कहना है कि अब उन्हें विधायक के आश्वासनों पर भरोसा नहीं रहा। पार्षदों का कहना है कि जब तक नगर पालिका के कामकाज में विधायक का कथित हस्तक्षेप बंद नहीं होता और विकास कार्य पटरी पर नहीं आते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
कभी मशाल जुलूस, कभी अर्द्धनग्न प्रदर्शन
पार्षद सरकार और संगठन का ध्यान खींचने के लिए हर दिन अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं। कभी मशाल जुलूस निकाला गया, तो कभी विकास ठप होने के विरोध में ‘विकास की अर्थी’ निकाली गई। इतना ही नहीं, पार्षद बेतवा नदी में अर्द्धनग्न खड़े होकर भी प्रदर्शन कर चुके हैं। पार्षदों का कहना है कि बार-बार अनदेखी के चलते उन्हें इस तरह के प्रतीकात्मक आंदोलनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
विधायक का विवादों से पुराना नाता
-प्रशासनिक कार्यों और नगर विकास मामलों में हस्तक्षेप के आरोप पहले भी लगते रहे हैं।
-अधिकारियों पर दबाव बनाकर फैसले प्रभावित करने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
-कार्यशैली को लेकर पार्टी संगठन में असंतोष और स्थानीय कार्यकर्ताओं की नाराजगी के मामले उजागर होते रहे हैं।
-मौजूदा आंदोलन ने इन पुराने विवादों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।







