मप्र के राजनीति के गलियारों में इन दिनों नींद नहीं, बल्कि बेचैन करवटें बदली जा रही हैं। प्रदेश के एक कद्दावर, कुलीन नेताजी की ‘निजता’ की परत जैसे ही जरा-सी खिसकी, वैसे ही कई सफेदपोशों की हवाईयां उडऩे लगीं। मामला किसी एक किस्से भर का नहीं, बल्कि उस दर्पण का है, जिसमें झांकने से हर कोई कतराता है। प्रदेश की राजनीति में छोटे-बड़े ऐसे अनेक कुलीन नाम हैं, जिनके ‘बेडरूम’ के किस्से किसी मसालेदार कहानी से कम रसपूर्ण नहीं हैं। मगर निजता के मजबूत आवरण ने अब तक सबको ढक रखा है, वरना न जाने कितने रंगीले सफेदपोशों के परिवार उजड़ जाएं। कई ‘महान’ आत्माएं बदनाम कहानियां बन जाएं। नारदजी कहते हैं कि, राजनीति में आदर्श मंच से ऊंचे सिद्धांतों का उद्घोष होता है, जबकि जीवन के राग पीछे के कमरों में गुनगुनाए जाते हैं। इसलिए, फिलहाल राज को राज ही रहने देना बेहतर है। क्योंकि अगर पर्दा उठा, तो न जाने कितने सफेदपोश तमाशा बन जाएंगेज्!
भाईसाब के विवाह की चर्चाओं का बाजार गर्म!
भाजपा के एक नामचीन और अब तक अविवाहित भाईसाब के विवाह को लेकर इन दिनों चर्चाओं का बाजार गरमाया हुआ है। उनके जीवन में शुभ मुहूर्त की आहट सुनाई देने लगी है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि उनका विवाह एक आईएएस महिला अधिकारी से तय माना जा रहा है, जो वर्तमान में प्रदेश के एक जिले की कलेक्टर हैं। हालांकि, विवाह की तारीख और स्थान को लेकर अब तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में अटकलों का शंखनाद जरूर हो चुका है। इस संभावित विवाह को लेकर तरह-तरह की राजनीतिक गणनाएं भी लगाई जा रही हैं। नारदजी कहते हैं कि, भाईसाब विवाह बंधन में बंधें या न बंधें, मंडप सजे या न सजे, पर राजनीति की चौपाल में कयासों की बारात निकल चुकी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि ये चर्चाएं हकीकत का रूप लेती हैं या फिर अटकलों तक ही सीमित रह जाती हैं।
अब राजधानी में ‘वूमेन एडमिनिस्ट्रेशन’!
मप्र सरकार राजधानी में जल्द एक नया, और साहसिक प्रयोग करने की तैयारी में है। इस प्रयोग का नाम होगा-वूमेन एडमिनिस्ट्रेशन। यानी अब सिर्फ नीति निर्माण ही नहीं, बल्कि प्रशासन की कमान भी महिलाओं के हाथों में सौंपने की तैयारी है। बीएमसी में महिला कमिश्नर की नियुक्ति के साथ ही पुलिस प्रशासन के कई महत्वपूर्ण पदों पर महिला अधिकारियों की तैनाती कर दी गई है। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि सरकार की सुनियोजित रणनीति है। चर्चा है कि कलेक्टर, कमिश्नर और पुलिस कमिश्नर जैसे शीर्ष पदों के लिए भी सरकार सुयोग्य महिला अधिकारियों की तलाश शुरू कर चुकी है। मकर संक्रांति के बाद कभी भी प्रशासनिक फेरबदल संभव है और राजधानी के इन प्रमुख पदों पर महिला अधिकारियों की नियुक्ति की जा सकती है। नारदजी कहते हैं कि, यदि ऐसा होता है, तो मप्र देश का पहला ऐसा राज्य बन जाएगा, जहां राजधानी का पूरा प्रशासनिक ढांचा महिलाओं के नेतृत्व में होगा।
नेताजी के धोखेबाज कांग्रेसी पट्ठे
राजनीति में जितना बड़ा नेता, उसके इर्द-गिर्द उतने ही ज्यादा पट्ठे। कांग्रेस के एक बड़े नेताजी के आसपास भी कभी ऐसा ही नजारा होता था। उनके आसपास पट्ठोंकी ऐसी फौज रहती थी, मानो सत्ता का असली केंद्र वही हों। कहा जाता है कि कांग्रेस में रहते हुए नेताजी असाधारण रूप से प्रभावशाली थे। उसी दौर में उन्होंने अपने कई खासमखासों का भाग्य संवारा। किसी को पेट्रोल पंप दिलाया, तो किसी को गैस एजेंसी। नेताजी की कृपा से प_े एक-एक कर ‘पावरफुल’ बनते चले गए। लेकिन वक्त हमेशा एक-सा नहीं रहता। जैसे ही नेताजी ने भाजपा का दामन थामा, वही कथित वफादार पल भर में बेगाने हो गए। जिनकी पहचान ही नेताजी से थी, उन्होंने साफ कह दिया ‘आप कौन? हम आपको नहीं जानते।’ नारदजी कहते हैं, राजनीति में रिश्ते सिद्धांतों से नहीं, ‘पावर’ से संचालित होते हैं। सत्ता की चमक फीकी पड़ते ही साथ खड़े चेहरे भी साये बनकर बिखर जाते हैं। और तभी अपने-पराए की असलियत उजागर होती है।
आईएएस दंपत्ति पैदल नर्मदा प्रदक्षिणा पर!
प्रदेश के एक पूर्व वरिष्ठ आईएएस इन दिनों अपनी आध्यात्मिक यात्रा को लेकर चर्चाओं हैं। शासकीय सेवा से निवृत्ति लेते ही साहब ने सांसारिक माया मोह का परित्याग किया, कंधे पर झोला डाला और धर्मपत्नी संग मां नर्मदा नदी की लगभग 3600 किलोमीटर लंबी पैदल प्रदक्षिणा पर निकल पड़े हैं। न कोई तामझाम, न विशेष सुविधाएं, साधुवेश जीवन और भिक्षावृत्ति पर आधारित दिनचर्या। ये साहब प्रतिदिन लगभग 20 से 25 किलोमीटर पैदल चलेंगे, जिसमें अनुशासन और साधना ही उनका संबल होगा। बताया जाता है कि साहब ने होशंगाबाद के समीप मां नर्मदा के पावन तट पर एक आश्रम भी बना लिया है। नर्मदा प्रदक्षिणा पूर्ण होने के बाद साहब इसी आश्रम में निवास करेंगे और शेष जीवन आध्यात्मिक साधना तथा नर्मदा परिक्रमा वासियों की सेवा में समर्पित करेंगे। नारदजी कहते हैं कि प्रशासनिक शिखर से आध्यात्मिक साधना की इस प्रदक्षिणा को लोग सच्चे अर्थों में वानप्रस्थ की ओर बढ़ाया गया एक दृढ़ और प्रेरक कदम मान रहे हैं।







