Politics Mirror
Advertisement
  • होम
  • राजनीति इन दिनों
  • मध्यप्रदेश
    • भोपाल
    • इंदौर
    • ग्वालियर
    • जबलपुर
  • देश
  • विदेश
  • परदे के पीछे
  • राजनीतिक चिंतन
  • टेक्नालाजी
  • जीवन शैली
    • धर्म / ज्योतिष
    • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
  • होम
  • राजनीति इन दिनों
  • मध्यप्रदेश
    • भोपाल
    • इंदौर
    • ग्वालियर
    • जबलपुर
  • देश
  • विदेश
  • परदे के पीछे
  • राजनीतिक चिंतन
  • टेक्नालाजी
  • जीवन शैली
    • धर्म / ज्योतिष
    • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Politics Mirror
No Result
View All Result
Home जीवन शैली

यह हर आदमी की कहानी है

Politics Mirror by Politics Mirror
January 28, 2026
in जीवन शैली, धर्म / ज्योतिष
0
यह हर आदमी की कहानी है
0
SHARES
0
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

टाल्सटाय की प्रसिद्ध कहानी है कि एक आदमी के घर एक संन्यासी मेहमान हुआ-एक परिव्राजक! रात गपशप होने लगी, उस परिव्राजक ने कहा कि तुम यहां क्या ये छोटी-मोटी खेती में लगे हो! साइबेरिया में मैं यात्रा पर था तो वहां जमीन इतनी सस्ती है, मुफ्त ही मिलती है। तुम यह जमीन छोड़-छोडक़र, बेच-बाच कर साइबेरिया चले जाओ। वहां हजारों एकड़ जमीन मिल जाएगी इतनी जमीन में। वहां खेती करो, बड़ी उपयोगी जमीन है। और लोग वहां के इतने सीधे-सादे हैं कि करीब-करीब मुफ्त ही जमीन दे देते हैं। उस आदमी को वासना जगी। उसने दूसरे दिन ही सब बेच-बाच कर साइबेरिया की राह पकड़ी। जब पहुंचा तो उसे बात सच्ची मालूम पड़ी। उसने पूछा कि मैं जमीन खरीदना चाहतहूं। तो उन्होंने कहा, जमीन खरीदने का तुम जितना पैसा लाए हो, रख दो। और जमीन का हमारे पास यही उपाय है बेचने का कि कल सुबह सूरज के ऊगते तुम निकल पडऩा और सांझ सूरज के डूबते तक जितनी जमीन तुम घेर सको घेर लेना। बस चलते जाना…जितनी जमीन तुम घेर लो। सांझ सूरज के डूबते-डूबते उसी जगह पर लौट आना जहां से चले थे,बस यह शर्त है। जितनी जमीन तुम चल लोगे, उतनी जमीन तुम्हारी हो जाएगी। रात-भर तो सो न सका वह आदमी। तुम भी होते तो न सो सकते; ऐसे क्षणों में कोई सोता है? रात-भर योजनाएं बनाता रहा कि कितनी जमीन घेर लूं। सुबह ही भागा। उसने साथ अपनी रोटी भी ले ली थी, पानी का भी इंतजाम कर लिया था। रास्ते में भूख लगे, प्यास लगे, तो सोचा था चलते ही चलते खाना भी खा लूंगा, पानी भी पी लूंगा। रुकना नहीं है; चलना क्या है, दौडऩा है। दौडऩा शुरू किया; क्योंकि चलने से तो आधी ही जमीन कर पाऊंगा, दौडऩे से दोगुनी हो सकेगी…भागा…भागा…। सोचा था कि ठीक बारह बजे लौट पडूंगा, ताकि सूरज डूबते-डूबते पहुंच जाऊं। बारह बज गए, मीलों चल चुका है, मगर वासना का कोई अंत है? उसने सोचा कि बारह तो बज गए, लौटना चाहिए; लेकिन सामने और उपजाऊ जमीन, और उपजाऊ जमीन…थोड़ी सी और घेर लूं। जरा तेजी से दौडऩा पड़ेगा लौटते समय,इतनी ही बात है, एक ही दिन की तो बात है, और जरा तेजी से दौड़ लूंगा। उसने पानी भी न पीया, क्योंकि रुकना पड़ेगा उतनी देर-एक दिन की ही तो बात है, फिर कल पी लेंगे पानी, फिर जीवन-भर पीते रहेंगे। उस दिन उसने खाना भी न खाया। रास्ते में उसने खाना भी फेंक दिया, पानी भी फेंक दिया, क्योंकि उनका वजन भी ढोना पड़ रहा है, इसलिए दौड़ ठीक से नहीं हो पा रही। उसने अपना कोट भी उतार दिया, अपनी टोपी भी उतार दी-जितना निर्भार हो सकता था हो गया।

एक बज गया, लेकिन लौटने का मन नहीं होता, क्योंकि आगे और-और सुंदर भूमि आती चली जाती है। मगर फिर लौटना ही पड़ा, दो बजे तक तो लौटा। अब घबराया। सारी ताकत लगाई; लेकिन ताकत तो चुकने के करीब आ गई थी। सुबह से दौड़ रहा था, हांफ रहा था, घबरा रहा था कि पहुंच पाऊंगा सूरज डूबते तक कि नहीं। सारी ताकत लगा दी। पागल होकर दौड़ा। सब दांव पर लगा दिया। और सूरज डूबने लगा…। ज्यादा दूरी भी नहीं रह गई है, लोग दिखाई पडऩे लगे।

