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Home मध्यप्रदेश

पूर्व सीएम उमा भारती का भावुक ट्वीट-राहुल लोधी को टिकट देकर एहसान नहीं किया, यह पार्टी की मजबूरी थी

Politics Mirror by Politics Mirror
July 17, 2025
in मध्यप्रदेश, राजनीति इन दिनों
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पूर्व सीएम उमा भारती का भावुक ट्वीट-राहुल लोधी को टिकट देकर एहसान नहीं किया, यह पार्टी की मजबूरी थी
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भोपाल। बीजेपी की तेजतर्रार नेता एवं मध्य प्रदेश की पूर्व सीएम उमा भारती ने एक ट्वीट के जरिए पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने अपने भतीजे राहुल लोधी को टिकट देने को लेकर कहा कि यह कोई पार्टी का एहसान नहीं था, बल्कि पार्टी की मजबूरी थी। अपने भावुक ट्वीट में उन्होंने अपने परिवार की राजनीतिक यात्रा और बलिदानों का जिक्र किया, जो अब चर्चा का विषय बन गया है।
बता दें उमा भारती ने 16 जुलाई को यह ट्वीट किया। उन्होंने कहा कि मेरे भाई-भतीजों को मेरी छवि की चिंता ने उनकी योग्यता के मुताबिक तरक्की से रोका। राहुल को टिकट देना पार्टी के लिए जरूरी था, क्योंकि बुंदेलखंड में बीजेपी को नुकसान हो सकता था। पूर्व सीएम उमा भारती ने खुलासा किया कि उनकी वजह से परिवार पर झूठे आरोप जैसे लूट और डकैती लगे, लेकिन कोर्ट ने हमेशा उन्हें निर्दोष साबित किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें चुनाव नहीं लड़ाया जाता, तो उनके भाई या भतीजे पहले ही सांसद या विधायक बन सकते थे।
बता दें राहुल लोधी की 2018 में खरगापुर से विधायक निर्वाचन को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 2022 में रद्द कर दिया था, जिसमें नामांकन पत्रों में गड़बड़ी पाई गई थी। यह घटना उनके बयान को और गहराई देती है। उमा ने कहा कि ग्राम डूंडा, जिला टीकमगढ़ के लोधीवंश के जिस परिवार में जन्मी वहां मेरे संन्यासी जीवन के पूर्व के चार भाई और एक बहन थी जिसमें से दो बड़े भाइयों का और एक बहन का निधन हो चुका है, मैं सबसे छोटी थी इसलिए बहुत लाड़ प्यार से पली। फिर 6 साल की आयु से सामाजिक जीवन में आकर प्रवचन शुरू हो गए, देश-विदेश में मेरे प्रवचन सुनने वालों ने मुझे बाल गोपाल ही कहा।
उन्होंने कहा कि मेरे परिवार ने मेरी राजनीति के कारण बहुत कष्ट उठाया है। शायद ही मध्य प्रदेश बीजेपी के बड़े पदों पर बैठे नेताओं के परिवार ने इतने कष्ट उठाए हों, सरकार चाहे कांग्रेस की रही हो या बीजेपी की। मेरी वजह से परिवार की प्रताडऩा हुई। लूट, डकैती जैसे झूठे आरोप लगे और कोर्ट में हमेशा वह पूरी तरह से निर्दोष साबित हुए। मेरे भाइयों की संताने मेरी छवि की चिंता के कारण खुद जितनी योग्यता रखते थे उतनी तरक्की नहीं कर पाए। मेरे एक भाई के बेटे राहुल को टिकट देना परिवार पर कोई एहसान नहीं था पार्टी की मजबूरी थी।

ये भी कहा
उमा ने कहा कि बुंदेलखंड में बीजेपी को इससे नुकसान हो सकता था मेरा परिवार तो जनसंघ के समय से बीजेपी में है राहुल और सिद्धार्थ संघ में बाल स्वयंसेवक थे तब मैं राजनीति से कोसों दूर थी। मेरा परिवार जनसंघ से जुड़ा था। बीजेपी अगर मुझे चुनाव न लड़ाती तो मेरे परिवार के भाई या भतीजे सांसद या विधायक बहुत पहले बन गए होते। टीकमगढ़ जिले में सामंती शोषण के आतंक की जड़ें बीजेपी के राज्य में भी उखड़ नहीं पाई थी। उन्होंने कहा कि राहुल ने अपनी पत्नी उमिता सिंह को जिला पंचायत का अध्यक्ष बनाकर पूरे बुंदेलखंड के सामंती आतंक के गढ़ को चुनौती दी है। अब दोनों पति-पत्नी शान और स्वाभिमान के साथ राजनीति करते हैं। मेरे चारों भाई ऐसे ही रहे, मेरे पिता और दादा भी ऐसे ही थे। ऐसे परिवार में जन्म लेने से प्राप्त संस्कारों से ही राजनीति में कई मुकाम मैंने हासिल किए।

अटल, अडवाणीजी की छत्रछाया मिली
उन्होंने कहा कि राजनीति में आते ही अटलजी, आडवाणीजी, राजमाताजी और संघ के वरिष्ठतम स्वयंसेवकों की छत्रछाया मिली जो मेरे से 30, 40 साल बड़े थे। मेरी लोकप्रियता से उन्हें गर्व होता था फिर भी मुझे अपना बालक जैसा मानते थे मुझे उन वरिष्ठों की छत्रछाया में संगठन एवं सत्ता में उच्च पद प्राप्त हुए। उमा का यह बयान तब आया है जब पार्टी के अंदर टिकट आवंटन को लेकर असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। उमा भारती का गुस्सा इस संदर्भ में पार्टी की आंतरिक राजनीति को भी दर्शाता है।

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