रियाद। सऊदी अरब ने एक ही साल में फांसी देने का अपना अब तक का सबसे खतरनाक रिकॉर्ड तोड़ दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस साल अब तक 340 लोगों को मौत की सजा दी जा चुकी है, जो खुद सऊदी इतिहास का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह संख्या 2024 के उस रिकॉर्ड से भी ज्यादा है, जब 338 लोगों को मौत की सजा दी गई थी। ताजा आंकड़ा तब सामने आया, जब सऊदी गृह मंत्रालय ने पुष्टि की कि मक्का में सोमवार को तीन लोगों को हत्या के मामले में फांसी दी गई। बता दें कि चीन और ईरान के बाद 2022, 2023 और 2024 में सऊदी अरब दुनिया में सबसे ज्यादा फांसी देने वाले देशों में तीसरे नंबर पर रहा।
रिपोर्ट के मुताबिक इस साल दी गई फांसियों में से 232 मौत की सजा ड्रग्स से जुड़े मामलों में दी गई है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक मौत की सजा सिर्फ सबसे गंभीर अपराधों यानी जानबूझकर की गई हत्या तक सीमित होनी चाहिए। इसके अलावा आतंकवाद के आरोपों में भी कई लोगों को मौत के घाट उतारा गया, जिनमें से कई मामलों में आरोप अस्पष्ट और बेहद व्यापक कानूनों के तहत लगाए गए थे।
रिपोर्ट के मुताबिक हाल के महीनों में दो ऐसे लोगों को भी फांसी दी गई, जो कथित अपराध के वक्त नाबालिग थे। यह सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार संधि का उल्लंघन है, जिस पर सऊदी अरब खुद हस्ताक्षरकर्ता है। 2020 में अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद सऊदी सरकार ने दावा किया था कि नाबालिगों को मौत की सजा नहीं दी जाएगी, लेकिन इसके बावजूद ऐसी फांसियां सामने आईं। ब्रिटेन स्थित मानवाधिकार संगठन का कहना है कि कम से कम पांच और ऐसे कैदी हैं, जिन्हें नाबालिग अपराधों के बावजूद किसी भी वक्त फांसी दी जा सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक एक शोधकर्ता कहा कि सऊदी अरब का यह रवैया जिंदगी के अधिकार के प्रति ‘निर्दयी और खतरनाक अनदेखी’ को दिखाता है। उनका कहना है कि कई मामलों में यातनाओं से कबूलनामे लिए गए, खामियों से भरे ट्रायल हुए और फिर मौत की सजा सुना दी गई। फांसी पाने वालों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की भी है, खासकर ड्रग्स मामलों में। 2022 के अंत में सऊदी अरब ने ड्रग्स से जुड़े मामलों में फांसी दोबारा शुरू की थी, जिसे तीन साल के लिए रोका गया था।







