नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने शोध की गुणवत्ता और मौलिकता को बनाए रखने के लिए अब कड़ा रुख अपनाया है। हाल ही में एक बड़ी कार्रवाई के तहत यूजीसी ने बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (बीआरएबीयू), मुजफ्फरपुर के दर्जनों पीएचडी छात्रों की थीसिस वापस कर दी हैं। जांच में यह पाया गया कि इन शोध पत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स (एआई), जैसे चैटजीपीटी का बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल किया गया था। जांच के दौरान इन थीसिस में 40 प्रतिशत से अधिक सामग्री कॉपी-पेस्ट या एआई द्वारा निर्मित पाई गई, जो शोध के मानकों का गंभीर उल्लंघन है।
यूजीसी द्वारा बीआरएबीयू की थीसिस लौटाए जाने का यह दूसरा मामला है, जिससे विश्वविद्यालय प्रशासन और शोधार्थियों के बीच हडक़ंप मचा दिया है। विश्वविद्यालय के पीआरओ राजेश कुमार के अनुसार, यूजीसी की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि थीसिस का एक बड़ा हिस्सा मौलिक नहीं था। इसके बाद इन सभी शोध छात्रों को अपनी थीसिस दोबारा लिखने के निर्देश दिए गए हैं। भविष्य में ऐसी गड़बडिय़ों को रोकने के लिए विश्वविद्यालय ने अब टर्निटिन जैसे अत्याधुनिक प्लेजरिज्म चेकिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया है।
हिन्दी की सामग्री में नकल पकडऩा चुनौती
शोध के क्षेत्र में एआई चोरी को लेकर एक दिलचस्प और चिंताजनक पहलू भी सामने आया है। विशेषज्ञों और शिक्षकों के मुताबिक, अंग्रेजी भाषा में लिखी गई थीसिस में एआई की नकल पकडऩा आसान है, क्योंकि टर्निटिन जैसे सॉफ्टवेयर के गणितीय मॉडल अंग्रेजी भाषा में प्लेजरिज्म (साहित्यिक चोरी) को बेहद सटीकता से पकड़ते हैं। इसके विपरीत, हिंदी में लिखी गई सामग्री में नकल पकडऩा वर्तमान में एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। हिंदी के लिए प्लेजरिज्म जांच के उपकरण अभी उतने सशक्त नहीं हैं। चूंकि यूजीसी के पास देशभर की थीसिस का केंद्रीय रिकॉर्ड होता है, इसलिए तकनीकी रूप से गड़बडिय़ों को पकडऩा अब आसान हो गया है।
यूजीसी का क्या कहना है
यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि पीएचडी शोध में एआई टूल्स का उपयोग केवल सहायता के लिए किया जाना चाहिए, न कि पूरी सामग्री तैयार करने के लिए। वर्तमान नियमों के अनुसार, एआई द्वारा तैयार सामग्री को बिना श्रेय दिए इस्तेमाल करना प्लेजरिज्म की श्रेणी में आता है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद जैसी संस्थाओं ने भी सुझाव दिया है कि शोध में एआई का उपयोग 20 प्रतिशत से कम होना चाहिए और उसे सही तरीके से उद्धृत किया जाना चाहिए।







