कोलकाता। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों की आधिकारिक घोषणा से पहले ही प्रदेश की राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में सत्ता हासिल करने के लिए एक अत्यंत गोपनीय और रणनीतिक ब्लूप्रिंट तैयार किया है। इसी कड़ी में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सांसदों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें चुनावी रणनीति की बारीकियों और जमीनी हकीकत की समीक्षा की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य न केवल चुनावी औपचारिकताओं को पूरा करना नहीं था, बल्कि संगठन की ताकत और वोट बैंक को लेकर एक व्यापक रोडमैप तैयार करना था, ताकि राज्य में सत्ता परिवर्तन की मजबूत नींव रखी जा सके।
भाजपा के रणनीतिकारों के अनुसार बैठक में 12 लोकसभा सांसदों और दो राज्यसभा सांसदों के साथ वन-टू-वन चर्चा की गई। बैठक के दौरान हर क्षेत्र की विस्तृत रिपोर्ट ली गई और पार्टी ने राज्य की 100 से अधिक ऐसी विधानसभा सीटों को चिन्हित किया है, जहां भाजपा की जीत की प्रबल संभावनायें हैं। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि यदि संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय किया जाए और स्थानीय मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया जाए, तो बंगाल की सियासत में बड़ा उलटफेर संभव है। इसी रणनीति को पार्टी ने प्लान-100 नाम दिया है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन ने सांसदों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में केवल ऊपरी प्रचार तक सीमित न रहें, बल्कि हर जोन में कार्यकर्ताओं को संगठित कर स्थानीय समस्याओं पर राज्य सरकार के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन खड़ा करें। सांसदों को कहा गया है कि वे जनता से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को आक्रामक ढंग से उठाएं। विशेष रूप से बांग्लादेश की सीमा से सटे इलाकों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा गया है, जहां सुरक्षा, घुसपैठ और विकास जैसे मुद्दे चुनावी दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इन सीमावर्ती क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने के लिए विशेष योजना बनाई गई है। बैठक में यह भी तय किया गया कि केवल सांसदों के फीडबैक तक ही सीमित नहीं रहा जाएगा। आने वाले दिनों में पार्टी अध्यक्ष प्रदेश के विधायकों और वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ भी संवाद करेंगे ताकि रणनीति को और अधिक धार दी जा सके।







