मप्र में साइबर अपराध तेजी से संगठित और खतरनाक रूप ले चुका है। बीते छह महीनों में ऑनलाइन ठगी के 17 से अधिक नए तरीके सामने आए हैं और हर तरीके से सैकड़ों लोग शिकार हुए हैं। यह केवल संख्या नहीं, बल्कि उस रफ्तार का संकेत है जिससे साइबर अपराधी अपनी रणनीति बदल रहे हैं। राज्य के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में लगभग 22 हजार से अधिक साइबर अपराध के मामले दर्ज हुए थे। वर्ष 2024 में यह संख्या बढक़र करीब 32 हजार के पार पहुंच गई। बीते दो वर्षों में नागरिकों से सैकड़ों करोड़ रुपये की ठगी की पुष्टि हो चुकी है। 1930 साइबर हेल्पलाइन पर हर दिन बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज हो रही हैं, जो समस्या की गंभीरता दर्शाती हैं। हाल के दिनों में एपीके फाइल के जरिए ठगी का चलन तेजी से बढ़ा है। शादी का निमंत्रण, ई-चालान, बिजली बिल या बधाई संदेश के नाम पर भेजी गई फाइल दरअसल जाल होती है। जैसे ही व्यक्ति उसे डाउनलोड कर खोलता है, मोबाइल का डेटा हैक हो सकता है और बैंक खातों तक पहुंच बन जाती है। ठगी अब केवल खाते में रकम रखने वालों तक सीमित नहीं रही। जिनके खाते खाली हैं, उनके नाम पर ऑनलाइन कर्ज निकाल लिया जाता है। जब किस्त भरने का संदेश आता है, तब पीडि़त को ठगी का पता चलता है। इसके अलावा डिजिटल अरेस्ट, फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर वीडियो कॉल, निवेश का झांसा और नौकरी के नाम पर ठगी जैसे नए हथकंडे भी सामने आए हैं। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहर साइबर अपराध के बड़े केंद्र बनते जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी डिजिटल लेनदेन बढऩे के साथ जोखिम बढ़ा है। पुलिस कार्रवाई और तकनीकी निगरानी के बावजूद अपराधियों की चाल तेज है। ऐसे में जागरूकता ही सबसे मजबूत सुरक्षा है। मोबाइल और कंप्यूटर को अपडेट रखें। मजबूत पासवर्ड और दो-स्तरीय सुरक्षा अपनाएं। अनजान लिंक या एपीके फाइल न खोलें। ओटीपी और बैंक विवरण किसी से साझा न करें। ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कॉल पर घबराएं नहीं और तुरंत 1930 पर शिकायत करें। याद रखें, साइबर दुनिया में एक क्लिक आपकी मेहनत की कमाई दांव पर लगा सकता है। सावधानी ही सुरक्षा है।







