केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को मध्यप्रदेश की राजनीति में ‘मामा’ के नाम से विख्यात है। अपने 66वें जन्मदिन पर उन्होंने जो पांच संकल्प लिए हैं, वे केवल राजनीतिक घोषणा भर नहीं हैं, बल्कि समाजसेवा और जनभागीदारी का व्यापक संदेश भी देते हैं। पर्यावरण, सेवा, सहायता, शिक्षा और प्रतिभा प्रोत्साहन जैसे विषयों को केंद्र में रखकर शुरू की गई यह पहल यदि गंभीरता से लागू होती है, तो निश्चित ही समाज के तमाम वर्गों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है। इन संकल्पों में सबसे महत्वपूर्ण पहल ‘मामा कोचिंग’ की है, जिसके माध्यम से विदिशा संसदीय क्षेत्र के आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की निशुल्क तैयारी कराई जाएगी। विदिशा, रायसेन और भैरूंदा में शुरू होने वाले इस ‘मामा कोचिंग’ में प्रारंभिक चरण में 100-100 विद्यार्थियों के बैच बनाए जाएंगे। इसकी एक विशेषता यह भी है कि कोचिंग की व्यवस्था ऑनलाइन भी होगी, ताकि दूर-दराज के विद्यार्थी भी घर बैठे इसका लाभ ले सकें। प्रतियोगी परीक्षाओं की बढ़ती लागत और संसाधनों की कमी के बीच यह पहल प्रतिभाशाली लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं के लिए एक नई उम्मीद हो सकती है। पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी शिवराज ने एक सकारात्मक संदेश दिया है। स्वागत में माला, गुलदस्ते और उपहार देने की परंपरा के स्थान पर पौधे भेंट करने का आग्रह केवल प्रतीकात्मक बदलाव नहीं है, बल्कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव जगाने का प्रयास भी है। पौधारोपण को क्यूआर कोड और पोर्टल से जोडक़र उसे जनभागीदारी से जोडऩा एक अभिनव प्रयोग माना जा सकता है। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में मोबाइल हॉस्पिटल की योजना भी ग्रामीण क्षेत्रों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। आठों विधानसभाओं में चलित अस्पतालों के माध्यम से डाक्टर और नर्सिंग स्टाफ गांव-गांव पहुंचकर लोगों की जांच और उपचार करेंगे। यदि यह व्यवस्था नियमित और प्रभावी रहती है, तो ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में सकारात्मक बदलाव संभव है। इसके साथ ही दिव्यांगों को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराना और दसवीं-बारहवीं के मेधावी विद्यार्थियों को ‘प्रेम सुंदर प्रतिभा सम्मान’ के तहत सम्मानित करना भी सामाजिक संवेदना का परिचायक है। उनकी पत्नी साधना सिंह द्वारा संचालित ‘संभावना’ कोचिंग पहले से ही सैकड़ों युवाओं के लिए अवसर का मंच बन चुकी है। निहितार्थ यह कि, ये ‘मामा’ के संकल्प राजनीति को सेवा और समाजहित से जोडऩे की एक सकारात्मक पहल के रूप में देखे जा सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन संकल्पों का प्रभाव जमीन पर कितना दिखाई देता है। यदि ये संकल्प निरंतरता और पारदर्शिता के साथ लागू होते हैं, तो यह पहल वास्तव में हजारों युवाओं और जरूरतमंदों के जीवन में बदलाव ला सकती है।







