जैसे शरीर को मजबूत किया जा सकता है वैसे मन को भी मजबूत किया जा सकता है। लेकिन कमाल की बात यह है कि इस तथ्य आमतौर पर लोग स्वीकारते नहीं है। कोई बच्चा अगर दिमागी रूप से कुछ कमजोर है तो कोई नहीं सोचता कि इसके दिमाग को बढ़ाने के लिए कुछ करना चाहिए। हां, अगर शारीरिक रूप से कमजोर हो तो हर मिलने वाला वैध बन कुछ न कुछ टोटका अवश्य बता जाता हैं। आज का आधुनिक मनोविज्ञान मन पर काम कर रहा है, लेकिन मनोविज्ञान मनो रोगी पर और मन की विकृतियों पर अधिक काम कर रहा है। मन को विकसित करने पर नहीं। मन को बढ़ाया जा सकता है, यह बात न तो इस तथ्य को कोई सरकार स्वीकारती है और न ही कोई शिक्षा तंत्र।
प्राचीन समय में भारत में मन पर ही काम होता था। मन को कैसे समझा जाए? मन कैसे काम करता है? मन को कैसे विकसित किया जा सकता है? प्राचीन ऋषि इन विषयों पर कार्य करते थे। इसलिए ही ध्यान के तरीके उन्होंने विकसित किए। प्राचीन समय में मन के माध्यम से ही जीवन को उन्नत किया जाता था। जीवन आज भी मन के माध्यम से ही उन्नत होता है। लेकिन आज मन को विकसित करने की शिक्षा कही नहीं दिखाई देती। जिस तरह से आज का शिक्षा तंत्र कार्य कर रहा है। उस तरह से समृद्ध व्यक्तित्व नहीं रॉबर्ट तैयार हो रहे हैं। बुद्धि का विकास नहीं हो रहा बल्कि यांत्रिक बुद्धि बढ़ाई जा रही है। सबसे पहले इस तथ्य को स्वीकारना होगा कि मन को विकसित किया जा सकता है। तभी हम मन पर काम कर पाएंगे। कमाल की बात है कि सारा दिन मन से काम तो लिया जाता है लेकिन उसकी स्वस्थता और स्वच्छता के लिए शायद ही कोई कदम उठाया जाता हो।
सबसे पहले मन को शांत करना सीखना होगा फिर मन को शुद्ध करना सीखना होगा। मन को शांत और शुद्ध करने के बहुत सारे तरीके हमारे शास्त्रों में विद्यमान है। उन तरीकों को आम जीवन में लाना होगा। शांत मन न केवल अच्छे से सोच सकता है बल्कि कोई भी कार्य अच्छे से कर भी सकता है। नियमित ध्यान और स्वयं के मन का अवलोकन, हमें हमारे को सुदृढ़ करना सीखा सकता है। जैसे हम शरीर को शुद्ध और स्वस्थ रखने के लिए स्नान इत्यादि करते है वैसे ही मन को शुद्ध और स्वस्थ रखने के लिए हमे चिंतन करना होगा। धर्म के अनुसार तरीके अलग हो सकते है लेकिन उन्हें अपना आकर जीवन में लाना होगा। तभी हम मन की कार्यशैली को समझ कर जीवन में आगे बढ़ सकते है।







