भोपाल/रायसेन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विरासत से विकास हमारा मूल मंत्र है। हम अपने तंत्र को भी इसी मंशा के अनुरूप तैयार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अपनी समृद्धशाली संस्कृति और विरासतों को बेहतर तरीके से सहेजकर उन्हें संवारने के हमारे प्रयास हमेशा जारी रहेंगे। महलपुर पाठा के अतिप्राचीन श्रीराधा कृष्ण मंदिर का सभी संभव तरीके से जीर्णोद्धार और परिसर का विकास कर इसे भव्यतम स्वरुप प्रदान करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर रायसेन जिले के गैरतगंज के महलपुर पाठा स्थित मंदिर परिसर में आयोजित श्री कृष्ण पर्व कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर बोल रहे थे। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ यादव ने सांची विधानसभा क्षेत्र को 136 करोड़ रुपए के कई विकास कार्यों की सौगात भी दी। उन्होंने रिमोट का बटन दबाकर लोक निर्माण विभाग के 15 कार्य सहित जनजातीय ग्रामों तक सडक़ निर्माण और अनेक विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार तेजी से विकास कार्यों के लक्ष्य हासिल करते हुए आगे बढ़ रही है। जल्द ही प्रदेश के दो बड़े शहर इंदौर और भोपाल मेट्रोपोलिटन सिटी के रूप में विकसित होंगे। राजधानी भोपाल से सटा जिला रायसेन, सांची और विदिशा भी मेट्रोपोलिटन सिटी का हिस्सा बनेगा। यही नहीं राजगढ़ और नर्मदापुरम भी मेट्रोपोलिटन क्षेत्र में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मेट्रोपोलिटन सिटी विकसित होने पर रायसेन क्षेत्र के युवाओं को भी रोजगार के अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि रायसेन जिले के विकास के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
ये अतिथि उपस्थित थे
कार्यक्रम में जिले के प्रभारी एवं राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नारायण सिंह पंवार, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र शिवाजी पटेल, विधायक सुरेंद्र पटवा, पूर्व मंत्री रामपाल सिंह राजपूत, विधायक सांची डॉ प्रभुराम चौधरी, जिला पंचायत अध्यक्ष यशवंत मीणा, जिलाध्यक्ष राकेश शर्मा, संत श्री अमृतदास महाराज, यादव समाज के प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में महलपुर पाठा स्थित राधाकृष्ण मंदिर समिति के सदस्य व स्थानीय ग्रामीणजन उपस्थित थे।
महलपुर पाठा के राधाकृष्ण मंदिर का इतिहास
रायसेन जिले के देवनगर के समीप महलपुर पाठा गांव में अतिप्राचीन राधाकृष्ण मंदिर में राधा-कृष्ण और देवी रुक्मणि की मूर्ति एक ही श्वेत पत्थर पर बनी हुई है। मंदिर में स्थापित एक शिलालेख से इसके संवत् 1354 अर्थात वर्ष 1297 ईस्वी में निर्मित होने की जानकारी मिलती है। मंदिर में विष्णु यज्ञ भी होता है। मंदिर के पास स्थित किले में 51 बावडय़िां हैं। पास के जंगल से जैन परंपरा के भगवान आदिनाथ की मूर्ति भी मिली थी, जो अब देवनगर में स्थापित है। मंदिर के पास ही शिवलिंग, नंदी, गणेश और नागदेवता सहित नटराज की भी मूर्तियां हैं।