गांव के लोग खड़े हैं और आवाज दे रहे हैं कि आ जाओ, आ जाओ! उत्साह दे रहे हैं, भागे आओ! अजीब सीधे-सादे लोग हैं-सोचने लगा मन में; इनको तो सोचना चाहिए कि मैं मर ही जाऊं, तो इनको धन भी मिल जाए और जमीन भी न जाए। मगर वे बड़ा उत्साह दे रहे हैं कि भागे आओ! उसने आखिरी दम लगा दी-भागा, भागा, भागा…। सूरज डूबने लगा; इधर सूरज डूब रहा है, उधर भाग रहा है…। सूरज डूबते-डूबते बस जाकर गिर पड़ा। कुछ पांच-सात गज की दूरी रह गई है, वह घिसटने लगा। अभी सूरज की आखिरी कोर क्षितिज पर रह गई-घिसटने लगा। और जब उसका हाथ उस जमीन के टुकड़े पर पहुंचा जहां से भागा था,उस खूंटी पर, सूरज डूब गया। वहां सूरज डूबा, यहां यह आदमी भी मर गया।  इतनी मेहनत कर ली! शायद हृदय का दौरा पड़ गया। और सारे गांव के सीधे-सादे लोग जिनको वह समझता था, हंसने लगे और एक-दूसरे से बात करने लगे कि ये पागल आदमी आते ही जाते हैं! इस तरह के पागल लोग आते ही रहते हैं!

यह कोई नई घटना न थी, अक्सर लोग आ जाते थे खबरें सुन कर, और इसी तरह मरते थे। यह कोई अपवाद नहीं था, यही नियम था। अब तक ऐसा एक भी आदमी नहीं आया था, जो घेरकर जमीन का मालिक बन पाया हो। यह कहानी तुम्हारी कहानी है, तुम्हारी जिंदगी की कहानी है, सबकी जिंदगी की कहानी है। यही तो तुम कर रहे हो। दौड़ रहे हो कि कितनी जमीन घेर लें! बारह भी बज जाते हैं। दोपहर भी आ जाती है, लौटने का भी समय होने लगता है-मगर थोड़ा और दौड़  लें! न भूख की, न प्यास की फिक्र है। जीने का समय कहां है? पहले जमीन घेर लें, पहले तिजोरी भर लें, पहले बैंक में रुपया इक_ा हो जाए; फिर जी लेंगे, फिर बाद में जी लेंगे, एक ही दिन का तो मामला है। और कभी कोई नहीं जी पाता। गरीब मर जाते हैं भूखे, अमीर मर जाते हैं भूखे, कभी कोई नहीं जी पाता। जीने के लिए थो?ी विश्रांति चाहिए। जीने के लिए थो?ी समझ चाहिए। जीवन मुफ्त नहीं मिलता…बोध चाहिए!

सिर्फ बुद्धपुरुष जी पाते हैं। उनके जीवन में एक प्रसाद होता है, एक लयबद्धता होती है, एक छंद होता है। वे जी पाते हैं, क्योंकि वे दौ?ते नहीं। वे जी पाते हैं। क्योंकि वे ठहर गए हैं। वे जी पाते हैं, क्योंकि उनका चित्त अब चंचल नहीं है। इस संसार में जमीन घेरकर करेंगे क्या? इस संसार का सब यहीं प?ा रह जाएगा; न हम कुछ लेकर आते हैं, न हम कुछ लेकर जाएंगे।

-विचार

Previous Post

चावल की सही किस्म कंट्रोल रखती है ब्लड शुगर

Next Post

भोपाल चैंबर चुनाव…व्यापारियों के दुकान-दुकान दे रहे दस्तक प्रत्याशी

Politics Mirror

Politics Mirror

Next Post
भोपाल चैंबर चुनाव…व्यापारियों के दुकान-दुकान दे रहे दस्तक प्रत्याशी

भोपाल चैंबर चुनाव...व्यापारियों के दुकान-दुकान दे रहे दस्तक प्रत्याशी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

पॉलिटिक्स मिरर पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

Recent News

बढ़ता स्तन कैंसर, इलाज से ज्यादा जागरूकता जरूरी

बढ़ता स्तन कैंसर, इलाज से ज्यादा जागरूकता जरूरी

March 8, 2026
चिंतामणि के बाद कालूहेड़ा के बागी तेवर

चिंतामणि के बाद कालूहेड़ा के बागी तेवर

March 8, 2026
मप्र में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की तैयारी

मप्र में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की तैयारी

March 7, 2026
महंगी होती रसोई की आंच

महंगी होती रसोई की आंच

March 7, 2026

Politics Mirror का उद्देश्य राजनीति में शुचिता की पैरवी करने के साथ राजनीतिक पत्रकारिता को एक नया दृष्टिकोण प्रदान करना है। 'Politics Mirror' स्पष्ट, निष्पक्ष और अंतर दृष्टिपूर्ण मूल्य-आधारित पत्रकारिता को बढ़ावा देता है। यह राजनीति में 'नैतिक मूल्यों' और आमजन के संवैधानिक अधिकारों, मुद्दों और समस्याओं की बात करता है।

Follow Us

Category

  • राजनीति इन दिनों
  • मध्यप्रदेश
  • देश
  • परदे के पीछे
  • विदेश
  • राजनीतिक चिंतन
  • जीवन शैली
  • मनोरंजन
  • ई-पेपर
  • About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact

© 2025 Politics Mirror. All rights reserved.

No Result
View All Result
  • होम
  • राजनीति इन दिनों
  • मध्यप्रदेश
    • भोपाल
    • इंदौर
    • ग्वालियर
    • जबलपुर
  • देश
  • विदेश
  • परदे के पीछे
  • राजनीतिक चिंतन
  • टेक्नालाजी
  • जीवन शैली
    • धर्म / ज्योतिष
    • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
  • ई-पेपर

© 2025 Politics Mirror. All rights reserved.