मध्यप्रदेश में बच्चों की जान लेने वाले कोल्ड्रिफ सिरप कांड की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि, राजधानी भोपाल के जेपी अस्पताल से दवाओं की गुणवत्ता को लेकर चौंकाने वाले मामले सामने आ गए। हालात इतने गंभीर हैं कि इलाज के लिए आये गरीब मरीजों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है, यह अस्पताल है या मरीजों के लिए इम्तिहान केंद्र?
वर्ष 2026 के सिर्फ नौ दिनों में जेपी अस्पताल से खराब दवा दिए जाने के दो मामले उजागर हो चुके हैं। 3 जनवरी को एक मरीज को फफूंदी लगी डिक्लोफेनाक टैबलेट मिलने की शिकायत सामने आई, तो 6 जनवरी को सील पैक क्लोरहेक्सिडिन माउथ वॉश में कीड़े जैसी आकृति दिखने का दावा किया गया। ये दोनों दवाएं न तो दुर्लभ हैं और न ही विशेष इलाज से जुड़ी, बल्कि रोजमर्रा के इलाज में सबसे ज्यादा दी जाने वाली दवाएं हैं। ऐसे में खतरा सीमित नहीं, व्यापक है। यहां सबसे चिंताजनक सवाल यह है कि अगर आम दवाओं की यह हालत है, तो बाकी दवाओं की गुणवत्ता कैसी होगी? मरीज इलाज के भरोसे अस्पताल पहुंचता है, लेकिन यहां उसे दवा लेने से पहले डर लगने लगा है। यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था की जड़ों में बैठी लापरवाही की ओर इशारा करती है।
सीएमएचओ द्वारा जांच दल का गठन और सैंपल टेस्टिंग की बात जरूर की जा रही है, लेकिन जब तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती, तब तक ये सारे दावे सिर्फ कागजी कार्रवाई लगते हैं। अधिकारी एक तरफ मरीज की शिकायत को गलत बता रहे हैं, दूसरी तरफ खुद स्वीकार रहे हैं कि माउथ वॉश में ‘अजीब चीज’ नजर आ रही है। यह विरोधाभास ही व्यवस्था की असल तस्वीर बयान कर देता है। अस्पताल परिसर में नमी और सीलन को लेकर स्टाफ की पुरानी शिकायतें भी अब सवालों के घेरे में हैं। ड्रग स्टोर और फार्मेसी में खराब स्टोरेज कंडीशन अगर पहले से ज्ञात थी, तो सुधार क्यों नहीं हुआ? क्या हादसे का इंतजार किया जा रहा था? और इस पूरे मामले में जेपी अस्पताल के सिविल सर्जन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। जिम्मेदारी के पद पर बैठा अधिकारी अगर जवाब देने से बचता है, तो भरोसा कैसे बने?
सरकारी अस्पताल गरीब और आम आदमी की आखिरी उम्मीद होते हैं। लेकिन जब वहां दवाएं ही बीमार निकलने लगें, तो इलाज एक परीक्षा बन जाता है, जिसमें पास होना मरीज के बस में नहीं। अब जरूरत सिर्फ जांच की नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने और सिस्टम को दुरुस्त करने की है, वरना इलाज का यह इम्तिहान जानलेवा साबित हो सकता है।







