नई दिल्ली। महिलाओं में पीरियड्स (माहवारी) में तेज दर्द ‘एंडोमेट्रियोसिस’ नामक गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। यह समस्या हर दस में से एक महिला को है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एंडोमेट्रियोसिस उतनी ही गंभीर है जितनी कैंसर जैसी बीमारियां। क्योंकि इसका कोई स्थायी इलाज दवाओं से संभव नहीं है। अधिकतर मामलों में सर्जरी ही इसका विकल्प है। पीरियड्स के दौरान असामान्य रूप से तेज दर्द, बार-बार पेनकिलर लेने की आवश्यकता, पीरियड्स से पहले या बाद में लगातार दर्द बने रहना, सेक्स या पेशाब करते समय दर्द होना, कब्ज या डायरिया जैसी समस्या होना इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार एंडोमेट्रियोसिस को समझें तो यह महिलाओं के गर्भाशय से जुड़ी एक स्थिति है। गर्भाशय की तीन परतों में सबसे अंदरूनी परत ‘एंडोमेट्रियम’ कहलाती है। यही परत हर महीने बनती और झड़ती है और खून के रूप में बाहर निकलती है। जब यह परत गर्भाशय के अलावा शरीर के अन्य हिस्सों, जैसे ओवरीज या पेल्विस में बनने लगे तो इसे एंडोमेट्रियोसिस कहा जाता है। अगर यह परत ओवरीज पर विकसित हो जाए तो यह बांझपन तक का कारण बन सकती है। चिकित्सकों का कहना है कि समय पर इलाज और सही जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी को काबू किया जा सकता है।
इसके लिए एंटी-इन्फ्लेमेटरी डाइट अपनाना जरूरी है। इसके साथ पीडि़त को मटन, कैफीन, रिफाइंड शुगर, ग्लूटेन और अल्कोहॉल जैसी चीजों से दूरी बनानी चाहिए। नियमित योग और व्यायाम करने से भी काफी फायदा हो सकता है। हरी सब्जियों और फाइबर से भरपूर संतुलित भोजन से स्थिति बेहतर होती है। विशेषज्ञों की मानें तो महिलाएं अक्सर तेज पीरियड दर्द को सामान्य मानकर नजऱअंदाज़ कर देती हैं और डॉक्टर से संपर्क तभी करती हैं जब स्थिति बिगड़ जाती है। जबकि सही समय पर परामर्श लेने से न केवल दर्द से राहत पाई जा सकती है बल्कि भविष्य में होने वाली गंभीर जटिलताओं से भी बचा जा सकता है।







