मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 साल पूरे होने पर मुंबई में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने भी शिरकत की। वे फिल्ममेकर सुभाष घई और गीतकार प्रसून जोशी के साथ वहां पहुंचे और संघ प्रमुख मोहन भागवत को सुना। कार्यक्रम में संघ प्रमुख भागवत ने कहा कि भारत में हिंदू ही है और कोई है ही नहीं। किसी खास रस्म या प्रार्थना से जुड़े धर्म को नहीं दिखाता है, न ही यह किसी खास समुदाय का नाम है। उन्होंने कहा कि संघ किसी के खिलाफ नहीं है और न ही उसे सत्ता या पावर की इच्छा है। संघ राजनीति में सीधे तौर पर शामिल नहीं है, संघ के कुछ लोग राजनीति में सक्रिय हैं।
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि बहुत से लोग कहते हैं कि नरेंद्र भाई आरएसएस के प्रधानमंत्री है। उनकी पॉलिटिकल पार्टी बीजेपी अलग है। उसमें बहुत स्वयंसेवक है, लेकिन संघ की नहीं। संघ के स्वयंसेवक उसमें हैं। भागवत ने कहा कि भारत का बंटवारा धर्म की वजह से हुआ। हमने कहा कि हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं, क्योंकि हम हिंदू हैं। इस्लाम, ईसाई धर्म अभी भी भारत में मौजूद हैं। झड़पें होती हैं, लेकिन देश एकजुट रहता है। हिंदू भाव को भुला देना भी बंटवारे का कारण बना।
संघ देश में चल रहे सकारात्मक प्रयासों को समर्थन और मजबूती देने पर फोकस करता है। संघ कोई पैरामिलिट्री फोर्स नहीं है। रूट मार्च और स्वयंसेवकों के लाठी अभ्यास के बावजूद संघ को अखाड़ा या सैन्य संगठन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। हिंदुत्व अपनाने से किसी को कुछ भी छोडऩा नहीं पड़ता। न आपकी पूजा-पद्धति बदलती है, न भाषा, न रहन-सहन। हिंदुत्व का मतलब है सुरक्षा और साथ-साथ रहने का भरोसा। यह किसी एक धर्म को थोपने की बात नहीं करता। लोगों की आस्था, खाने-पीने की आदतें और भाषा अलग हो सकती हैं, लेकिन हम सब एक ही समाज, संस्कृति और देश का हिस्सा हैं। इसी सोच को हिंदुत्व कहा जाता है, आप इसे भारतीयता कह सकते हैं।
उन्होंने कहा कि हिंदू-मुस्लिम एकता कहावत सही नहीं है, क्योंकि हम पहले से ही एक हैं। 1925 में संघ बनने से पहले अंग्रेजों ने इंडियन नेशनल कांग्रेस को अपने सेफ्टी वाल्व के रूप में बनाया था, लेकिन बाद में भारतीयों ने उसी कांग्रेस को आजादी की लड़ाई का मजबूत हथियार बना दिया। देश में अपना उत्पादन मजबूत होना चाहिए, लेकिन दुनिया से जुड़ाव भी जरूरी है। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि यह जुड़ाव टैक्स या टैरिफ लगाकर जबरदस्ती नहीं होना चाहिए। संघ प्रमुख ने राजा राम मोहन रॉय, स्वामी विवेकानंद और दयानंद सरस्वती जैसे समाज सुधारकों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन लोगों की सोच ने देश के समाज को जागरूक बनाने में बड़ी भूमिका निभाई।







