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पुतिन-शी जीना चाहते हैं 150 साल तक, कर रहे अमरत्व की कल्पना

Politics Mirror by Politics Mirror
September 20, 2025
in विदेश
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पुतिन-शी जीना चाहते हैं 150 साल तक, कर रहे अमरत्व की कल्पना
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मास्को। पिछले दिनों बीजिंग में विक्ट्री परेड आयोजित की गई थी। जहां चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरिया के किम जोंग एक ही मंच पर मिले थे। किम जोंग उन की एक हॉट-माइक बातचीत सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इस वीडियो में पुतिन और शी ऑर्गन ट्रांसप्लांट और बायोटेक्नोलॉजी से 150 साल तक जीने की बात कह रहे हैं। अब सवाल ये है कि ये सिर्फ पुतिन की कल्पना है, या वाकई मेडिकल साइंस इस स्तर तक पहुंच चुका है कि इंसान अमरत्व प्राप्त कर सकता है।

बता दें साल 2010-2020 के दशक से कई देशों की सरकारें और निजी वैज्ञानिक समूह उम्र बढ़ाने के प्रोसेस सेलुलर रीजुवेनेशन पर बड़े पैमाने पर निवेश कर रहे हैं। रूस ने भी स्टेट लेवल प्रोजेक्ट और रिसर्च फंडिंग बनाई है जो जीन-सेल रिन्यूअल और अंगों की रीजनरेशन पर काम करते हैं। पुतिन की इसमें व्यक्तिगत रुचि भी है। अब तक मेडिकल साइंस ने इतना तो कर ही लिया है कि ऑर्गन ट्रांसप्लांट से मरते हुए व्यक्ति को नया जीवनदान दिया जा सकता है। उन्हें अंग मिलते ही उनके जीवन के कुछ साल बढ़ जाते हैं लेकिन ये अमरता प्राप्त करना है, ऐसा नहीं कह सकते।

कई ट्रांसप्लांट एक्सपर्ट कहते हैं कि ऑर्गन ट्रांसप्लांट अमरता का रास्ता नहीं है। ट्रांसप्लांट के बाद इंसान को कई मुश्किलें भी झेलनी पड़ती हैं, जैसे लंबे समय तक इम्यूनो-सप्रेशन की दवाइयां खाना, इंफेक्शन का रिस्क और कैंसर का खतरा हमेशा बना रहता है। एम्स में फिजियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ सुब्रत बासु कहते हैं कि ट्रांसप्लांट असल मायने में किसी रोग की वजह से इंसान की घट रही उम्र को बढ़ाने में मदद करते हैं। सीधे शब्दों में कहा जाए तो बीमारी से होने वाली मृत्युदर इससे घटती है, लेकिन वे शरीर की उम्र को कम नहीं करते। इसलिए अंग बदलना उम्र के प्राकृतिक असर को रोककर अमर नहीं बनाता।

पिछले कुछ सालों में वैज्ञानिकों ने मेडिकल साइंस के क्षेत्र में बहुत काम किया है। इनमें जेनोट्रांसप्लांटेशन और बायो-प्रिंटेड ऑर्गन/टिश्यू मुख्य हैं। साल 2022-24 की कुछ शुरुआती क्लिनिकल केस-रिपोर्ट्स पॉजिटिव रहे। इन प्रयोगों में सूअर के दिल और गुर्दे मानव रिसीपिएंट्स में लगाए गए और कुछ मामलों में संक्रमण और अस्वीकृति के बावजूद शुरुआती सफलता मिली है। लेकिन ये सब अभी प्रयोग के शुरूआती स्तर पर हैं। अभी इसमें बहुत लंबा वक्त लगने वाला है। अमेरिका के ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. जेम्स मार्कमैन ने पुतिन-शी की हॉट-माइक बातचीत पर कहा कि ऑर्गन ट्रांसप्लांट जीवन को बचा सकते हैं पर अमरता का अभी तक कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं है। अभी भी असल चिंता ऑर्गन एक्सेस, एथिक्स और बराबरी की है।

कई वैज्ञानिकों का मानना है कि उम्र बढऩे को रोकने या रिवर्स करने के लिए अंगों को बार-बार बदलने की रणनीति एकदम व्यावहारिक नहीं है। शरीर के बाकी हिस्सों को भी उम्र से प्रभावित होते हैं और उन पर किसी इलाज का असर होगा। वैसे कुछ वैकल्पिक विचार जैसे अंगों को जेनेटिकली तौर पर बदलकर एंटी-एजिंग प्रोटीन बनाए जाएं, लेकिन ये फिलहाल न सिद्ध हैं और न नैतिक रूप से सही हैं। माना जाए तो पुतिन का कथन पूरी तरह काल्पनिक नहीं है। मेडिकल साइंस ने कुछ अंगों की मरम्मत, रीप्लेसमेंट और जीन-इंजीनियरिंग में बहुत अच्छा काम किया है। अभी ये सिर्फ प्रयोगात्मक स्तर पर है, इसके व्यवहारिक और नैतिक पक्ष तय नहीं हुए। इसलिए बड़े पैमाने पर लगातार ट्रांसप्लांट कर के हर व्यक्ति को अमर बना देना फिलहाल वैज्ञानिक रूप से संभव नहीं दिखता।

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